सम-सामयिक घटना चक्र | Railway Solved Paper Books | SSC Constable Solved Paper Books | Civil Services Solved Paper Books
Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

ऐतिहासिक बोडो समझौता संपन्न

Historic Bodo Agreement Completed
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
  • असम राज्य के 34 जनजातीय समुदायों में ‘बोडो’ सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय है।
  • असम की कुल जनसंख्या में बोडो जनजाति का प्रतिशतांश लगभग 5 से 6 प्रतिशत है।
  • बोडो समुदाय की सामुदायिक संरचना मूलतः एक परिवार की भांति है जिसमें-कीच, कचारी, मेच, लाल्लुंग, दिमासो आदि जनजातियां सम्मिलित हैं।
  • बोडो समस्या
  • बोडो आंदोलन भारत की स्वतंत्रता के पूर्व के वर्षों से ही प्रासंगिक रहा है, जिसके मूल में उपेक्षा और गरीबी की भावना प्रधान कारक रही है।
  • पहाड़ी और मैदानी जनजातियों में संख्यात्मक आधार पर सबसे बड़ी जनजाति होने के बावजूद अधिकतर बोडो आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है तथा तीन-चौथाई आबादी दूर-दराज के इलाकों में रहती है, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
  • अतः अपनी नृजातीय पहचान (Ethnic Identity), संस्कृति, भाषा आदि की सुरक्षा के लिए अलग ‘बोडोलैंड राज्य’ की मांग स्वतंत्रता के पूर्व के वर्षों से ही की जाती रही है।
  • बोडो आंदोलन के प्रमुख चरण
  • सर्वप्रथम वर्ष 1929 में साइमन कमीशन (Simon Commission) के समक्ष बोडो नेता ‘गुरुदेव कालीचरण ब्रह्म’ ने केंद्रीय विधानसभा में बोडो जनजाति के लिए सीटों के आरक्षण की मांग की। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने उनकी मांग को नकार दिया।
  • वर्ष 1966-67 में उपेंद्रनाथ ब्रह्म के नेतृत्व में ‘ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन’ (ABSU) का गठन कर एक पृथक बोडो राज्य ‘उदयांचल’ की मांग की गई।
  • बोडो लोगों का कहना था कि बोडो अधिवासित क्षेत्रों में अवैध अप्रवासन (Illegal Immigration) हो रहा है, जिससे उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • वर्ष 1987 में उपेंद्रनाथ ब्रह्म के नेतृत्व में ABSU द्वारा बोडो आंदोलन को फिर से प्रारंभ किया गया तथा बोडो लोगों के लिए-बोडोलैंड तथा शेष असम राज्य के क्षेत्रफल को 50:50 के अनुपात में विभाजन की मांग की गई।
  • ABSU द्वारा उपर्युक्त समझौते के शांतिपूर्ण हल तक पहुंचने के बावजूद, तत्कालीन समय में अस्तित्व में आए अलगाववादी समूहों यथा-बोडोलैंड लिबरेशन टाइगर्स (BLT) तथा नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB-S) ने हिंसक गतिविधियां प्रारंभ कर दी। फलतः समझौता असफल हो गया।
  • पुनः फरवरी, 1993 में केंद्र सरकार, असम सरकार तथा ABSU के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते (Tripartite Agreement) द्वारा संविधान की छठी अनुसूची के तहत बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC-Bodoland Territorial Council) का गठन किया गया।
  • किंतु ABSU इस समझौते से पीछे हट गया तथा एक बार फिर पृथक राज्य की मांग दोहराने लगा।
  • फरवरी, 2003 में दूसरा बोडो समझौता (Bodo Accord) केंद्र सरकार, असम सरकार तथा बोडोलैंड लिबरेशन टाइगर्स (BLT) के बीच संपन्न हुआ तथा BTC का गठन अंतिम रूप से संपन्न हुआ।
  • BTC
  • वर्ष 2003 में संपन्न द्वितीय बोडो समझौते के अंतर्गत गठित बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC-Bodoland Territorial Council) में असम राज्य के सात बोडो बहुल जिलों को मिलाकर चार जिले-कोकराझार, चिरांग, उदलगुरी और बक्शा बनाए गए।
