सम-सामयिक घटना चक्र | Railway Solved Paper Books | SSC Constable Solved Paper Books | Civil Services Solved Paper Books
Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 32 परियोजनाओं को मंजूरी

32 projects approved under Pradhan Mantri Kisan Sampada Yojana
  • पृष्ठभूमि
  • भारत एक कृषि प्रधान देश है‚ अत: किसानों के हितों का ध्यान रखने हेतु भारत सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं।
  • वर्ष 2016 में ‘केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय’ (Ministry of Food Processing Industries) द्वारा एक महत्वाकांक्षी योजना ‘स्कीम एग्रो-मरीन प्रोसेसिंग एंड डेवलपमेंट ऑफ एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स’ या SAMPADA की शुरुआत की गई।
  • वर्ष 2017 में SAMPADA का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ (Pradhan mantri Kisan Sampada Yojna) कर दिया गया।
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-20 की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपये की लागत का अनुमोदन किया।
  • इस योजना की शुरुआत 14वें वित्त आयोग की अवधि की सह-समाप्ति के साथ हुई।
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य
  • 27 फरवरी‚ 2020 को खाद्य प्रसंस्करण मंत्री की अध्यक्षता में अंतर-मंत्रिस्तरीय अनुमोदन समिति ने ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ के तहत 32 परियोजनाओं को मंजूरी दी।
  • इन सभी परियोजनाओं का विस्तार देश के 17 राज्यों में होगा।
  • इन परियोजनाओं के संचालन हेतु सरकार द्वारा 406 करोड़ रुपये राशि की मंजूरी दी गई है।
  • प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना
  • यह भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है।
  • इस योजना के अंतर्गत आने वाले प्रमुख घटक हैं- एकीकृत कोल्ड चेन‚ मेगा फूड पार्क‚ कृषि प्रसंस्करण समूहों के लिए बुनिदयादी ढांचा‚ खाद्य सुरक्षा‚ खाद्य प्रसंस्करण का विस्तार‚ मानव संसाधन और संस्थान तथा गुणवत्ता आश्वासन बुनियादी ढांचे को विकसित करना।
  • यह योजना मुख्य रूप से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को संचालित करने तथा लोगों तक उसकी पहुंच को आसान बनाने का कार्य करती है।
  • प्रसंस्कृत खाद्य का बाजार प्रति वर्ष 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2016 में देश में खाद्य प्रसंस्करण बाजार 322 अरब डॉलर था‚ जो वर्ष 2020 के अंत तक 543 अरब डॉलर हो जाएगी।
  • वर्ष 2020 के अंत तक खाद्य प्रसंस्करण बाजार की दर 14.6 प्रतिशत हो जाएगी।
  • योजनांतर्गत होने वाले कार्य
  • यह योजना किसानों के सुविधा हेतु खेत से बाजार तक अनाज एवं अन्य संपदा की कुशल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन के साथ आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करती है।
  • फसल प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा फसल कटाई के बाद के नुकसान को न्यून करने का कार्य करती है।
  • इस योजना के अंतर्गत कृषि उन्मुख समूहों की पहचान करना तथा उन्हें राशि प्रदान करना ताकि उत्पादक केंद्रों से बाजार में खाद्य उत्पादों का हस्तांतरण सहज हो जाए।
  • यह योजना प्रसंस्करण स्तर को बढ़ाने‚ उपभोक्ताओं को सस्ती कीमत पर सुरक्षित और सुविधाजनक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने में भी मदद करती है।
  • योजना के कार्यान्वयन हेतु किए गए प्रयास 
  • खाद्य प्रसंस्करण एवं खुदरा क्षेत्र में निवेश को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने भारत में निर्मित खाद्य उत्पादों को ई-कॉमर्स के माध्यम से व्यापार में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment : FDI) की अनुमति दी है।
  • भारत सरकार के द्वारा स्थापित खाद्य पार्कों एवं इनमें स्थित कृषि प्रसंस्करण इकाइयों को रियायती ब्याज दर पर वहनीय साख (Credit) उपलब्ध कराने हेतु नाबार्ड में 2000 करोड़ रुपये का विशेष कोष भी स्थापित किया गया है।
  • खाद्य एवं कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को प्राथमिक क्षेत्रों के दायरे में लाया गया है ताकि खाद्य प्रसंस्करण कार्य-कलापों और अवसरंचना के लिए अतिरिक्त साख उपलब्ध कराई जा सके।
  • महत्व
  • ये परियोजनाएं प्रत्यक्ष एवं अत्यक्ष रूप से बड़े स्तर पर रोजगार का सृजन करेंगी‚ विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • इस योजना से खुदरा एवं कुटीर उद्योग के क्षेत्र में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन होंगे।
  • खाद्य प्रसंस्करण की बेहतर नीतियों के आधार पर किसानों को बाजार से बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
  • यह योजना किसानों की आय को दोगुना करने के लिए उठाए गए कदमों में सबसे प्रभावी होगी।
  • इससे किसानों को फसल उत्पादन के कार्य में प्रोत्साहन मिलेगा तथा आधुनिक अवसंरचना का सृजन होगा।
  • प्रसंस्करण संबंधी कुछ अन्य तथ्य
  • भारत‚ चीन के बाद फलों एवं सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  • खाद्य प्रसंस्करण प्रक्रिया के तहत कृषि‚ डेयरी‚ पशुपालन‚ मांस‚ मुर्गी पालन या मत्स्य पालन आदि उद्योगों का संचालन किया जाता है।
  • इस परियोजना से उत्पादों में मूल्यवर्धन की संकल्पना है‚ जो ग्रामीण पलायन पर अंकुश का कार्य करती है।

संअभय कुमार पाण्डेय