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टिड्डियों का प्रकोप

Locust outbreak
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 1 फरवरी, 2020 को पाकिस्तान ने टिड्डी दल के प्रकोप के कारण देश में राष्ट्रीय आपात स्थिति की घोषणा की थी।
  • इसके बाद सोमालिया में भी टिड्डियों के प्रकोप के कारण राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया।
  • मई-जून, 2020 में भारत में राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भारी मात्रा में टिड्डियों के झुंड देखे गए, जिन्होंने खड़ी फसलों, बागवानी फसलों और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाया।
  • टिड्डी दल
  • टिड्डी (Locust) मुख्यतः एक प्रकार के उष्णकटिबंधीय कीट होते हैं, जो एक्रीडिडे परिवार (Acrididae Family) से संबंध रखते हैं।
  • टिड्डियां सर्वभक्षी (Omnivorous) तथा प्रवासी कीट होते हैं, जिनमें सामूहिक रूप से सैकड़ों किमी. तक उड़ने की क्षमता होती है।
  • ये एक प्रकार के सीमा-पार (Trans-border) कीट हैं, जो फसलों को बड़े झुंडों में नुकसान पहुंचाते हैं।
  • पृथ्वी के भू-भाग के 1/5वें भाग को आच्छादित कर सकने वाले इन कीटों के झुंड प्रायः ग्रीष्म/मानसून ऋतु में अफ्रीका/खाड़ी/दक्षिण-पश्चिम एशिया से भारत में आते हैं तथा प्रजनन हेतु ईरान, खाड़ी तथा अफ्रीकी देशों में वापस चले जाते हैं।
  • टिड्डी सामान्यतः शांत होती है। जब उनकी संख्या कम हो, तब वे  कृषि के लिए आर्थिक खतरा नहीं होती हैं। हालांकि तेजी से वनस्पति वृद्धि के बाद उपजी सूखे की उपयुक्त परिस्थितियों में, इनके शरीर में सेरोटोनिन (Serotonin) रसायन की वृद्धि होती है। इसकी वजह से टिड्डियों में प्रजनन की बहुलता देखी जाती है।
  • जैसे ही इनकी संख्या में वृद्धि होती है, तो ये उस क्षेत्र की उपलब्ध खाद्य सामग्री (हरे पेड़-पौधे और वनस्पतियां) को चट कर जाती हैं। खाने की तलाश में ये एक देश से दूसरे देश की ओर उड़ती हैं।
  • विश्व एवं भारत में टिड्डियां
  • विश्व में टिड्डियों की मुख्यतः 10 प्रजातियां पाई जाती हैं :

  1. रेगिस्तानी टिड्डी (Schistocerca Gregaria)

      2. प्रवासी टिड्डी (Migratoria Manilensis)

      3. बॉम्बे टिड्डी (Nomadacris Succincta)

      4. वृक्ष टिड्डी (Anacridium Spp.)

      5. इतावली टिड्डी (Calliptamus Italicus)

      6. मोरक्को की टिड्डी (Dociostaurus Morocannus)

      7. लाल टिड्डी (Nomadacris Septemfaciata)

      8. भूरी टिड्डी (Locustana Pardalina)

      9. दक्षिण अमेरिकी टिड्डी (Schistocerca Paranensis)

      10. ऑस्ट्रेलियाई टिड्डी (Chortoicetes Termenifera)

