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अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन

International Religious Freedom Coalition
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • अमेरिका के राज्य सचिव (Secretary of State) माइक पोंपियो ने 5 फरवरी, 2020 को ‘अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन’ लांच किया।
  • यह कदम अमेरिका ने धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ाने हेतु दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद उठाया।
  • पृष्ठभूमि
  • 16-18 जुलाई, 2019 के मध्य अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया था।
  • इस बैठक की मेजबानी अमेरिका के राज्य सचिव माइक पोंपियो ने की थी।
  • इस बैठक के दौरान माइक पोंपियो ने 18 जुलाई, 2019 को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन की घोषणा की थी।
  • धार्मिक स्वतंत्रता
  • किसी व्यक्ति का अपनी अंतरात्मा के आधार पर किसी धार्मिक विचारधारा को मानना या न मानना तथा अपनी अंतरात्मा के अनुसार इस विश्वास को खुलकर, शांतिपूर्ण और बिना डर के प्रयोग करना ही धार्मिक स्वतंत्रता है।
  • धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता एक व्यापक स्वतंत्रता है, जिसमें विचार, विवेक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निहित है।
  • अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन का उद्देश्य
  • अमेरिका की विदेश नीति के मूल उद्देश्य के रूप में धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना।
  • विश्वभर में धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव की निगरानी करना।
  • निगरानी के साथ विश्व के देशों और क्षेत्रों में सिफारिश करना और नीतियां कार्यान्वित करना, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिले।
  • धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और नीतियों का विकास करना।
  • धार्मिक उन्माद, धार्मिक आतंकवाद कम करना और धार्मिक अल्पसंख्यकों जैसे-इराक में यजीदी, पाकिस्तान में हिंदू, उत्तर-पूर्व नाइजीरिया में ईसाई एवं म्यांमार में मुस्लिम को धार्मिक शोषण से संरक्षित करना।
  • गठबंधन के कार्य सिद्धांत की घोषणा
  • गठबंधन की स्थापना के साथ ही 5 फरवरी, 2020 को इसके कार्य सिद्धांतों की घोषणा की गई।
  • गठबंधन की प्रतिबद्धता
  • गठबंधन के सदस्य सामान्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कानूनों विशेष रूप से नागरिक तथा राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा के तहत अपने दायित्वों को बनाए रखने हेतु प्रतिबद्ध हैं।
  • सभी सदस्य पूर्ण क्षेत्रीय वचनबद्धता सहित एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • गठबंधन के सदस्य परामर्शदाता, समन्वित होने के लिए स्वैच्छिक रूप से प्रतिबद्ध हैं।
  • धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में आंतरिक-बाह्य समन्वय का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने और इसके पूर्ण उपभोग को सुनिश्चित कराने हेतु अपरिहार्य अन्य मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए मानवाधिकार आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • गठबंधन के कार्य क्षेत्र
  • अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन द्वारा निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाएगी-
  • ऐसे धार्मिक स्थलों, व्यक्तियों की निंदा जो धार्मिक हिंसा, आतंकवाद को बढ़ाते हैं, साथ ही धार्मिक हिंसा करने वाले अपराधियों को दंडित किया जाएगा।
  • वर्ष 1981 के संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र में उल्लिखित अधिकारों का हनन, निंदा, कानूनों के उपयोग तथा सरकारी नीतियों व कार्यक्रमों में धार्मिक आधार पर भेद-भाव से शोषितों का संरक्षण किया जाएगा।
  • किसी भी धर्म या विचारधारा को मानने या न मानने के अधिकार का संरक्षण और ऐसे पीड़ितों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा।
