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पदार्थ की पांचवीं अवस्था

Fifth state of matter
  • पृष्ठभूमि
  • नासा (National Aeronautics and Space Administration : NASA) के वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर ‘पदार्थ की पांचवीं अवस्था’ को बनाने में सफलता प्राप्त की है।
  • इस शोध कार्य को नेचर जर्नल (Nature Journal) में 11 जून,  2020 को प्रकाशित किया गया।
  • ‘पदार्थ की पांचवीं अवस्था’ को कोल्ड एटम लैबोरेटरी (Cold Atom Laboratory : CAL) में बनाया गया।
  • कोल्ड एटम लैबोरेटरी (CAL) को वर्ष 2018 में इसी उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर स्थापित किया गया था।
  • वैज्ञानिकों ने रुबीडियम (Rubidium) के प्रयोग से इस अवस्था का निर्माण किया।
  • ज्ञात हो कि ‘पदार्थ की पांचवीं अवस्था’ या बोस-आइंस्टीन कंडेंनसेट्स (Bose-Einstein Condensates : BEC) अवस्था को सर्वप्रथम वर्ष 1920 में भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन ने बताया था।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, इस खोज से ब्रह्मांड की गुत्थियों को सुलझाने में और ब्रह्मांड की उत्पत्ति का पता लगाने में मदद मिलेगी।
  • बोस-आइंस्टीन कंडेंनसेट्स (BEC)
  • पदार्थ की यह अवस्था तब बनती है, जब किसी तत्व के परमाणुओं को परम शून्य ताप (0oK या -273oC) तक ठंडा किया जाता है।
  • परम शून्य ताप पर तत्व के सारे परमाणुओं की गति शून्य हो जाती है अर्थात सारे परमाणु मिलकर एक हो जाते हैं।
  • इस अवस्था में एक सुपर एटम का निर्माण होता है।
  • पदार्थ की इसी अवस्था को बोस-आइंस्टीन कंडेंनसेट्स या ‘पदार्थ की पांचवीं अवस्था’ कहा जाता है।
  • इस अवस्था में पदार्थ के गुणधर्म बदल जाते हैं और पदार्थ में तरंगें उठती रहती हैं।
  • पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल पदार्थों के परमाणुओं को प्रभावित करते हैं, जिससे पदार्थ की पांचवीं अवस्था का निर्माण करना कठिन होता है।
  • पृथ्वी पर पदार्थ की इस अवस्था को केवल कुछ ही मिलीसेकंड तक रोका जा सकता है।
  • अंतरिक्ष में कैसे बनी पदार्थ की पांचवीं अवस्था?
  • पदार्थ की पांचवीं अवस्था बेहद संवेदनशील होती है।
  • जब पदार्थ की इस अवस्था से जरा भी छेड़छाड़ की जाती है, तो परम शून्य ताप पर रहने के कारण एवं गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव से यह अवस्था नष्ट हो जाती है।
  • अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण बल कमजोर होता है, अतः वहां इस अवस्था को एक सेकंड से ज्यादा देर तक रोका जा सकता है।
  • अंतरिक्ष में इस अवस्था के निर्माण के लिए सबसे पहले बोसॉन (वे एटम जिनमें प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या समान हो) को 0oK पर लेजर की मदद से एक जगह रखकर ठंडा किया गया।
  • जैसे-जैसे यह ठंडा होने लगा, मैग्नेटिक फील्ड की मदद से उन्हें हिलने से रोका गया और हर पार्टिकल की वेव बढ़ने लगी।
  • इन सारे पार्टिकल्स को बेहद छोटे ट्रैप में रखा गया, जहां इन सबकी वेव एक-दूसरे में मिल गई और यह एक वेव मैटर की तरह कार्य करने लगा।
  • पदार्थ की अवस्थाएं
  • पदार्थ की चार अवस्थाएं होती हैं-

      (1) ठोस, (2) द्रव, (3) गैस और (4) प्लाज्मा

  • प्लाज्मा गैसीय अवस्था होती है, लेकिन यह आयनित होती है।
  • ज्ञात हो कि तारों का अधिकांश हिस्सा प्लाज्मा ही होता है।
  • ब्रह्मांड में भी 96 प्रतिशत प्लाज्मा ही है।
  • महत्व
  • वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि बोस-आइंस्टीन कंडेंनसेट्स का अध्ययन करने से ब्रह्मांड की उत्पत्ति एवं विस्तार का पता लगाया जा सकता है।
  • इसकी मदद से ब्रह्मांड के विस्तार में डार्क एनर्जी का क्या रोल है, पता किया जा सकता है।
  • यह जनरल रिलेटिविटी के टेस्ट्स से लेकर डार्क एनर्जी और ग्रैविटेशनल वेव तक, स्पेसक्राफ्ट नेविगेशन से लेकर चांद पर मिनरल की खोज आदि में सहायक हो सकता है।
  • क्वांटम मैकेनिक्स (Quantum Mechanics) में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।

सं. विजय सिंह