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काकरापार परमाणु शक्ति संयंत्र-3

Kakrapar Atomic Power Plant-3
  • सामयिक प्रसंग
  • 22 जुलाई, 2020 को गुजरात स्थित काकरापार परमाणु शक्ति स्टेशन के तीसरे संयंत्र (KAPP-3) ने क्रांतिकता (Criticality) प्राप्त की।
  • यह उपलब्धि प्राप्त करने वाला KAPP-3 अपनी तरह का प्रथम स्वदेशी 700 MWe क्षमता का दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) है।
  • क्रांतिकता प्राप्त करने का अर्थ
  • किसी परमाणु शक्ति संयंत्र के क्रांतिकता (Criticality) प्राप्त करने से आशय-नियंत्रित स्वहनीय नाभिकीय विखंडन शृंखला अभिक्रिया का आरंभ होना है।
  • इस अभिक्रिया के आरंभ हो जाने के बाद प्रत्येक विखंडन गतिविधि के पश्चात न्यूट्रॉनों की पर्याप्त संख्या मुक्त होती है, जो आगे की अभिक्रिया को शृंखलाबद्ध रूप से आगे बढ़ाते हैं।
  • PHWR प्रणाली
  • ज्ञातव्य है कि काकरापार परमाणु शक्ति संयंत्र-3 (KAPP-3) एक दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR : Pressurised Heavy Water Reactor) है।
  • PHWR एक ऐसा नाभिकीय रिएक्टर है, जिसमें मंदक तथा शीतलक (Moderator and Coolant) दोनों के लिए भारी जल (Heavy Water) का प्रयोग किया जाता है।
  • शीतलक के रूप में D2O
  • शीतलक के रूप में भारी जल (D2O) नाभिकीय रिएक्टर के ताप को कम करता है तथा इसे इलेक्ट्रिक जेनरेटर या वातावरण में मुक्त करता है।
  • मंदक के रूप में D2O
  • मंदक के रूप में भारी जल (D2O) न्यूट्रॉनों (no) की गति को कम करता है ताकि नियंत्रित शृंखला अभिक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ती रहे।
  • विदित हो कि भारी जल, हाइड्रोजन का समस्थानिक है, जिसे D2O (ड्यूटीरियम ऑक्साइड) के नाम से जाना जाता है।
  • PHWR श्रेणी के रिएक्टर में U-235 के 0.7 प्रतिशत मात्रा का तथा शेष U-238 का प्रयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।
  • भारत के नाभिकीय प्रोग्राम का पहला चरण PHWR तकनीक पर ही आधारित था, क्योंकि इसके निम्नलिखित लाभ थे :
  • भारत के सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना;
  • द्वितीय चरण में ईंधन के लिए उच्च गुणवत्ता के प्लूटोनियम का उत्पादन करना;
  • स्वदेशी तकनीकी को उपलब्ध करवाना।
  • PHWR तकनीक पर आधारित भारत का प्रथम नाभिकीय रिएक्टर रावतभाटा, राजस्थान में कनाडा के सहयोग से स्थापित किया गया।
  • इसने वर्ष 1973 से कार्य करना आरंभ किया।
  • KAPP की पृष्ठभूमि
  • गुजरात के सूरत नगर में स्थित काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र 220 MWe का दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) है। यह 6 मई, 1993 से व्यावसायिक रूप से प्रचालनरत (Operational) हुआ।
  • जबकि 220 MWe के दूसरे PHWR श्रेणी के रिएक्टर को 1 सितंबर, 1995 से प्रचालनरत (Operational) किया गया।
  • ध्यातव्य हो कि वर्ष 2017 में भारत सरकार ने 700 MWe क्षमता के 10 नए PHWR रिएक्टरों की स्थापना की योजना की घोषणा की थी।
  • इस प्रकार सरकार ने विगत चार दशकों में विकसित स्वदेशी तकनीक में भरोसा व्यक्त किया।
  • KAPP-3
  • प्रस्तुत परमाणु संयंत्र (KAPP-3) उसी क्रम में आगे बढ़ने का संदेश देता है।
  • अभी तक भारत का सबसे बड़ा PHWR आधारित रिएक्टर 540 MWe का तारापुर, महाराष्ट्र था।
  • किंतु अब KAPP-3 700 MWe विद्युत उत्पादन क्षमता के साथ भारत का सबसे बड़ा दाबित भारी जल श्रेणी का रिएक्टर (PHWR) बन गया है।
  • 700 MWe की KAPP-3 में तारापुर के 540 MWe PHWR श्रेणी के रिएक्टर की तुलना में इसके डिजाइन तथा सुरक्षा मानकों को उन्नत किया गया है।
  • ज्ञातव्य हो कि 700 MWe के KAPP-3 रिएक्टर में ‘पैसिव डिके हीट रिमूवल सिस्टम’ (Passive Decay Heat Removal System) का इस्तेमाल किया गया है, जो बिना ऑपरेटर के स्वचालित तरीके से रिएक्टर के कोर से क्षयित ऊष्मा को हटा देगा।
  • यह तकनीक वर्ष 2011 में जापान के फुकुशिमा प्लांट में हुई दुर्घटना की संभावना को दरकिनार करने के लिए तैयार तीसरी पीढ़ी के (जनरेशन III+संयंत्रों) के लिए अपनाई गई समान तकनीक की तर्ज पर आधारित है।
  • किसी भी रिसाव को कम करने के लिए स्टील की बनी रोकथाम (Containment) विधि का प्रयोग किया गया है।
  • रिएक्टर में शीतलक के अप्रभावी होने की स्थिति में किसी दुर्घटना को कम करने के लिए बचाव व रोकथाम छिड़काव प्रणाली (Containment) से सुसज्जित किया गया है।
  • KAPP-3 भारत का 23वां परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
  • PHWR आधारित अन्य परियोजनाएं
  • KAPP-3 के 700 MWe के अतिरिक्त कई अन्य परियोजनाएं भी क्रियान्वयन के मार्ग पर गतिशील हैं-