  • विविधता, सहिष्णुता और समावेशी विकास प्रक्रिया को बढ़ावा देने के साथ धार्मिक स्थलों का हिंसा से संरक्षण तथा धार्मिक स्वतंत्रता और अन्य प्रासंगिक मानवाधिकारों के संबंध में साक्षरता को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • अन्य संभावित क्षेत्र
  • धार्मिक शोषण से प्रभावित व्यक्तियों और समुदायों की निगरानी, रिपोर्टिंग और सूचना का आदान-प्रदान करने के साथ ही संयुक्त या समन्वित द्विपक्षीय कार्यवाही और कूटनीति।
  • समस्याओं के समाधान के लिए संवाद को बढ़ावा देना साथ ही उनके निवारण, पुनर्वास और अन्य कार्यों द्वारा पीड़ितों की सहायता और बहुपक्षीय मंचों द्वारा समन्वित कार्रवाई।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता गठबंधन में अमेरिका समेत 27 सदस्य देश शामिल हैं।
  • अमेरिका, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, ग्रीस, इस्राइल, इंग्लैंड, यूक्रेन आदि प्रमुख देश इस गठबंधन के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं।
  • यह समान विचारधारा वाले राष्ट्रों का समूह है, जो ताकतवर राष्ट्रों को धार्मिक उन्माद और धार्मिक आतंकवाद से पीड़ित व्यक्तियों की संरक्षा के लिए एकत्र करता है।
  • साथ ही यह गठबंधन धार्मिक अपराधियों को दंडित करने की वकालत करता है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम निर्मित किया गया था।
  • यह अधिनियम ऐसे देशों में धार्मिक स्वतंत्रता को अमेरिका की विदेश नीति के रूप में निर्धारित करता है, जहां धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है।
  • यह अधिनियम धार्मिक आधार पर पीड़ित व्यक्तियों की ओर से धार्मिक स्वतंत्रता की वकालत करता है।
  • यह अधिनियम अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर आयोग के गठन का प्रावधान करता है।
  • अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग
  • इस आयोग का गठन वर्ष 1998 में किया गया।
  • यह अमेरिका का एक द्विपक्षीय सरकारी आयोग है।
  • यह धर्म या विश्वास के सार्वजनिक अधिकारों की स्वतंत्रता के लिए समर्पित विश्व में अपनी तरह का पहला आयोग है।
  • आयोग धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की परिस्थितियों और तथ्यों की समीक्षा करता है तथा अपनी नीतिगत सिफारिशें राष्ट्रपति, राज्य सचिव और कांग्रेस को प्रेषित करता है।
  • वर्ष 1998 के अधिनियम द्वारा अमेरिका में राज्य विभाग (U.S. State Department) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की स्थापना की गई है।
  • यह कार्यालय विश्व के प्रत्येक देश में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की समीक्षा करता है तथा धार्मिक स्वतंत्रता के उन्नयन के लिए प्रयास करता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • अमेरिका ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में उल्लिखित अधिकारों के संरक्षण के लिए अनेक कदम उठाए हैं।
  • धार्मिक स्वतंत्रता के उन्नयन हेतु मंत्रिस्तरीय बैठक
  • इस हेतु अमेरिका का राज्य विभाग धार्मिक स्वतंत्रता के उन्नयन के लिए बैठक (Ministerial to Advance Religious Freedom) का आयोजन करता है।
  • इस बैठक में विश्व के सभी देशों और क्षेत्रों में धार्मिक स्वतंत्रता के हनन को रोकने और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के संरक्षण पर कार्य करने पर बल दिया जाता है।
  • इस बैठक में विश्व के सभी प्रमुख देशों के प्रतिनिधिमंडल आमंत्रित किए जाते हैं, जो धार्मिक स्वतंत्रता के उन्नयन के लिए प्रयासरत हैं या कार्य करना चाहते हैं।
  • वर्ष 2018 में 24-26 जुलाई के मध्य हुए धार्मिक स्वतंत्रता के उन्नयन हेतु प्रथम बैठक का आयोजन वाशिंगटन में किया गया था।
  • धार्मिक स्वतंत्रता के उन्नयन हेतु द्वितीय बैठक का आयोजन 16-18 जुलाई, 2019 के बीच वाशिंगटन में आयोजित की गई थी।
  • वर्ष 2019 में इस बैठक में 1000 से अधिक सामाजिक सदस्य और धार्मिक गुरु तथा 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया था।
  • बैठक में धार्मिक स्वतंत्रता के विभिन्न आयामों पर चर्चा के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता के उन्नयन हेतु एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की आवश्यकता महसूस की गई।

सं. राहुल त्रिपाठी