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गैरसैंण : उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी

Gairsain: Summer Capital of Uttarakhand
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 8 जून‚ 2020 को उत्तराखंड सरकार द्वारा गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को उत्तराखंड राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी गई।
  • इससे पूर्व 4 मार्च‚ 2020 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के बजट सत्र के दौरान ‘गैरसैंण’ को उत्तराखंड की नई ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में घोषित किया था।
  • उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है‚ जिसकी अपनी स्थायी राजधानी की घोषणा से पहले ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा हुई है।
  • ध्यातव्य है कि उत्तराखंड भारत का एक ऐसा राज्य है‚ जिसकी 20 वर्षों से अपनी कोई स्थायी राजधानी नहीं है अर्थात देहरादून को उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाता रहा है।
  • ‘गैरसैंण’ या ‘भराड़ीसैंण’ अब उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी‚ जो 20 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
  • गैरसैंण के अलावा अब ‘देहरादून’ उत्तराखंड राज्य की स्थायी या अस्थायी राजधानी होगी या नहीं‚ इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
  • फिलहाल दूसरी राजधानी के रूप में ‘देहरादून’ से संचालन जारी रहेगा।
  • उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार के ज्यादातर विधानसभा सत्र देहरादून में आयोजित किए जाते हैं‚ लेकिन कभी-कभी कुछ विधानसभा सत्र जैसे बजट सत्र का आयोजन ‘गैरसैंण’ में होता है।
  • वर्ष 2020-21 के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा बजट सत्र (3-6 मार्च‚ 2020) का आयोजन ‘गैरसैंण’ में ही किया गया।
  • ‘गैरसैंण’ को उत्तराखंड राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का लक्ष्य वर्तमान सरकार का चुनावी संकल्प था।
  • महत्वपूर्ण यह है कि इस फैसले पर विपक्ष द्वारा कोई विरोध नहीं किया गया।
  • ‘‘पहाड़ की राजधानी पहाड़ में हो’’‚ इस अवधारणा के साथ उत्तराखंड सरकार ने अपना पहला कदम आगे बढ़ाया है।
  • अब उत्तराखंड देश का ऐसा पांचवां राज्य होगा‚ जिसकी दो-दो राजधानियां होंगी।
  • इसके अलावा हिमाचल प्रदेश‚ महाराष्ट्र‚ आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की दो-दो राजधानियां हैं।
  • ध्यातव्य है कि आंध्र प्रदेश में एक तीसरी राजधानी का प्रस्ताव रखा गया है।
  • गैरसैंण (भराड़ीसैंण)
  • गैरसैंण या भराड़ीसैंण उत्तराखंड के चमोली जिले (गढ़वाल मंडल) में स्थित प्राकृतिक सुंदरता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण स्थल है‚ जिसे नगर पंचायत का दर्जा हासिल है।
  • गैरसैंण को उत्तराखंड के पामीर के नाम से जाना जाता है‚ जो दूधातोली पहाड़ी पर स्थित है।
  • वर्तमान स्थिति के अनुसार‚ गैरसैंण की भौगोलिक सीमाएं तीन जनपदों चमोली‚ अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल को स्पर्श करती हैं।
  • कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के बीच में स्थित (उत्तराखंड के मध्य) होने की वजह से ‘गैरसैंण’ को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान प्रस्तावित राज्य की राजधानी के रूप में पेश किया जाने लगा।
  • ध्यातव्य है कि 1969 के दशक में एक पहाड़ी राज्य की राजधानी के रूप में ‘गैरसैंण’ को प्रस्तावित करने वाले पहले व्यक्ति वीर चन्द्र गढ़वाली थे।
  • इसी क्रम में 9 नवंबर‚ 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से ही ‘गैरसैंण’ को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग राज्य भर में उठने लगी।
  • इन्हीं मांगों को पूरा करने के लिए तत्कालीन उत्तराखंड सरकार ने दीक्षित आयोग का गठन किया‚ जिसने देहरादून तथा काशीपुर को राजधानी के योग्य पाया तथा गैरसैंण को विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राजधानी बनाने से अस्वीकार कर दिया था।
  • गैरसैंण में स्थानीय तौर पर कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा का चलन है‚ लेकिन सरकारी काम-काज में हिंदी और अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता है।
  • ‘गैरसैंण’ का उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं‚ गढ़वाल व मैदानी भू-भागों के बीच में स्थित होना‚ इसके महत्व को बढ़ा देता है और जो पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक आवश्यक शर्त है।
  • चुनौतियां
  • ‘गैरसैंण’ को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित तो कर दिया गया‚ लेकिन यहां राजधानी के लायक अवस्थापना सुविधाएं जुटाना बड़ी चुनौती होगी।
  • ‘गैरसैंण’ में आधुनिक सुविधाओं का भी अभाव है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर यहां एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र‚ बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के संचालित हो रहा है।
  • इसके अलावा यहां अभी तक कोई नजदीकी रेलवे स्टेशन भी नहीं है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • उत्तराखंड राज्य में प्रशासकीय तौर पर दो मंडल‚ कुमाऊं और गढ़वाल हैं। ‘गैरसैंण’‚ गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों के लिए एक सेतु का कार्य करेगा अर्थात गैरसैंण से दोनों हिस्सों में आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • ‘गैरसैंण’ को ग्रीष्मकालीन राजधानी क्षेत्र के साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करने की योजना उत्तराखंड सरकार द्वारा की गई है।
  • पेयजल की सुचारू रूप से आपूर्ति के लिए रामगंगा नदी पर झील का निर्माण किया जा रहा है।
  • ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है‚ जिसके पूरा होने पर रेल सेवा गैरसैंण के काफी नजदीक होगी।
  • निष्कर्ष
  • उत्तराखंड में राजधानी का मुद्दा जनभावनाओं से जुड़ा है। राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बनाए जाने को लेकर आवाज उठती रही है। इसी वजह से कोई भी सरकार ‘गैरसैंण’ को दरकिनार नहीं कर पाई।

संअमित शुक्ला