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चीन का मंगल मिशन ‘तियानवेन-1’

China's Mars Mission 'Tianwen-1'
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 23 जुलाई‚ 2020 को हेनान प्रांत में स्थित वेनचांग अंतरिक्ष लांच केंद्र (Wenchang Space Launch Center) से चीन के लांग मार्च-5 रॉकेट (Long March-5 Rocket) की उड़ान सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
  • इस उड़ान का उद्देश्य चीन के मंगल मिशन ‘तियानवेन-1’ (Tianwen-1) को अंतरिक्ष में पृथ्वी-मंगल स्थानांतरण कक्षा (Earth-Mars Transfer Orbit) तक पहुंचाना है। जहां से अंतरिक्ष यान स्वत: ही मंगल ग्रह की ओर रवाना होगा।
  • मिशन का उद्देश्य
  • इस मिशन का उद्देश्य मंगल ग्रह की मिट्टी‚ भू-गर्भीय संरचना‚ वातावरण तथा पानी के साक्ष्य की जांच करना है।
  • मिशन का विवरण
  • चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (National Space Administration) द्वारा इस मंगल मिशन का नाम तियानवेन रखा गया है‚ जिसका अर्थ ‘स्वर्ग से प्रश्न पूछना’ (Questions to Heaven) है।
  • यह नाम चीन के प्रसिद्ध कवि कु-यूआन (Qu-Yuan) द्वारा लिखी गई कविता ‘तियानवेन’ पर है। जिसमें अंतरिक्ष के रहस्यों पर प्रश्न उठाया गया है।
  • अंतरिक्ष यान का कुल भार 5 टन है‚ जिसमें आर्बिटर (Orbiter)‚ लैंडर (Lander) एवं रोवर (Rover) सम्मिलित हैं।
  • आर्बिटर को मंगल ग्रह के वातावरण के अध्ययन के लिए मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। साथ ही यह रोवर से प्राप्त संदेश को पृथ्वी पर प्रेषित करेगा।
  • लैंडर जिसमें रोवर भी सम्मिलित होगा‚ को मंगल ग्रह की सतह पर उतारा जाएगा।
  • सतह पर उतरने के बाद रोवर लैंडिंग स्थल के आस-पास घूम कर मिट्टी के नमूने एकत्रित करेगा।
  • इस छ: पहिए वाले रोवर का भार 600 किग्रा. है।
  • यह चार सोलर पैनल (Solar Panel) एवं छ: वैज्ञानिक उपकरणों से युक्त है तथा मंगल ग्रह पर इसकी कार्य अवधि 3 महीने (मंगल ग्रह के समयानुसार) की है।
  • मंगल ग्रह की परिक्रमा करते हुए आर्बिटर की पृथ्वी से अधिकतम दूरी 400 मिलियन किलोमीटर‚ जबकि न्यूनतम दूरी 55 मिलियन किलोमीटर की होगी।
  • अंतरिक्ष यान के लगभग सात महीने की यात्रा के बाद फरवरी‚ 2021 में मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने की संभावना है।
  • मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने के बाद उच्च रिजॉल्यूशन कैमरे की मदद से 2 से 3 महीने संभावित लैंडिंग साइटों (Sites) का सर्वेक्षण करने के बाद मई‚ 2020 में रोवर को मंगल ग्रह की सतह पर उतारा जाएगा।
  • आर्बिटर की मंगल ग्रह की कक्षा में कार्य अवधि 1 मंगल वर्ष (687 Days of Earth) की है।
  • यदि यह मिशन सफल होता है‚ तो चीन पहले प्रयास में एक साथ मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने तथा सतह पर रोवर उतारने वाला विश्व का पहला देश होगा।
  • इससे पूर्व में मंगल ग्रह की सतह पर रोवर उतारने में सफल संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और सोवियत संघ की अंतरिक्ष एजेंसी रॉस्कॉस्मॉस (Roscosmos) ने रोवर उतारने के पहले मंगल ग्रह की परिक्रमा के लिए आर्बिटर मिशन भेजा था।
  • ज्ञात हो कि इससे पूर्व चीन ने वर्ष 2011 में रूस के सहयोग से मंगल ग्रह अन्वेषण मिशन ‘यिंगहुओ-1’ (Yinghuo-1) भेजा था‚ परंतु प्रक्षेपण के कुछ देर बाद ही संपर्क टूट गया था।
  • अंतरिक्ष में चीन
  • चीन की सरकारी अंतरिक्ष संस्था चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (China National Space Administration) की स्थापना वर्ष 1993 में की गई थी।
  • चीन का पहला उपग्रह डॉन्ग फॉन्ग हॉन्ग-I (Dong Fong Hong-I) को 24 अप्रैल‚ 1970 को चाइना एकेडमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (China Academy of Space Technology) द्वारा प्रक्षेपित किया गया था।
  • चाइना एकेडमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी की स्थापना वर्ष 1968 में की गई थी।
  • वर्ष 2003 में चीनी अंतरिक्ष यान शेनझोऊ-V (Shenzhou-V) द्वारा पहली बार चीनी अंतरिक्ष यात्री यांग लिवेई (Ynag Liwei) को अंतरिक्ष में भेजा गया था तथा ऐसा करने वाला चीन‚ सोवियत संघ और अमेरिका के बाद तीसरा देश बन गया था।
  • चीन का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) लॉन्ग मार्च-5 (Long March-5) है‚ जिसकी पेलोड (Payload) क्षमता पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) के लिए 25 टन तथा भू-स्थिर कक्षा (GTO) के लिए 14 टन की है।
  • आने वाले समय में चीन की महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष परियोजनाओं में वर्ष 2022 तक स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है।

सं. विजय सिंह

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