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आंध्र प्रदेश में विधान परिषद के उत्सादन के लिए संकल्प पारित

Resolution passed for abolition of Legislative Council in Andhra Pradesh
  • वर्तमान संदर्भ
  • आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा 27 जनवरी‚ 2020 को राज्य की विधान परिषद के उत्सादन (समाप्ति) के लिए एक संकल्प (Resolution) पारित किया गया है।
  • पृष्ठभूमि
  • आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा उठाया गया उपर्युक्त कदम YSR कांग्रेस सरकार द्वारा विधानसभा में पारित दो विधेयको क्रमश: – आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक‚ 2020 (AP Decentralisation and Inclusive Development of All Regions Bill, 2020 : APDIDAR) तथा आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण विधेयक‚ 2020 (AP Capital Region Development Authority : APCRDA) को विधान परिषद द्वारा चयन समिति को भेज दिए जाने के परिप्रेक्ष्य में उठाया गया है।
  • सरकार का कहना है कि APDIDAR विधेयक द्वारा राज्य के समग्र विकास के लिए तीन राजधानियों क्रमश: – अमरावती (विधायी)‚ विशाखापत्तनम (कार्यकारी) तथा कुर्नूल (न्यायिक) बनाने का प्रस्ताव किया गया है तथा APCRDA विधेयक द्वारा राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए एक प्राधिकरण बनाया जाना है।
  • सरकार का कहना है कि इन विधेयको को TDP सदस्यों के बहुमत वाले विधान परिषद के सदन ने रोककर राज्य के विकास को बाधित करने का कार्य किया है।
  • गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में विधान परिषद की स्थापना वर्ष 1958 में की गई थी।
  • किंतु वर्ष 1985 में इसे समाप्त कर दिया गया था।
  • पुन: वर्ष 2007 में राज्य में विधान परिषद का गठन किया गया था।
  • राज्य विधान परिषद
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत राज्यों में विधान परिषद के गठन तथा उत्सादन (समाप्ति) से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। विधान परिषद के गठन या उत्सादन की अंतिम शक्ति भारत की संसद की प्राप्त है। किंतु इसके लिए सर्वप्रथम
  • राज्य की विधान सभा के समस्त सदस्यों के बहुमत (आधे से अधिक) तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प (Resolution) पारित किया जाता है।
  • तत्पश्चात‚ ऐसे संकल्प को संसद के पास भेजा जाता है जो इसके गठन या उत्सादन के लिए अंतिम निर्णय लेती है।
  • विदित हो कि उपर्युक्त प्रयोजनों के लिए किए गए संविधान संशोधन अनुच्छेद 368 के अधीन संशोधन नहीं समझे जाएंगे।
  • विधान परिषद‚ राज्य सभा की भांति एक स्थायी सदन है। इसके 1/3 सदस्य प्रति दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
  • विधान परिषद सदस्यों की संख्या उस राज्य की विधानसभा के समस्त सदस्यों की संख्या के 1/3 से अधिक नहीं होनी चाहिए‚ किंतु यह किसी भी दशा में 40 से कम भी नहीं होनी चाहिए।
  • विधान परिषद की आवश्यकता क्यों?
  • विधान परिषदों की उपयोगिता दो कारणों से समीचीन है प्रथम‚ यह विधानसभा द्वारा जल्दबाजी/उतावलेपन में लिए गए निर्णयों को विलंबित कर उन पर और अधिक विचार करने का मौका देती है। द्वितीय‚ ऐसे लोग जो चुनावी राजनीति की प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर सकते‚ उनके ज्ञान और अनुभव का उपयोग विधि निर्माण में किया जा सके।
  • विधान परिषद सदस्यों की अर्हता एवं विधान परिषद की संरचना
  • विधान परिषद में निर्वाचित होने के लिए किसी सदस्य को-

  (i)  भारत का नागरिक होना चाहिए।

   (ii) निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष तीसरी अनुसूची में दिए गए प्रारूप के अनुसार शपथ ग्रहण करना चाहिए।

  (iii) उसकी आयु 30 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

  (iv) संसद द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के अधीन निरर्हित नहीं होना चाहिए।

  • विधान परिषद की संरचना निम्नलिखित प्रकार से निर्मित होगी‚ जो आनुपातिक पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा निर्वाचित होंगे।

      (i)  1/3 सदस्यों का चुनाव राज्य के विधानसभा सदस्यों द्वारा ऐसे लोगों में से किया जाएगा‚ जो विधानसभा के सदस्य नहीं हैं।

   (ii) 1/3 सदस्यों का चुनाव नगरपालिका‚ जिला बोर्डों व अन्य स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

   (iii) 1/12 सदस्यों का चुनाव ऐसे स्नातकों में से किया जाएगा‚ जो कम-से-कम 3 वर्ष से स्नातक उपाधि प्राप्त हों।

   (iv) 1/12 सदस्यों का चुनाव राज्य की माध्यमिक पाठशालाओं के ऐसे सदस्यों में से होगा जो कम-से-कम 3 वर्ष से लगे हुए हैं।

   (v) 1/6 सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा साहित्य‚ कला‚ विज्ञान‚ सहकारी आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों में से नाम-निर्देशन द्वारा किए जाएंगे।

  • विधान परिषद के विपक्ष में तर्क
  • विधान परिषद के विपक्ष में मुख्य रूप से तीन तर्क दिए जाते हैं –

      (i)  यह ऐसे सदस्यों का ऐशगाह (Parkland) है‚ जो चुनाव हार जाते हैं।

   (ii) इनका उपयोग प्रगतिशील विधेयकों को रोकने के लिए किया जाता है।

   (iii) यह राज्य की वित्त व्यवस्था पर अतिरिक्त भार है। अत: राज्य के करदाताओं के धन का अपव्यय इस सदन द्वारा किया जाता है।

विधान परिषद वाले अन्य राज्य

 

राज्य

सदस्य संख्या

1.  उत्तर प्रदेश

100

2. बिहार

75

3. कर्नाटक

75

4. आंध्र प्रदेश

58

5. महाराष्ट्र

78

6. तेलंगाना

40

सं.  अमित त्रिपाठी