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चीन पर अंतरराष्ट्रीय संसदीय गठबंधन की पहल

International Parliamentary Alliance initiative on China
  • वर्तमान पृष्ठभूमि
  • चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लाल झंडे के नीचे खड़े चीन की सर्वाधिकारवादी (Authoritarianism) प्रवृत्तियां बढ़ती ही जा रही हैं। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते चीनी अतिक्रमण एवं खुले समुद्रों में निर्बाध आवागमन की स्वतंत्रता चीनी आक्रामकता की ही निशानदेही है। यही नहीं चीन‚ दक्षिण चीन सागर में स्थित देशों को इस सागर पर किसी प्रकार के अधिकार को मान्यता नहीं देता है। हांगकांग में नागरिक स्वतंत्रता के दमन के लिए पारित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून चीन की एक कुटिल चाल है‚ ताकि वन चाइना पॉलिसी के द्वारा हांगकांग की स्वायत्तता समाप्त की जा सके। भारत के साथ LAC पर उभरा गहरा तनाव चीन की इसी तानाशाही सोच का परिणाम है। COVID-19 जैसी वैश्विक महामारी भी चीन के वुहान शहर से ही उपजी है‚ जिसने दुनिया के 1.5 लाख लोगों की जान ले ली है। चीन के शिनझियांग प्रांत में लाखों उइघुर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार‚ ताइवान के साथ विवाद‚ अमेरिका के साथ शुरू व्यापार युद्ध तथा लोकतंत्र एवं मानवाधिकारों की रक्षा के लिए 8 लोकतांत्रिक देशों के विधायी सदस्यों द्वारा चीन पर अंतरराष्ट्रीय संसदीय गठबंधन (IPAC : International Parliamentary Alliance on China) का गठन किया गया है।
  • वर्तमान प्रसंग
  • 5 जून‚ 2020 को 8 लोकतांत्रिक देशों-अमेरिका‚ जर्मनी‚ ब्रिटेन‚ जापान‚ ऑस्ट्रेलिया‚ कनाडा‚ स्वीडन एवं नॉर्वे के सांसदों ने ‘चीन पर अंतरराष्ट्रीय संसदीय गठबंधन’ (IPAC : International Parliamentary Alliance on China) का गठन किया।
  • IPAC में वर्तमान में 18 राजनीतिज्ञ शामिल हैं‚ जिसमें यू.एस. सीनेटर मार्को रुबियो तथा राबर्टो मेनेंडेज तथा यूरोपियन यूनियन के सांसद प्रमुख हैं।
  • IPAC
  • IPAC लोकतांत्रिक देशों के विधायकों (Legislators) का गठबंधन है।
  • इस गठबंधन में कई दलों के विधायी सदस्य शामिल हैं‚ जो इस बात पर सुधार करने के लिए प्रयासरत हैं कि लोकतांत्रिक देश चीन के साथ किस प्रकार का व्यवहार करें।
  • IPAC का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था को बनाए रखा जाए‚ मानवाधिकारों की रक्षा की जाए‚ व्यापारिक सुचिता (Fairness) बनाए रखा जाए‚ पूरक सुरक्षा रणनीतियां अपनाई जाएं तथा राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अखंडता की रक्षा की जाए। इस प्रकार समान विचारधारा वाले देशों को अपने देशों में उपर्युक्त व्यवस्था को सक्रिय रूप से क्रियान्वित करने में संलग्न होना चाहिए।
  • इस गठबंधन में विश्व की कई बड़ी राजनीतिक पार्टियों के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ शामिल हैं‚ जो इस समूह की सह-अध्यक्षता करेंगे।
  • IPAC की गतिविधियां
  • IPAC की गतिविधियां पांच क्षेत्रों में विस्तृत हैं –
  • अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित व्यवस्था को सुरक्षा प्रदान करना – पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) को अंतरराष्ट्रीय विधिक मानकों को विकृत करने से स्वयं को बचाना चाहिए तथा इन मानकों पर खरा उतरना चाहिए।
  • मानवाधिकारों का हनन –
  • देशों को PRC के साथ अपने संबंधों में मानवाधिकारों को प्रमुखता देनी चाहिए।
  • व्यापारिक निष्पक्षता को प्रोत्साहन देना –
  • PRC को व्यापारिक निष्पक्षता बनाए रखना चाहिए। इसके लिए उसे नियम आधारित व्यवस्था का पालन करना चाहिए‚ विशेषतया WTO द्वारा निर्धारित नियमों का।
  • सुरक्षा को मजबूत बनाना –
  • लोकतांत्रिक देशों को PRC द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पूरक सुरक्षा रणनीतियां (Complementary Security Strategies)  विकसित करनी चाहिए।
  • राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करना –
  • विकासशील व उभरते बाजारों को PRC से ऋण‚ निवेश आदि प्राप्त करते समय अपने राष्ट्र की एवं राष्ट्रीय संस्थानों की संप्रभुता से समझौता नहीं करना चाहिए।
  • IPAC में भाग लेने वाले देश
  • IPAC में भाग लेने वाले 8 देश क्रमश: – अमेरिका‚ जर्मनी‚ ब्रिटेन‚ जापान‚ ऑस्ट्रेलिया‚ कनाडा‚ स्वीडन तथा नॉर्वे हैं।
  • IPAC की सह-अध्यक्षता इन देशों की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के वरिष्ठ राजनेताओं द्वारा की जाएगी।
  • इस गठबंधन में अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो और राबर्टो मेनेंडेज तथा यूरोपियन यूनियन के सांसदों सहित कुल 18 सांसद शामिल हैं।
  • देशों के IPAC में शामिल होने का कारण
  • ऑस्ट्रेलिया के चीन के साथ अत्यंत खराब संबंध हैं‚ क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस महामारी पर एक स्वतंत्र जांच की मांग की है।
  • उसका मानना है कि COVID-19 महामारी का फैलाव चीन के वुहान शहर से हुआ है और चीन ने इस जानकारी को छुपाए रखा।
  • स्वीडन के संबंध चीन के साथ वर्ष 2015 से खराब हुए हैं‚ जब इसने थाईलैंड में दो स्वीडिश लेखकों का अपहरण कर लिया था।
  • चीन की टेलीकॉम कंपनी हुआवेई (Huawei) के मुख्य वित्त अधिकारी को कनाडा में गिरफ्तार किया गया था‚ बदले में चीन ने दो कनाडाई नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया था।
  • अमेरिका के पास लोकतांत्रिक राष्ट्रों का साथ देने के अनेक कारण हैं-
  • अमेरिका का मानना है कि चीन अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों का इस्तेमाल करता है।
  • अमेरिका ने चीनी संसद द्वारा हांगकांग के लिए पारित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का विरोध किया है।
  • तिब्बत तथा उइघुर मुसलमानों पर हो रहे चीनी अत्याचार‚ जिससे वहां मानवाधिकारों का भारी हनन हो रहा है।अमेरिका‚ ताइवान की लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का समर्थन करता है।
  • इसी प्रकार अन्य देशों के भी अपने-अपने कारण हैं।
  • चीन का पक्ष
  • चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स का मानना है कि चीन 1900वीं सदी में नहीं है। 21वीं सदी के वैश्विक युग में चीन विरोधी गठबंधन विफल हो गए हैं।

संअमित त्रिपाठी