Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

अंडमान-निकोबार कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट

Andaman-Nicobar Connectivity Project
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 10 अगस्त‚ 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लिए पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल (Optical Fibre Cable : OFC) परियोजना का शुभारंभ किया गया।
  • ध्यातव्य है कि इस परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 30 दिसंबर‚ 2018 को पोर्ट ब्लेयर में रखी गई थी।
  • इस परियोजना के तहत समुद्र के भीतर करीब 2300 किलोमीटर तक केबल बिछाया गया है।
  • यह सेवा अंडमान-निकोबार के प्रमुख द्वीपों यथा-चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर‚ पोर्ट ब्लेयर से छोटा अंडमान और पोर्ट ब्लेयर से स्वराज द्वीप को आपस में जोड़ने के लिए की गई है।
  • उद्देश्य
  • इस परियोजना का उद्देश्य अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लोगों को बेहतर और सस्ती इंटरनेट सेवा प्रदान करना है।
  • इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों और द्वीपीय राज्यों को विकसित किया जाएगा।
  • इसका सबसे बड़ा लाभ उन पर्यटकों को मिलेगा‚ जो अंडमान-निकोबार पहुंचने पर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट के अभाव में अन्य लोगों से निरंतर संपर्क से कट जाते थे।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • यह परियोजना अंडमान-निकोबार को दुनिया के अन्य देशों से जोड़ने वाले जीवन को सुगम बनाने (Ease of Living) के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
  • ध्यातव्य है कि हिंद महासागर और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह व्यापार और रणनीतिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं।
  • भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
  • अंडमान-निकोबार के 12 द्वीपों में इस परियोजना का विस्तार जारी है‚ जिसके तहत उत्तर और मध्य अंडमान की सड़कों को जोड़ने के लिए दो प्रमुख पुलों का निर्माण किया जा रहा है‚ साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-4 (NH-4) पर निर्माण कार्य जारी है।
  • गौरतलब है कि एनएच-4 पश्चिमी भारत को दक्षिणी भारत से जोड़ने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग है‚ जो महाराष्ट्र‚ कर्नाटक‚ आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों से होकर गुजरता है।
  • अंडमान-निकोबार को बंदरगाह संचालन विकास के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है‚ जो 21वीं सदी के व्यापार को बढ़ावा देने में सक्षम होगा।
  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) का तेजी से विकास किया जा रहा है।
  • यहां नीली अर्थव्यवस्था से तात्पर्य आर्थिक विकास के लिए महासागरीय संसाधनों जैसे- मत्स्यपालन‚ समुद्री शैवालों की खेती आदि के स्थायी उपयोग से है।
  • ‘एक्ट ईस्ट’ नीति क्या है?
  • भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को पहले ‘लुक ईस्ट’ नीति के नाम से जाना जाता था‚ जिसे पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा वर्ष 1991 में शुरू किया गया था।
  • वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2014 में इसका नाम बदल कर ‘एक्ट ईस्ट’ (पूर्व की ओर देखो) नीति कर दिया गया।
  • इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग‚ सांस्कृतिक संबंध तथा रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
  • ओएफसी क्या है?
  • ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC : Optical Fiber Cable) के जरिए सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रकाश बिंदुओं के माध्यम से भेजा जाता है।
  • इस प्रणाली में प्रकाश का उपयोग होता है‚ न कि बिजली का। प्रकाश (Light) का उपयोग करके इसकी गति को बढ़ाया जा सकता है।
  • ओएफसी में दो लेयर यथा- पहली लेयर कोर और दूसरी लेयर क्लैडिंग होती है। उपयोग के हिसाब से लेयर को घटा अथवा बढ़ा सकते हैं।
  • ऑप्टिकल फाइबर सामान्य डाटा (Data) ट्रांसफर केबलों के मुकाबले महंगी होता है। इसकी सिक्योरिटी को आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता।
  • इसका इस्तेमाल हम इंटरनेट या टेलीकॉम सर्विस में करते हैं।
  • निष्कर्ष
  • वर्तमान और भविष्य के लिए अंडमान-निकोबार राज्य को ओएफसी के माध्यम से टेलीकॉम सेवा प्रदान करना‚ भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है। आज जब भारत आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है‚ ऐसे समय में पनडुब्बी केबल यहां के लोगों को सस्ती और बेहतर इंटरनेट सेवा तथा डिजिटल इंडिया के सभी लाभों विशेष रूप से ऑनलाइन शिक्षा‚ टेलीमेडिसिन‚ बैंकिंग प्रणाली‚ ऑनलाइन व्यापार में सुधार और पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेगी‚ साथ ही यहां के सभी द्वीप भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत की नई व्यापार रणनीति के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सं. अमित शुक्ला

One thought on “अंडमान-निकोबार कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट”

Comments are closed.