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एनसीआरबी रिपोर्ट : भारत में अपराध‚ 2019

NCRB Report: Crime in India 2019
  • पृष्ठभूमि
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau : NCRB) की स्थापना वर्ष 1986 में अपराध एवं अपराधियों से संबंधित सूचनाओं के संग्रहकर्ता के रूप में की गई थी।
  • इसकी स्थापना राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1977-81) के टंडन समिति एवं गृह मंत्रालय की टास्क फोर्स (1985) की अनुशंसाओं के आधार पर की गई थी।
  • तद्नुसार‚ वर्ष 2009 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) परियोजना की मॉनीटरिंग‚ समन्वय तथा कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • देश में सीसीटीएनएस परियोजना लगभग 1500 पुलिस स्टेशनों तथा देश के 6000 उच्च कार्यालयों को जोड़ती है।
  • एनसीआरबी ने सीसीटीएनएस परियोजना के अंतर्गत ‘नेशनल डिजिटल पुलिस पोर्टल’ को 21 अगस्त‚ 2017 को आरंभ किया था।
  • यह मास्टर पुलिस पोर्टल है‚ जो नागरिकों के साथ-साथ पुलिस कर्मियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करता है।
  • ब्यूरो द्वारा ‘भारत में अपराध’ (Crime in India) रिपोर्ट का प्रथम संस्करण वर्ष 1953 में एवं 65वां संस्करण वर्ष 2018 में प्रस्तुत किया गया था। इसी क्रम में नवीनतम ‘भारत में अपराध रिपोर्ट’ जारी किया गया।
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 29 सितंबर‚ 2020 को एनसीआरबी ने ‘भारत में अपराध‚ 2019’ शीर्षक से रिपोर्ट को जारी किया‚ जो अपनी शृंखला में 66वां संस्करण है।
  • वर्ष 2019 के लिए समय पर पश्चिम बंगाल (राज्य) और कोलकाता (शहर) से डेटा प्राप्त नहीं होने के कारण‚ वर्ष 2018 के लिए प्रस्तुत डेटा का उपयोग राष्ट्रीय और शहरवार आंकड़ों पर पहुंचने के लिए किया गया है।
  • रिपोर्ट का प्रकाशन कैलेंडर वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर‚ 2019 को संदर्भित करता है। रिपोर्ट हेतु डाटा संग्रह प्रक्रिया राज्यों/संघ शासित राज्यों/केंद्रीय एजेंसियों से स्पष्टीकरण सहित जनवरी‚ 2019 में प्रारंभ हुई और जून‚ 2020 तक जारी रही।
  • अपराध परिदृश्य
  • इस रिपोर्ट के अनुसार‚ भारत में वर्ष 2019 में कुल 5156172 संज्ञेय अपराध (Cognizable Crimes) पंजीकृत किए गए। इसमें वर्ष 2018 की तुलना में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • देश में कुल 3225701 मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) के अंतर्गत पंजीकृत किए गए‚ जिसमें सर्वाधिक उत्तर प्रदेश (10.9%)‚ महाराष्ट्र (10.6%) एवं मध्य प्रदेश (7.6%) में पंजीकृत किए गए।
  • इस दौरान 19 मेट्रोपोलिस या महानगरीय शहरों में कुल 860960 मामले संज्ञेय अपराध के पंजीकृत किए गए।
  • महानगरीय शहरों में कुल 604897 मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) और कुल 256063 मामले विशेष और स्थानीय कानूनों (SLL) के अंतर्गत पंजीकृत किए गए।
  • महानगरीय शहरों में पंजीकृत मामलों में वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
  • महिलाओं के विरुद्ध अपराध
  • वर्ष 2019 में इन अपराधों में वर्ष 2018 की तुलना में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
  • महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दर : सर्वाधिक पंजीकृत मामले राज्यों में

1. असम — 177.8  प्रति लाख जनसंख्या पर
2. राजस्थान — 110.4 प्रति लाख जनसंख्या पर
3. हरियाणा — 108.5 प्रति लाख जनसंख्या पर

  • बलात्कार
  • प्रतिदिन की औसत के अनुसार‚ देश में 87 मामले पंजीकृत होते हैं।

1. राजस्थान — 5997 मामले
2. उत्तर प्रदेश — 3065 मामले
3. मध्य प्रदेश — 2485 मामले

  • बालिकाओं के विरुद्ध अपराध पाक्सो (POCSO) अधिनियम के अंतर्गत  
  • सर्वाधिक पंजीकृत मामले राज्यों में

1. उत्तर प्रदेश — 7444 मामले
2. महाराष्ट्र — 6402 मामले
3. मध्य प्रदेश — 6053 मामले

  • अनुसूचित जातियों/जनजातियों के विरुद्ध अपराध
  • उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक मामले 11829 पंजीकृत हुए‚ जो संपूर्ण देश का 25.8 प्रतिशत है।
  • राजस्थान अनुसूचित जाति की महिलाओं के बलात्कार के मामले में शीर्ष स्थान पर है। द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर क्रमश: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश हैं।
  • अनुसूचित जाति की महिलाओं के बलात्कार की दर देश में सर्वाधिक केरल (4.6 प्रति लाख) में है।
  • अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अपराध में शीर्ष राज्य : (1) मध्य प्रदेश‚ (2) राजस्थान एवं (3) ओडिशा।
  • हत्या
  • वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में हत्या के मामलों में 0.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
  • अपहरण
  • वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में अपहरण के मामलों में 0.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
  • आत्महत्या
  • वर्ष 2019 में कुल 139123 मामले दर्ज किए गए।
  • कुल 97613 पुरुषों ने आत्महत्या की। इसमें सर्वाधिक आत्महत्या 29092 दैनिक मजदूरों ने की है।
  • वृद्धों के विरुद्ध अपराध
  • वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में 13.7 प्रतिशत अधिक मामले पंजीकृत हुए।
  • भ्रष्टाचार
  • वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में 2.8 प्रतिशत अधिक मामले पंजीकृत हुए।
  • साइबर अपराध
  • वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में 63.5 प्रतिशत अधिक मामले पंजीकृत हुए।
  • पिछले पांच वर्षों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अपराध की दर में तीव्रता से वृद्धि हुई है।
  • पिछले वर्ष के आंकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट में हत्या और अपहरण के मामलों में कमी देखने को मिली है।

सं.  विभव कृष्ण पाण्डेय

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