  • भारत में प्रायः चार प्रकार की टिड्डियां यथा- रेगिस्तानी टिड्डियां, प्रवासी टिड्डियां, बॉम्बे टिड्डियां एवं वृक्ष टिड्डियां (Tree Locust) ही पाई जाती हैं।
  • टिड्डियों की प्रजाति में रेगिस्तानी टिड्डियां सबसे खतरनाक और विनाशकारी मानी जाती हैं। आमतौर पर ये गर्मी और बारिश के मौसम में देखी जाती हैं।
  • प्राचीन ग्रंथों यथा ओल्ड टेस्टामेंट बाइबिल तथा पवित्र कुरान में भी रेगिस्तानी टिड्डियों को मानव जाति के लिए अभिशाप की संज्ञा दी गई है।
  • टिड्डियों के विविधभक्षी प्राणी (Polyphagous Feeder) होने के कारण इनके द्वारा पहुंचाई जाने वाली क्षति एवं नुकसान का परिमाण अत्यंत विशाल एवं कल्पना से परे है और यह भुखमरी की स्थिति भी उत्पन्न कर सकती हैं।
  • औसतन एक छोटा टिड्डी दल एक दिन में 10 हाथियों, 25 ऊंटों या 2500 लोगों द्वारा किए जाने वाले भोजन के बराबर खाद्य ग्रहण कर सकता है।
  • विश्व के लगभग 64 देशों में रेगिस्तानी टिड्डियों के प्रकोप से प्रभावित क्षेत्र लगभग 30 मिलियन वर्ग किमी. आंका गया है।
  • इनमें उत्तर-पश्चिमी एवं पूर्वी अफ्रीकी देश, अरब प्रायद्वीप, रूस, ईरान, अफगानिस्तान और भारतीय उप-महाद्वीप शामिल हैं।
  • भारत में टिड्डी दल से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य क्रमशः राजस्थान और गुजरात हैं।
  • टिड्डी चेतावनी संगठन
  • इस संगठन की स्थापना वर्ष 1939 में की गई थी तथा वर्ष 1946 में इसे वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के साथ मिला दिया गया।
  • भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के अधीन आने वाले टिड्डी चेतावनी संगठन (LWO : Locust Warning Organisation) का कार्य अनुसूचित रेगिस्तानी क्षेत्रों जैसे राजस्थान और गुजरात में टिड्डियों की निगरानी, सर्वेक्षण और नियंत्रण करना है। इस संगठन का केंद्रीय मुख्यालय फरीदाबाद में है।
  • इस संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय हैं- 1. जोधपुर 2. बाड़मेर, 3. जैसलमेर, 4. बीकानेर, 5. पालनपुर, 6. नागौर, 7. जालौर, 8. भुज, 9. फलोड़ी, 10. सूरतगढ़ और 11. चुरू।
  • टिड्डी दल नियंत्रण
  • वर्तमान में रेगिस्तानी टिड्डी दल नियंत्रण की प्राथमिक विधि ऑर्गेनोफॉस्फेट (Organophosphate) रसायन का छिड़काव है।
  • टिड्डियों के प्रकोप को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मई, 2020 मेसर्स माइक्रॉन, यूके के साथ एक अनुबंध हस्ताक्षरित किया है।
  • इस अनुबंध के तहत यूके का यह संस्थान दो Mi-17 हेलिकॉप्टरों को उन्नत बनाएगा, जिनसे कीटनाशकों के छिड़काव के माध्यम से टिड्डियों के प्रजनन को रोकने में मदद मिलेगी।
  • 30 जून, 2020 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने हवाई छिड़काव के माध्यम से टिड्डी दल पर नियंत्रण के लिए हेलिकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत की।
  • इसके तहत स्प्रे उपकरण से युक्त एक बेल हेलिकॉप्टर (Bell Helicopter) को ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश से बाड़मेर के लिए रवाना किया गया।
  • जहां से इसे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर तथा नागौर के रेगिस्तानी क्षेत्रों में टिड्डी नियंत्रण के लिए भेजा जाएगा।
  • एकल पायलट चालित बेल 206-बी 3 हेलिकॉप्टर की कीटनाशक वहन क्षमता 250 लीटर है, जिससे एक बार में 25-50 हेक्टेयर क्षेत्र में छिड़काव किया जा सकेगा।
  • ज्ञातव्य है कि 26 वर्ष के अंतराल के पश्चात वर्ष 2019 में भारत में टिड्डी दल का प्रकोप देखा गया था, जिसे सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया था। 

सं. विभव कृष्ण पाण्डेय