सम-सामयिक घटना चक्र | Railway Solved Paper Books | SSC Constable Solved Paper Books | Civil Services Solved Paper Books
Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

कृषि विधेयक‚ 2020

Agriculture Bill 2020
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य  
  • हाल ही में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कृषि सुधार से जुड़े तीन विधेयकों पर हस्ताक्षर किए।  
  • राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही ये तीनों विधेयक अब कानून बन गए हैं।  
  • इनमें ‘कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक’  [Agricultural Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill]‚ कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाएं विधेयक [Agriculture (Empowerment and Protection) Price Assurance and Agricultural Services Bill] तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक [Essential Commodities (Amendment) Bill] शामिल हैं।
  • कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक‚ 2020  
  • इस विधेयक के तहत एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र का प्रावधान किया गया है‚ जिसमें किसान और व्यापारी विभिन्न राज्य कृषि उत्पादन विपणन विधानों के तहत अधिसूचित मंडियों एवं बाजारों में कृषि उत्पादों को बेच सकेंगे।  
  • इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक व्यापार और इससे जुड़े मामलों या आकस्मिक मामलों के लिए एक सुविधाजनक ढांचा भी उपलब्ध कराया जाएगा।  
  • केंद्र सरकार के अनुसार‚ यह विधेयक भारत में ‘एक देश – एक कृषि बाजार’ के निर्माण में सहायता प्रदान करेगा।
  • पृष्ठभूमि  
  • इस विधेयक से पूर्व किसानों को अपनी उपज की बिक्री हेतु अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।  
  • किसानों को अपनी उपज केवल राज्य सरकारों के पंजीकृत मंडियों में बेचने की बाध्यता थी। किसानों (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) का मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक‚ 2020  
  • यह विधेयक कृषकों को बिना किसी शोषण या भय के प्रसंस्करणकर्ताओं‚ थोक विक्रेताओं‚ बड़े खुदरा व्यापारियों‚ निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने में सक्षम बनाएगा।  
  • किसान प्रत्यक्ष रूप से विपणन से जुड़ सकेंगे‚ जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी
  • कृषि अवसंरचना के विकास हेतु निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा मिलेगा‚ जिससे कृषि उपज को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
  • पृष्ठभूमि  
  • किसानों को छोटी जोत‚ मौसम पर निर्भरता‚ उत्पादन और बाजार की अनिश्चितता के कारण कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता था।  
  • इससे पूर्व आर्थिक दृष्टि से कृषि में बहुत अधिक नुकसान का सामना करना होता था।
  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक‚ 2020  
  • इस विधेयक के अंतर्गत अनाज‚ दलहन‚ तिलहन‚ खाद्य तेल और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर रखा गया है।  
  • इस प्रावधान में कृषि उत्पादों के संग्रहण की कोई निश्चित सीमा की बाध्यता नहीं रहेगी।  
  • इससे कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा‚ इसका उदाहरण है ‘कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग’।   उत्पादों की कीमतों में स्थिरता आएगी तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा होगी।  
  • देश में कृषि उत्पादों के भंडारण एवं प्रसंस्करण की क्षमता में वृद्धि होगी। भंडारण क्षमता में वृद्धि से किसान अपनी उपज सुरक्षित रख सकेंगे एवं उचित समय आने पर बेच पाएंगे।
  • पृष्ठभूमि  
  • भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण कृषि उत्पाद नष्ट हो जाते थे‚ जिन पर अब अंकुश लगेगा। 
  • मंडियों में कृषि उत्पादों की त्वरित बिक्री न हो पाने के कारण उत्पादों के खराब होने का नुकसान किसानों को उठाना पड़ता था।
  • कृषि क्षेत्र में निवेश से उद्यमशीलता की भावना को बल मिलेगा एवं आर्थिक विकल्प अधिक होंगे।
  • विरोध
  • जून‚ 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि संबंधी अध्यादेशों के जारी होने बाद से ही पंजाब और हरियाणा राज्य में किसानों द्वारा इसका विरोध जारी है।  
  • इन विधेयकों पर आपत्ति जताते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।  
  • ज्यादातर किसान तीनों विधेयकों का विरोध कर रहे हैं‚ लेकिन उनकी सबसे बड़ी आपत्ति ‘कृषि उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्द्धन एवं सुविधा) विधेयक के ‘व्यापार क्षेत्र’‚ ‘व्यापारी’‚ ‘विवाद-समाधान’ और ‘बाजार शुल्क’ से संबंधित प्रावधानों से है।
  • कृषि उत्पाद विपणन समिति  
  • कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्द्धन एवं सुविधा) विधेयक की धारा 2(म) के अनुसार‚ व्यापार क्षेत्र का अर्थ किसी ऐसे स्थान या अन्नागार से है‚ जहां किसानों के उपज की सुरक्षा एवं संरक्षण किया जा सके।  
  • इस परिभाषा में कृषि उत्पाद बाजार समिति अधिनियम (Agricultural Produce Market Committee Act – APMC Act) के तहत स्थापित मौजूदा मंडियों को नए कानून के तहत व्यापार क्षेत्र की परिभाषा से बाहर रखा गया है।
  • किसानों के अनुसार‚ यह प्रावधान मौजूदा मंडियों को उनकी भौतिक सीमाओं तक सीमित कर देगा और इससे बड़े व्यापारियों को बढ़ावा मिलेगा।  
  • गौरतलब है कि वर्ष 2006 में बिहार राज्य में APMC प्रणाली को समाप्त कर दिया गया था‚ जिससे कृषि उपज के व्यापार में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी‚ जिससे किसानों को भारी क्षति हुई।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य
  • बड़े कृषि राज्यों पंजाब‚ हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस विधेयक का अधिक विरोध हो रहा है।  
  • किसानों को आशंका है कि सरकार धीरे-धीरे न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Supporting Price – MSP) को खत्म कर देगी।  
  • शांताराम समिति के अनुसार‚ सरकार द्वारा प्रदत्त MSP का लाभ  केवल 8 प्रतिशत किसानों तक ही सीमित है।
  • कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग  
  • किसानों के लिए काम करने वाले संगठनों और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग के इस कानून से किसान अपने ही खेत में सिर्फ मजदूर बनकर रह जाएंगे।  
  • इस कानून से किसानों में सबसे बड़ा भय यह है कि किसान व कॉन्ट्रैक्टर के मध्य विवाद का निपटारा एसडीएम व डीएम ही करेंगे न कि न्यायालय।  
  • भारत में 85 प्रतिशत से अधिक किसान ऐसे हैं‚ जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम जोत है‚ ऐसे में किसानों को बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • सरकार का पक्ष  
  • सरकार का मत है कि इन कानूनों से कृषि में निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से तथा विधेयक में प्रस्तावित अन्य सुधारों से कृषि क्षेत्र में बड़े सकारात्मक बदलाव होंगे। 
  • इन सुधारों के बाद भी किसानों को MSP मिलता रहेगा और राज्य कानूनों के तहत स्थापित मंडियों के कार्यों में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
  • निष्कर्ष  
  • कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहन के साथ-साथ APMC में पहुंच विस्तार हेतु आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।  
  • ई-नाम (e-NAM) से कृषि क्षेत्र में नवीन मंडियों को कृषि क्षेत्र में ई-ट्रेंडिग (E-Tranding) को बढ़ावा मिलेगा।  
  • कृषि के उपज संबंधी MSP के संदर्भ में स्वामीनाथन समिति (Swaminathan Committee) की सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए।

सं.  अभय पाण्डेय