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‘टॉरपीडो डिकॉय प्रणाली मारीच’

'Torpedo decoy system marich'
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 26 जून‚ 2020 को भारतीय नौसेना ने पनडुब्बी-रोधी (Anti-submarine) युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए स्वदेश निर्मित उन्नत टॉरपीडो डिकॉय प्रणाली (Torpedo Decoy System) मारीच (Maareech) को अपने बेड़े में शामिल किया।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा इसको डिजाइन एवं विकसित किया गया है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र का रक्षा उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस डिकॉय प्रणाली के उत्पादन का कार्य करेगा।
  • मारीच (Maareech)
  • यह प्रणाली किसी भी टॉरपीडो हमले को विफल करने में नौसेना की मदद करेगी।
  • मारीच प्रणाली हमलावर टॉरपीडो का पता लगाने‚ उसे भ्रमित करने और नष्ट करने में सक्षम है।
  • इस प्रणाली का नाम रावण के मामा मारीच के नाम पर रखा गया है‚ जिसने मृग का रूप धारण कर श्रीराम को भ्रमित किया था।
  • इसे अग्रिम मोर्चे (Frontline) के सभी युद्धपोतों से संचालित किया जा सकता है।
  • कैसे काम करता है?
  • यह दुश्मन के टॉरपीडो की अवस्थिति का पता लगाता है और इसकी सूचना केंद्रीय संसाधित इकाई (Central Processing Unit) को भेजता है।
  • यह दुश्मन के टॉरपीडो को भ्रमित करने के लिए पानी के अंदर कई डिकॉय प्रक्षेपित करता है‚ जो कम आवृत्ति के सिग्नल उत्पन्न करते हैं। जिससे युद्धपोत के वास्तविक स्थान के बारे में भ्रम पैदा होता है।
  • यह टॉरपीडो को लक्ष्य से भ्रमित करता रहता है‚ जिससे उसकी ऊर्जा क्षय हो जाती है और यह लक्ष्य पर लगने से पहले ही नष्ट हो जाती है।
  • टॉरपीडो क्या है?
  • टॉरपीडो एक स्वचालित विस्फोटक प्रक्षेपास्त्र है‚ जिसे जल की सतह के ऊपर या नीचे से दागा जा सकता है।
  • सामान्यत: एक टॉरपीडो पानी के अंदर 10-20 मिनट तक चलायमान रहती है और ऊर्जा खत्म होने पर डूब जाती है।
  • महत्व
  • मारीच प्रणाली का नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाना स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास की सफलता में एक बड़ा कदम है।
  • यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल तथा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनने के देश के संकल्प को दोहराता है।

सं. विजय सिंह