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ध्रुवास्त्र

Dhruvastra
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 15 -16 जुलाई‚ 2020 को ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) द्वारा ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR : Integrated Test Range) से ‘धु्रवास्त्र’ (Dhruvastra) का सफल परीक्षण किया गया।
  • यह परीक्षण एक ग्राउंड आधारित लांचर से किया गया।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • तीसरी पीढ़ी एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (3rd Generation Anti Tank Guided Missile) ‘ध्रुवास्त्र’ नाग मिसाइल के वायु संस्करण हेलीना (HELINA) का परिवर्तित नाम है।
  • इसका सीधे हिट (Direct Hit) मोड और टॉप अटैक (Top Attack) मोड दोनों में सफल परीक्षण किया गया।
  • यह सभी मौसम में दिन एवं रात के समय हमला करने में सक्षम है तथा स्थिर एवं चालित दोनों तरह के टैंकों पर दागा जा सकता है।
  • यह पारंपरिक कवच के साथ ही विस्फोटक प्रतिक्रियाशील कवच के युद्धक टैंकों को नष्ट कर सकती है।
  • धु्रवास्त्र की मारक क्षमता 7 किमी. तक की है।
  • इसको रुद्र हेलीकॉप्टर से दागा जा सकता है।
  • रुद्र हेलीकॉप्टर एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopter : ALH) ध्रुव का युद्धक संस्करण है।
  • रुद्र हेलीकॉप्टर में नामिका (NAMICA : Nag Missile Carrier) तकनीक का प्रयोग है‚ जिसमें चार टि्वन लांचर (Twin Launcher) के प्रयोग से आठ मिसाइलों को लगाया जा सकता है।
  • ध्रुवास्त्र की विशेषताएं
  • लंबाई – 1.9 मीटर
  • भार – 45 किग्रा.
  • व्यास – 0.16 मीटर
  • अधिकतम गति – 240 मी./से.
  • मारक क्षमता – 500 मीटर से 7 किमी.
  • विगत परीक्षण
  • 13 जुलाई‚ 2015 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित चंदन फायरिंग रेंज (Chandan Firing Range) में हेलीना के त्रि-चरणीय (Three Round) परीक्षण किए गए थे।
  • 19 अगस्त‚ 2018 को पोखरण परीक्षण रेंज में रुद्र हेलीकॉप्टर से हेलीना का सफल परीक्षण किया गया था।
  • एकीकृत मार्गदर्शित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP)
  • भारत में स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए वर्ष 1983 में एकीकृत मार्गदर्शित मिसाइल विकास कार्यक्रम (Integrated Guided Missile Development Program : IGMDP) की शुरुआत प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा की गई थी।
  • इसके तहत पांच प्रकार की मिसाइलों का विकास किया जाना था‚ जिसे PATNA शब्द से भी निरूपित किया जा सकता है-
  • (PATNA : P-Prithvi, A-Agni, T-Trishul, N-Nag, A-Akash)
  • कम दूरी की सतह-से-सतह में मार करने वाली बैलिस्टिक (Ballistic) मिसाइल – पृथ्वी (Prithvi)
  • मध्यम दूरी की सतह-से-सतह में मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल – अग्नि (Agni)
  • कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल – त्रिशूल (Trishul)
  • मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल – आकाश (Akash)
  • तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक (Anti Tank) मिसाइल – नाग (Nag)
  • स्वदेशी मिसाइलों के विकास में प्राप्त सफलता के आधार पर वर्ष 2008 में डीआरडीओ (DRDO) ने IGMDP की समाप्ति की घोषणा की थी।
  • नाग (Nag)
  • यह IGMDP शृंखला के तहत एकमात्र एंटी टैंक मिसाइल है‚ जो दागो और भूल जाओ (Fire and Forget) तकनीक पर आधारित है।
  • इसमें ISS (Infrared Imaging Seeker) तकनीक का प्रयोग है‚ जो एक तापमान सेंसर (Sensor) है।
  • यह दुश्मन के तोपों‚ मिसाइलों के विस्फोटकों के तापमान को पहचान कर उसे नष्ट कर देता है।
  • इस मिसाइल की मारक क्षमता 500 मी. से 4 किमी. तक तथा यह अपने साथ 8 किग्रा. विस्फोटक ले जाने में सक्षम है।
  • इसका पहला परीक्षण वर्ष 1990 में किया गया था तथा अंतिम सफल परीक्षण जुलाई‚ 2019 में किया गया था।

सं. विजय सिंह

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