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केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के वधावन में नए प्रमुख बंदरगाह की स्थापना को मंजूरी दी

The central government approved the establishment of a new major port at Wadhawan, Maharashtra
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य
  • 5 फरवरी‚ 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र के वधावन में एक नए प्रमुख बंदरगाह (Major port) की स्थापना के लिए मंजूरी प्रदान की।
  • वर्तमान में देश में कुल 12 प्रमुख बंदरगाह हैं‚ अत: यह बंदरगाह 13वां प्रमुख बंदरगाह होगा।
  • इस बंदरगाह के विकास के साथ भारत विश्व के उन शीर्ष -10 देशों की सूची में शामिल हो जाएगा‚ जहां कंटेनर (पात्र) बंदरगाह की सुविधा उपलब्ध है।
  • इस बंदरगाह को भू-स्वामित्व मॉडल (Landlord model) के आधार पर विकसित किया जाएगा।
  • वधावन बंदरगाह
  • केंद्र सरकार द्वारा महाराष्ट्र के वधावन में एक प्रमुख बंदरगाह को स्थापित करने के लिए 65,544.54 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई।
  • इस बंदरगाह के विकास के लिए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (Jawaharlal Nehru Port Trust) के साथ एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special purpose vehicle) का गठन किया जाएगा।
  • विशेष प्रयोजन वाहन एक उद्देश्यपूर्ण इकाई है‚ जो बंदरगाह की बुनियादी सुविधाओं का विकास करेगा जिसमें पुनर्निर्माण‚ नए निर्माण एवं जलमार्ग का निर्माण भी शामिल है।
  • इस परियोजना में भारत सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत होगी।
  • कंटेनर जहाजों के लगातार बढ़ रहे आकार के कारण भारत के पश्चिमी तट पर गहरे बंदरगाहों का विकास करना अत्यंत आवश्यक हो गया है‚ अत: यह बंदरगाह जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर बढ़ रहे अतिरिक्त भार को कम करने में सहयोग करेगा।
  • भारत के 12 प्रमुख बंदरगाह- दीन दयाल बंदरगाह (कांडला)‚ मुंबई‚ जेएनपीटी‚ मोरमुगाओ‚ न्यू मंगलौर‚ कोचीन‚ चेन्नई‚ कामराजार (पहले एन्नौर)‚ वी. ओ. चिदम्बरनार‚ विशाखापत्तनम‚ पाराद्वीप और कोलकाता (हल्दिया सहित) है।
  • भू-स्वामित्व मॉडल (Landlord model)
  • इस प्रकार के मॉडल में बंदरगाह प्राधिकरण एक नियामक निकाय तथा जमीन के मुखिया के रूप में कार्य करता है‚ जबकि निजी कंपनियां बंदरगाह के संचालन का कार्य करती हैं।
  • भू-स्वामी को बंदरगाह पर कार्यरत निजी संस्था से राजस्व का एक हिस्सा मिलता है।
  • गौरतलब है कि प्रमुख बंदरगाहों का विकास केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है तथा छोटे बंदरगाह राज्य सरकारों के अधीन आते हैं।
  • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट
  • नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (Jawaharlal Nehru Port Trust) की शुरुआत 26 मई‚ 1989 को हुई थी।
  • इसका पूर्ववर्ती नाम न्हावा शेवा बंदरगाह था। यह भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह तथा विश्व का 28वां सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह है।
  • वर्तमान में इस बंदरगाह की यातायात वहन क्षमता 5.1 मिलियन टीईयू (TEUs  : Twenty Foot Equivalent Units) है।
  • वर्ष 2030 तक इस बंदरगाह की यातायात वहन क्षमता 10 मिलियन टीईयू हो जाएगी‚ अत: यह विश्व का 17वां सबसे बड़ा बंदरगाह बन जाएगा।
  • यह बंदरगाह महाराष्ट्र‚ उत्तरी कर्नाटक‚ तेलंगाना‚ गुजरात‚ मध्य प्रदेश‚ राजस्थान‚ राष्ट्रीय‚ राजधानी क्षेत्र दिल्ली‚ पंजाब व उत्तर प्रदेश को सुविधा प्रदान करता है।
  • प्रमुख पत्तन प्राधिकरण विधेयक‚ 2020
  • 12 फरवरी‚ 2020 को केंद्र सरकार के द्वारा ‘प्रमुख पत्तन प्राधिकरण विधेयक‚ 2020’ (Major Port Trust Bill- 2020) को मंजूरी दी गई।
  • यह विधयेक‚ 1963 के प्रमुख पत्तन प्राधिकरण अधिनियम की जगह लेगा।
  • विधेयक के अनुसार‚ पत्तन प्राधिकरण के निर्णयों की समीक्षा के लिए सर्वोच्च स्तर पर एक न्याय तथा निर्णय करने वाले बोर्ड का गठन किया जाएगा‚ जिसके पास पत्तन प्राधिकरणों तथा सार्वजनिक-निजी साझेदारी संचालकों के मध्य होने वाले विवादों को सुलझाने की शक्ति होगी।
  • प्रमुख बंदरगाह‚ पत्तन से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के लिए प्रशुल्क (Tariff) निर्धारित कर सकेंगे तथा उनके साथ काम करने वाली निजी निर्माता कंपनियों के लिए शर्तें रख सकेंगे।
  • इस विधेयक का उद्देश्य पत्तनों की समग्र कार्यकुशलता में बढ़ोत्तरी करना है।
  • वधावन बंदरगाह का महत्व
  • वधावन बंदरगाह के तट की गहराई लगभग 20 मीटर है‚ अत: इस बंदरगाह पर बड़े जहाजों के रख-रखाव की संभावना अधिक है।
  • वधावन बंदरगाह का विकास 16,000 से 25,000 टीईयू क्षमता वाले कंटेनर जहाजों को आसानी से ठहराव की क्षमता प्रदान करेगा।
  • इससे अर्थव्यवस्था के स्तर में बढ़ोत्तरी होगी तथा बंदरगाह के संचालन के लागत में कमी होने से सरकार को लाभ होगा।

संअभय पाण्डेय