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अफ्रीकी जंगली पोलियो विषाणु का उन्मूलन

Eradication of African wild polio virus
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • हाल ही में अफ्रीका महाद्वीप को ‘जंगली पोलियो विषाणु’ (Wild Polio Virus) से पूरी तरह मुक्त घोषित किया गया है।
  • यह घोषणा ‘अफ्रीका क्षेत्रीय प्रमाणन आयोग’ (Africa Regional Certification Commission) के द्वारा की गई है।
  • नाइजीरिया अंतिम अफ्रीकी देश है‚ जिसे ‘जंगली पोलियो विषाणु’ से मुक्त घोषित किया गया है।
  • अब अफ्रीका के केवल 16 देश टीका व्युत्पन्न बहुपद प्रकोपों से प्रभावित हैं‚ जिनकी पहचान कुल 177 की संख्या में की गई है।
  • पृष्ठभूमि
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार‚ यह दूसरी बार है जब अफ्रीका में किसी विषाणु (वायरस) को खत्म किया गया है।
  • अफ्रीका में चार दशक पूर्व चेचक को पूरी तरह से खत्म किया गया था।
  • वर्ष 1996 में अफ्रीका महाद्वीप के अलग-अलग देशों में लगभग 75000 बच्चे पोलियो से प्रभावित हुए।
  • तत्पश्चात दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन राष्ट्रपति ‘नेल्सन मंडेला’ के द्वारा एक अभियान की शुरुआत की गई‚ जिसे ‘किक पोलियो आउट ऑफ अफ्रीका’ (Kick Polio out of Africa) नाम दिया गया।
  • इस अभियान को ‘अंतरराष्ट्रीय रोटरी’ (International Rotary) व अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा समर्थन भी मिला।
  • इस अभियान को गति देने के लिए ‘वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल’ (Global Polio Eradication Initiative) के तहत प्रति वर्ष लगभग 20 लाख स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के द्वारा लगभग 22 करोड़ बच्चों के टीकाकरण का कार्य किया गया।
  • क्या है ‘जंगली पोलियो विषाणु’?
  • पोलियो एक विषाणुजन्य रोग है‚ जो अधिकांशत: बच्चों को होता है‚ यद्यपि यह बीमारी किसी को भी हो सकती है।
  • पोलियो के विषाणु का संचरण संक्रमण के माध्यम से होता है।
  • इसका संक्रमण मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में मल-मौखिक मार्ग के द्वारा होता है।
  • यह पानी या मल पदार्थ‚ अस्वच्छ भोजन तथा जल के संक्रमण से हो सकता है।
  • यह विषाणु मानव शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है‚ जिससे विकलांगता आ सकती है।
  • उन्मूलन के लिए उठाए गए कदम
  • अफ्रीका में ‘जंगली पोलियो विषाणु’ (Wild Polio Virus) से निजात पाने के लिए एक पहल की शुरुआत की गई।
  • इनमें छ: प्रमुख भागीदार हैं- विश्व स्वास्थ्य संगठन‚ रोटरी इंटरनेशनल‚ रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Center for Disease Control and Prevention), यूनीसेफ (UNICEF), बिल व मिलिंडा गेट्स के साथ राष्ट्रीय सरकारें।
  • ‘जंगली पोलियो विषाणु’ के उन्मूलन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा वर्ष 1988 में ‘वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल’ (Global Polio Eradication Initiative) की शुरुआत की गई।
  • अफ्रीका क्षेत्रीय प्रमाणन आयोग (Africa Regional Certification Commission)
  • इस आयोग का गठन वर्ष 1998 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा किया गया।
  • इसके सदस्यों की संख्या 16 है।
  • यह एक स्वतंत्र निकाय है‚ जो चिह्नित क्षेत्रों में पोलियो उन्मूलन को प्रमाणित करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि उस क्षेत्र में पोलियो का उन्मूलन हो चुका है।
  • 25 अगस्त‚ 2020 को इसी आयोग ने घोषणा की कि अफ्रीका महाद्वीप में ‘जंगली पोलियो विषाणु’ को समाप्त कर दिया गया है।
  • प्रमाणन के मानदंड
  • किसी क्षेत्र की ‘जंगली पोलियो विषाणु’ के उन्मूलन की प्रमाणिकता के लिए उस क्षेत्र में कम-से-कम चार वर्ष तक ‘जंगली पोलियो विषाणु’ के कोई नए मामले न आए हों।
  • अफ्रीका क्षेत्रीय प्रमाणन आयोग के अनुसार‚ अफ्रीका महाद्वीप में आखिरी मामला नाइजीरिया के पूर्वी प्रांत ‘बोर्नो’ में 21 अगस्त‚ 2016 को पाया गया था।
  • भारत में ‘जंगली पोलियो विषाणु’ की स्थिति
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा भारत को आधिकारिक तौर पर 27 मार्च‚ 2014 को दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र के बाकी हिस्सों के साथ पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया।
  • भारत सरकार ने वर्ष 1995 में विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अपनाई गई पोलियो उन्मूलन की वैश्विक पहल के संकल्प के तहत ‘पल्स पोलियो कार्यक्रम’ की शुरुआत की।
  • कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • यह बीमारी अब केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ही पाई जाती है।
  • अफ्रीका की 95 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या अब पूर्ण रूप से प्रतिरक्षित हो चुकी है‚ जिसमें महाद्वीप के कुल 47 देश शामिल हैं।

सं. अभय पाण्डेय