संयंत्र

स्थिति

क्षमता (MWe)

वाणिज्यिक संचालन की अपेक्षित तिथि

KAPP-4

काकरापार, गुजरात

700

दिसंबर, 2020

RAPP-7

रावतभाटा, राजस्थान

700

दिसंबर, 2020

RAPP-8

रावतभाटा, राजस्थान

700

दिसंबर, 2021

KKNPP3

कुडनकुलम, तमिलनाडु

1,000

मार्च, 2023

KKNPP4

कुडनकुलम, तमिलनाडु

1,000

नवंबर, 2023

*Pressurised Fast Breeder Reactor

  • भारत में परमाणु ऊर्जा की संस्थापित क्षमता
  • भारत में परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी।
  • भारत में परमाणु ऊर्जा की वर्तमान संस्थापित क्षमता 6,780 MWe है, जो KAPP-3 के 700 MWe क्षमता के PHWR श्रेणी के रिएक्टर के चालू होने के बाद 7,480 MWe हो जाएगी।
  • निष्कर्ष
  • यद्यपि परमाणु ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन में कमी कर ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से निपटने में देश को भारी मदद मिलेगी। साथ ही देश की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में भी कमी आएगी। तथापि फुकुशिमा, चेर्नोबिल व थ्री आइलैंड जैसी परमाणु त्रासदियों से सबक सीखने की भी आवश्यकता है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकले रेडियोधर्मी कचरे का निपटान भी अभी अपेक्षित मानकों पर खरा नहीं है तथा इसके खतरे बरकरार हैं। अतः हमें ऊर्जा नीतियों एवं कार्यक्रमों में उपरोक्त चिंताओं के निवारण के प्रयत्न करने चाहिए।

सं. अमित त्रिपाठी