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जैव विविधता के संरक्षण हेतु राजस्थान में आर्द्रभूमियों की पहचान

Identification of wetlands in Rajasthan for conservation of biodiversity
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य  
  • हाल ही में ‘राष्ट्रीय हरित अधिकरण’ (National Green Tribunal) ने राजस्थान सरकार को राज्य में अवस्थित आर्द्रभूमियों को संरक्षण प्रदान करने हेतु निर्देशित किया।  
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण के द्वारा यह निर्देश ‘राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण’ (State Wetland Authority) की बैठक के बाद दिया गया।  
  • इसके पश्चात राजस्थान सरकार ने आर्द्रभूमियों की पहचान एवं संरक्षण देने के क्रम में स्थानीय अधिकारियों को सक्षम बनाने के प्रयास किए हैं‚ जिससे आर्द्रभूमियों के अतिक्रमण पर अंकुश लगाया जा सके।
  • राजस्थान में आर्द्रभूमियां  
  • राज्य में ऐसी दो आर्द्रभूमियां हैं‚ जो ‘रामसर सम्मेलन’ (Ramsar Convention) के अंतर्गत आती हैं।    

1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान  

  • यह राजस्थान के सघन जनसंख्या वाले पूर्वी क्षेत्र में अवस्थित है।
  • केवला आर्द्रभूमि 10 भिन्न आकार की कृत्रिम व मौसमी लैगून्स का मिश्रण है।  
  • पानी की कमी तथा चारागाह के अत्यधिक उपयोग के कारण इसे रामसर सम्मेलन के अंतर्गत ‘मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड’ (Montreux Record) में सम्मिलित किया गया है।  
  • मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड में अंतरराष्ट्रीय महत्व की उन आर्द्रभूमियों को सूचीबद्ध किया जाता है‚ जिनमें मानवीय अतिक्रमण और पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण संकट उत्पन्न हो गया है।  
  • इस पक्षी विहार को पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए जाना जाता है‚ यहां अब तक पक्षियों की लगभग 353 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है।

2. सांभर झील  

  • राजस्थान में जयपुर से 80 किमी. की दूरी पर स्थित खारे पानी की सांभर झील में सामोद‚ खारी‚ खंडेला‚ मेंढा और रूपनगढ़ नदियां आकर मिलती हैं।  
  • इस झील का क्षेत्रफल मौसम के अनुसार बदलता रहता है‚ जो सामान्यत: 190 और 230 वर्ग किमी. के मध्य है। इस झील की गहराई ग्रीष्मकाल के दौरान 60 सेमी.‚ जबकि वर्षाकाल के दौरान इसकी गहराई 3 मीटर तक हो जाती है।  
  • यहां शीतकाल के समय में फ्लेमिंगोज पक्षियों का जमावड़ा लगता है। शैवालों और तापमान में अधिकता इन पक्षियों को प्रतिवर्ष भाषा संख्या में आकर्षित करती है।  
  • बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार‚ सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की सामूहिक मृत्यु एवियन बॉटलिज्म (Avian Botulism) के कारण होती है‚ जो कि बैक्टीरिया जनित रोग है।  
  • यह बीमारी इन प्रवासी पक्षियों के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। आर्द्रभूमि पारितंत्र è  रामसर सम्मेलन के अनुसार‚ दलदल (Marsh)‚ पंकभूमि (Fen)‚ पीटभूमि या जल‚ कृत्रिम या प्राकृतिक‚ स्थायी या अस्थायी‚ स्थिर या गतिमान जल तथा ताजा‚ खारा व लवणयुक्त जल क्षेत्रों को आर्द्रभूमि कहते हैं।  
  • इसके अंतर्गत सागरीय क्षेत्रों को भी सम्मिलित किया जाता है‚ यहां निम्न ज्वार के समय भी गहराई 6 मीटर से अधिक नहीं होती है।
  • आर्द्रभूमि का महत्व  
  • आर्द्रभूमियों को ‘भूतल के गुर्दे’ (Kidneys of Landscape) कहा जाता है‚ जिस प्रकार हमारे शरीर में जल को शुद्ध करने का कार्य गुर्दे (Kidneys) द्वारा किया जाता है‚ ठीक उसी प्रकार आर्द्रभूमियां भी जल चक्र द्वारा जल को शुद्ध करती हैं।  
  • आर्द्रभूमियां न केवल जल भंडारण का कार्य करती हैं‚ बल्कि बाढ़ के अतिरिक्त जल को अपने में समेट कर बाढ़ की विभीषिका को कम करती हैं।  
  • आर्द्रभूमि एक प्राकृतिक व कुशल कार्बन सिंक के रूप में कार्य करती है‚ उदाहरण के लिए दलदली काई भूमि केवल 3 प्रतिशत हिस्से पर फैली हुई है‚ परंतु यह दुनिया के सभी वनों के मुकाबले दोगुनी मात्रा में कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता रखती है।  
  • आर्द्रभूमियां अपने आस-पास बसी मानव बस्तियों के लिए जलावन लकड़ी‚ फल‚ वनस्पतियां‚ पौष्टिक चारा एवं जड़ी-बूटियों की स्रोत होती हैं।
  • आर्द्रभूमियां (संरक्षण और प्रबंधन) नियम‚ 2019  
  • पर्यावरण‚ वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए ‘आर्द्रभूमियां (संरक्षण और प्रबंधन) नियम‚ 2019’ को अधिसूचित कर दिया है।  
  • ये नियम आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए विभिन्न निकायों का गठन एवं उनकी शक्तियों और कार्यों को परिभाषित करते हैं।  
  • ये नियम आर्द्रभूमियों के भीतर उद्योगों की स्थापना और कचरे के निपटान पर रोक लगाते हैं।  
  • प्रत्येक राज्य को एक प्राधिकरण की स्थापना करनी होगी‚ जो अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आर्द्रभूमियों के संरक्षण की रणनीतियों को परिभाषित करे।  
  • मंत्रालय ने इन आर्द्रभूमियों के नियम संबंधी कार्यान्वयन के बारे में जानकारी साझा करने के लिए एक वेब पोर्टल का भी निर्माण किया है।
  • भारत में आर्द्रभूमियां  
  • भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 4.7% भाग आर्द्रभूमि के अंतर्गत आता है।  
  • सर्वाधिक आर्द्रभूमि क्षेत्रफल वाला राज्य गुजरात है।  
  • भारत वर्ष 1982 में रामसर समझौते का सदस्य बना था‚ उस समय केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और चिल्का झील को आर्द्रभूमि में सम्मिलित किया गया था।  
  • जनवरी‚ 2020 में 10 और आर्द्रभूमियों को सम्मिलित करने से वर्तमान में रामसर सम्मेलन के अंतर्गत आर्द्रभूमियों की कुल संख्या 37 हो गई है।
  • रामसर सम्मेलन
  • वर्ष 1971 में आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु ईरान के रामसर में एक अंतरसरकारी और बहुउद्देशीय सम्मेलन हुआ।  
  • रामसर एकमात्र ऐसा सम्मेलन है‚ जो किसी विशेष पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित वैश्विक वातावरणीय संधि है।  
  • यह वर्ष 1975 में एक समझौते के रूप में लागू हुआ।  
  • इसका कार्य आर्द्रभूमियों को सूचीबद्ध करना व उनके संरक्षण के सहयोग में बढ़ावा देना है।  
  • ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’ (World Wetland Day) प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है।
  • हालांकि पहला आर्द्रभूमि दिवस वर्ष 1997 में मनाया गया था।  

सं. अभय पाण्डेय