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ईरान का पहला सैन्य उपग्रह ‘नूर’

Iran's first military satellite 'Noor'
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 22 अप्रैल‚ 2020 को ईरान ने अपने पहले सैन्य उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया।
  • इस उपग्रह को ‘नूर’ (Noor) नाम दिया गया है‚ जिसका अर्थ ‘प्रकाश’ (Light) होता है।
  • उपग्रह को ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (Islamic Revolutionary Guard Corps-IRGC) द्वारा प्रक्षेपित (Launch) किया गया है।
  • ज्ञात हो कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ईरानी सशस्त्र बलों की एक शाखा है। इसकी स्थापना 22 अप्रैल‚ 1979 को अयातुल्ला रूहुल्लाह खुमैनी के आदेश से ईरानी क्रांति के बाद हुई थी।
  • यह प्रक्षेपण अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते के विफल होने और जनवरी‚ 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मृत्यु के चलते दोनों के बीच बढ़ते तनाव के बीच किया गया है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • ईरान ने यह सफलता हाल के महीनों में किए गए कई असफल प्रयासों के बाद प्राप्त की है।
  • नूर उपग्रह को दो चरणों में संचालित रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया है। इसमें ठोस और तरल ईंधन का प्रयोग किया गया है।
  • इस उपग्रह को ईरान के मध्य में स्थित मरकजी (Markazi) रेगिस्तान से प्रक्षेपित किया गया है।
  • उपग्रह को पृथ्वी की सतह से 425 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया गया है।
  • ज्ञातव्य है कि ईरान ने वर्ष 2009 में अपना पहला नागरिक उपग्रह प्रक्षेपित किया था।
  • ओफेक-16
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 6 जुलाई‚ 2020 को इस्राइल ने अपने जासूसी उपग्रह ‘ओफेक-16’ (OFEK-16) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
  • यह उपग्रह इस्राइल के ‘शेविट’ (Shavit) रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया।
  • इस उपग्रह को मध्य इस्राइल में स्थित पामहिम एयरबेस (Palmahim Airbase) लांच पैड (Launch Pad) से प्रक्षेपित किया गया।
  • इस परियोजना की मुख्य संचालक सरकार के स्वामित्व वाली इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज थी।
  • इस उपग्रह का पेलोड (Payload) इस्राइल की ही एयरोस्पेस और रक्षा कंपनी एलबिट सिस्टम (Elbit Systems) द्वारा विकसित किया गया था।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • ओफेक-16 उपग्रह वर्ष 2016 में प्रक्षेपित ओफेक-11 का ही उन्नत संस्करण है।
  • ओफेक-16 एलबिट द्वारा निर्मित इलेक्ट्रो-ऑप्टिक हाई रिजोल्यूशन (Electro-optic High Resolution) कैमरे से युक्त है।
  • यह 600 किमी. ऊंचाई से 50 सेमी. रिजोल्यूशन पर 15 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी कर सकता है।
  • इस्राइल द्वारा प्रक्षेपित अन्य निगरानी उपग्रहों की भांति इसका उपयोग भी इस्राइल की सीमा के आस-पास दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा।
  • ज्ञात हो कि इस्राइल ने अपना पहला उपग्रह ‘ओफेक-11’ को वर्ष 1988 में प्रक्षेपित किया था।
  • दक्षिण कोरिया का पहला सैन्य उपग्रह ‘अनासिस-II’
  • 21 जुलाई‚ 2020 को दक्षिण कोरिया ने अपना पहला सैन्य उपग्रह अनासिस-II (Anasis-II) का प्रक्षेपण किया।
  • इसे अमेरिका की निजी कंपनी स्पेसएक्स (Space-X) के फाल्कन-9 (Falcon-9) रॉकेट द्वारा केनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) फ्लोरिडा से प्रक्षेपित किया गया।
  • अनासिस-II पूरी तरह से दक्षिण कोरियाई सैन्य उपयोग के लिए समर्पित है।
  • इसके पूर्व प्रक्षेपित अनासिस-I असैन्य और सैन्य दोनों के उपयोग के लिए था।
  • इस उपग्रह को 36000 किमी. ऊंचाई पर पृथ्वी के भू-स्थिर कक्षा में प्रक्षेपित किया गया है।
  • उपग्रह के विकास के लिए तकनीकी सहायता दक्षिण कोरिया और अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Mortin) के समझौते के तहत एयरबस (Airbus) द्वारा प्रदान की गई है।
  • यह उपग्रह एयरबस के यूरोस्टार E-3000 (Eurostar E-3000) उपग्रह प्लेटफॉर्म पर आधारित है तथा यह व्यापक क्षेत्र में सुरक्षित संचार प्रदान करेगा।
  • ज्ञात हो कि पूर्ण रूप से सैन्य उपयोग के लिए समर्पित उपग्रह प्रक्षेपित करने वाला दक्षिण कोरिया विश्व का 10वां देश है।

संविजय सिंह