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चीन द्वारा हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

National Security Law in Hong Kong by China
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • जुलाई, 2020 में चीन सरकार द्वारा हांगकांग में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ लागू किया जाने वाला है। ध्यातव्य है कि इस कानून का मसौदा मई, 2020 में चीन की संसद में पारित किया गया था।
  • यह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ हांगकांग के ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अंगों’ को भी संचालित करेगा। हांगकांग एक ‘मूल कानून’ (Basic Law) से संचालित होता है, इसी ‘मूल कानून’ में संशोधन करके राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लाया जा रहा है।
  • पृष्ठभूमि
  • वर्ष 1997 के बाद से हांगकांग के निवासियों ने अपने ‘मूल कानून’ की रक्षा के लिए कई बार विरोध प्रदर्शन किए हैं।
  • वर्ष 2003 में, पहला लोकतंत्र विरोधी प्रदर्शन तब हुआ जब हांगकांग में चीनी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की कोशिश की थी।
  • वर्ष 2014 में, एक लाख से अधिक हांगकांग के निवासियों ने चीन के लोकतांत्रिक सुधारों के विरोध में ‘अम्ब्रेला क्रांति’  में भाग लिया था।
  • वर्ष 2019 में, अब तक का सबसे बड़ा विरोध, एक प्रस्तावित प्रत्यर्पण कानून के खिलाफ हुआ और चीन द्वारा कानून को वापस लेने के बाद भी हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन जारी रहा।
  • हांगकांग का मूल कानून (Basic Law)
  • हांगकांग पहले एक ब्रिटिश उपनिवेश था और वर्ष 1997 में इसे चीन को सौंप दिया गया था। हांगकांग को चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (Special Administrative Region) बनाया गया।
  • हांगकांग ‘मूल कानून’ नामक एक लघु संविधान द्वारा शासित है, जो ‘एक देश, दो प्रणाली’ के सिद्धांत की पुष्टि करता है।
  • वर्ष 1984 में चीन-ब्रिटेन संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया गया था, जिसके अनुसार, वर्ष 1997 से 50 साल की अवधि के लिए चीन ने हांगकांग की उदारनीतियों, शासन प्रणाली, स्वतंत्र न्यायपालिका और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात कही थी।
  • हांगकांग के मूल कानून में सुधार
  • ‘मूल कानून’ के अनुच्छेद 23 के तहत, हांगकांग को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करना है। इसके अनुसार, ‘‘देशद्रोह, अलगाव, केंद्रीय सरकार के खिलाफ तोड़फोड़, राज्य के गोपनीय तथ्यों की चोरी, विदेशी राजनीतिक संगठनों या निकायों के साथ संबंध स्थापित करने से क्षेत्र के राजनीतिक संगठनों या निकायों को प्रतिबंधित करना है।’’
  • अनुच्छेद 23 का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को संरक्षित करना है, लेकिन यह चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा अंगों को औपचारिक रूप से हांगकांग में संस्थानों को संचालित करने और स्थापित करने की भी अनुमति प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की सीमाएं
  • यह कानून पुलिस को अनियंत्रित शक्तियां प्रदान करता है। ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ हांगकांग में होने वाले क्रांतिकारी आंदोलनों के मामले में चीन को शक्ति प्रदान करता है।
  • कानून के तहत पुलिस को बिना वारंट के खोज करना, इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाना जैसे अधिकार दिए गए हैं, जो मानव अधिकारों, विशेष रूप से भाषण की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।
  • लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन इस कानून के अंतर्गत नहीं किया जा रहा है। हांगकांग के ‘मूल कानून’ (Basic Law) के तहत कोई कानून स्वतः तब तक लागू नहीं हो सकता जब तक वह कानून ‘एनेक्स-III’ नामक खंड में सम्मिलित नहीं किया गया हो, इस प्रकार यह हांगकांग के ‘मूल कानून’ का भी उल्लंघन करता है।
  • वैश्विक प्रतिक्रिया
  • 10 जून, 2020 को ऑस्ट्रेलिया ने चीन द्वारा हांगकांग में लगाए जा रहे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ की प्रतिक्रिया में हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण संधि को निलंबित कर दिया है।
  • 30 जून, 2020 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘नियंत्रित रक्षा प्रौद्योगिकी’ (Controlled Defence Technologies) के समस्त निर्यातों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
  • कनाडा भी हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण संधि को वापस लेने पर विचार कर रहा है और प्रवास सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।
  • ब्रिटेन भी ‘ब्रिटिश नेशनल ओवरसीज पासपोर्ट’ के लिए पात्र 3 मिलियन हांगकांग वासियों के लिए निवास अधिकारों का विस्तार कर रहा है। इस पासपोर्ट के तहत नागरिकों को 5 वर्ष तक ब्रिटेन में रहने और काम करने की अनुमति मिलती है।
  • भारत का भी हित हांगकांग से जुड़ा हुआ है। हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में एक बड़ा भारतीय समुदाय रहता है। भारत-चीन संबंधों में हालिया घटनाओं (गलवान घाटी विवाद, पैंगोंग झील विवाद और अरुणाचल प्रदेश विवाद) से आए तनाव में भारत भी लगातार घटनाक्रमों पर निगरानी रख रहा है।
  • निष्कर्ष
  • अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने से हांगकांग में व्यापक विरोध प्रदर्शन एक बार फिर से शुरू हो सकते हैं, ऐसी परिस्थिति में चीन सरकार को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ज्ञातव्य है कि वर्तमान महामारी के लिए वैश्विक बिरादरी द्वारा  चीन सरकार जिम्मेदार ठहराई जा रही है, ऐसे में कोई भी कदम चीन का ही अहित सुनिश्चित करेगा, जैसा वैश्विक देशों ने इस घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, उससे साफ तौर पर जाहिर होता है।

सं. विभव कृष्ण पाण्डेय