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ओडिशा के दो गांवों को सुनामी रेडी टैग

Tsunami ready tag to two villages of Odisha
  • पृष्ठभूमि
  • तटीय राज्य होने के कारण ओडिशा को प्राय: सागरीय प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है।
  • वर्ष 1999 में आए महा चक्रवात (Super Cyclone) जिसमें 10 हजार से अधिक लोग मारे गए थे‚ के पश्चात ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तटीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के लिए अनेक प्रयास किए गए।
  • प्राधिकरण द्वारा ओडिशा के गंजाम जिले के वेंकटरायपुर एवं जगतसिंहपुर जिले के नोलियाशाही गांव में ‘सुनामी रेडी कार्यक्रम’ को लागू किया गया।
  • भारत सरकार द्वारा सुनामी रेडी कार्यक्रम पर निगरानी के लिए ‘पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय’ की सहायता से एक राष्ट्रीय बोर्ड का गठन किया गया‚ जिसमें मंत्रालय के सदस्यों के साथ-साथ गृह मंत्रालय‚ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण‚ ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण‚ अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के आपदा प्रबंधन एवं महासागर सूचना के लिए भारतीय राष्ट्रीय केंद्र के सदस्यों को शामिल किया गया।
  • राष्ट्रीय बोर्ड के अनुमोदन के पश्चात इन दोनों गांवों को यूनेस्को के पास चयन के लिए प्रस्तुत किया गया।
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 7 अगस्त‚ 2020 को ‘भारतीय राष्ट्रीय समुद्र सूचना सेवा संस्थान’ (INCOIS) एवं ‘हिंद महासागर सुनामी सूचना केंद्र’ (IOTIC) द्वारा आयोजित आभासी कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक‚ वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के अंतरसरकारी महासागरीय आयोग (IOC) द्वारा ओडिशा राज्य के दो गांवों वेंकटरायपुर (गंजाम जिला) एवं नोलियाशाही (जगतसिंहपुर जिला) को ‘सुनामी रेडी’ टैग प्रदान किया गया।
  • इसके साथ हिंद महासागर क्षेत्र में ‘सुनामी रेडी’ टैग प्राप्त करने वाला भारत पहला देश है तथा भारत में ओडिशा पहला राज्य है।
  • सुनामी रेडी क्या है?
  • इस कार्यक्रम में समुदाय‚ उनके नेताओं‚ राष्ट्रीय एवं स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन संस्थाओं के सहयोग से सुनामी तैयारियों को बढ़ावा दिया जाता है।
  • उद्देश्य
  • इसका मुख्य उद्देश्य तटीय सामुदायिक तैयारियों में सुधार करना‚ जिससे जीवन एवं संपत्ति के नुकसान को कम करने के साथ-साथ अंतरसरकारी समन्वय समूह द्वारा निर्धारित सर्वोत्तम अभ्यास संकेतकों के माध्यम से सामुदायिक तैयारी के संरचनात्मक एवं व्यवस्थित दृष्टिकोण को सुनिश्चित करना।
  • मापदंड
  • सुनामी रेडी टैग प्राप्त करने के लिए 11 संकेतकों को पूरा करना पड़ता है।
  • सामुदायिक सुनामी जोखिम कम करने की योजना।
  • सुनामी खतरे वाले क्षेत्र को नामित एवं मैप करना।
  • सुनामी सूचनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन।
  • आसानी से समझ आने वाली सुनामी निकासी मैप को सामुदायिक एवं स्थानीय प्राधिकरण के सहयोग से तैयार करना।
  • पहुंच (आउटरीच) एवं जन शैक्षिक सामग्री को विकसित एवं वितरित करना।
  • वार्षिक आधार पर कम-से-कम तीन शैक्षिक गतिविधियों को लागू करना।
  • वार्षिक सुनामी सामुदायिक अभ्यास का आयोजन।
  • सामुदायिक आपातकालीन संचालन योजना में सुनामी खतरों की घोषणा।
  • सुनामी के दौरान आपातकालीन संचालन वंâेद्र को सहयोग करना।
  • सुनामी आशंका से संबंधित विश्वसनीय माध्यम से 24 घंटे चेतावनी को प्राप्त करना।
  • जनता के लिए 24 घंटे सुनामी अलर्ट को जारी करना।
  • सुनामी (Tsunami)
  • सुनामी जापानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘पत्तन लहर’ (Harbour Waves)। यह ‘Tsu’ अर्थात पत्तन या बंदरगाह एवं ‘nami’ अर्थात लहर से मिलकर बना है।
  • सुनामी महासागरों में उत्पन्न उच्च ऊर्जा वाली लहरें हैं‚ जिनकी उत्पत्ति महासागरीय तल में भ्रंशन एवं प्लेटों के टकराने से उत्पन्न भूकंप के द्वारा होती है।
  • भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र (ITEWC), भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) का नोडल अधिकरण है‚ जो भारत के साथ-साथ हिंद महासागर के 25 तटीय देशों को सुनामी संबंधी सलाह/सूचना प्रदान करता है।
  • प्रति वर्ष 5 नवंबर को ‘सुनामी जागरूकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इसकी घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ के सामान्य बैठक में दिसंबर‚ 2015 में की गई थी।

सं. शैलेन्द्र सिंह