  • वर्ष 2005 में NDFB और असम सरकार के मध्य शांति समझौता संपन्न हुआ, इसी के साथ NDFB तीन समूहों में बंट गया।
  • NDFB(S) समूह ने हिंसा जारी रखने की घोषणा की।
  • सनद रहे कि NDFB(S) समूह द्वारा वर्ष 2012, मई, 2014 और दिसंबर, 2014 में असम में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों को जान गंवानी पड़ी।
  • दिसंबर, 2014 के आतंकी घटना के बाद केंद्र सरकार ने NDFB(S) समूह के विरुद्ध ऑपरेशन ऑल आउट (Operation All-out) के तहत भारतीय सेना, वायु सेना, असम पुलिस तथा पैरामिलिट्री फोर्स के द्वारा बड़ा सैनिक अभियान चलाकर इन्हें भारी क्षति पहुंचाई।
  • किंतु अभी तक NDFB(S) समूह का असम में कई आतंकी घटनाओं में हाथ होने के प्रमाण मिलते रहे।
  • वर्तमान समझौता : मुख्य बिंदु
  • 27 जनवरी, 2020 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में केंद्र सरकार, असम सरकार तथा बोडो प्रतिनिधियों के मध्य नई दिल्ली में तीसरा और स्थायी बोडो समझौता संपन्न हुआ।
  • सनद रहे कि पिछले 50 वर्षों के बोडो समस्या की वजह से 4000 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
  • प्रस्तुत समझौते के अंतर्गत 1500 सशस्त्र बोडो उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्य धारा में वापस लौटेंगे।
  • BTC का नया नाम बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट (BTAD-Bodoland Territorial Area District) रखा गया है। BTAD संविधान की छठी अनुसूची के तहत चार जिलों-कोकराझार, चिरांग, उदलगुरी तथा बक्शा में विस्तारित होगा।
  • BTAD में ऐसे गांव जो कि बोडो जनसंख्या बहुल हैं और BTAD में शामिल नहीं हैं, उन्हें BTAD में शामिल किया जाएगा। इसी प्रकार ऐसे गांव जो बोडो जनसंख्या बहुल नहीं हैं, उन्हें BTAD से हटाया जाएगा।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली बोडो जनजातियों को बोडो हिल जनजाति का दर्जा दिया जाएगा।
  • बोडो भाषा को देवनागरी लिपि में संबद्ध आधिकारिक भाषा (Associate Official Language) का दर्जा दिया जाएगा।
  • 1500 करोड़ रुपये का एक ‘विशेष विकास पैकेज’ (Special Development Package) केंद्र सरकार द्वारा तीन वर्षों के दौरान दिया जाएगा ताकि बोडो क्षेत्रों के विकास प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके।
  • गौरतलब है कि वर्तमान बोडो समझौते (Bodo Agreement) में बोडो प्रतिनिधियों में-BTC के प्रतिनिधि, ABSU, यूनाइटेड वोडो पीपुल ऑर्गनाइजेशन (UBPO), NDFB के-गोबिंदा बासुमारी, धीरेंद्र बोरो, रंजन दायमारी, बी. साओरेगवारा शामिल रहे, जबकि NDFB के निष्कासित सदस्य आई.के. सांगबिजित (I.K. Songbijit) ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • प्रस्तुत समझौते के तहत BTAD को पहले से अधिक विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार प्राप्त होंगे।
  • इसके लिए BTAD के प्रशासनिक एवं वित्तीय संसाधनों में सुधार के लिए संविधान की छठी अनुसूची में संशोधन किया जाएगा।
  • BTAD; बोडो समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषायी और नृजातीय पहचान को प्रोत्साहन और सुरक्षा प्रदान करेगा।
  • बोडो लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा करेगा।
  • जनजातीय विकास को तीव्र करेगा तथा NDFB के सदस्यों का पुनर्वास भी करेगा।
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act), 2019 BTAD जिलों में लागू नहीं किया जाएगा।

सं. अमित त्रिपाठी