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अंटार्कटिका का तापमान पहली बार 20°C के पार पृष्ठभूमि

Antarctica's temperature first crosses 20 ° C
  • पृष्ठभूमि
  • धु्रव‚ पृथ्वी के सबसे ठंडे स्थानों में से एक है। धु्रवों पर वर्षभर बर्फ जमी रहती है‚ जिसके कारण इनको सफेद मरुस्थल भी कहा जाता है। धु्रवों का औसत तापमान लगभग -50°C रहता है।
  • धु्रवों पर भी वैश्विक तापन का असर पड़ रहा है‚ जिसके कारण ध्रुव भी लगातार गर्म हो रहे हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार‚ अंटार्कटिक मुख्य क्षेत्र का तापमान 0.05°C प्रति दशक की दर से बढ़ रहा है‚ जबकि पश्चिमी अंटार्कटिक क्षेत्र का तापमान 0.01°C प्रति दशक की दर से बढ़ रहा है।
  • जनवरी‚ 1982 में अंटार्कटिक क्षेत्र का तापमान 19.8°C रिकॉर्ड किया गया‚ जो कि सिग्नी द्वीप से लिया गया था। यह अभी तक का उच्चतम ज्ञात तापमान था।
  • ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण की वर्ष 2006 की रिपोर्ट के अनुसार‚ अंटार्कटिक प्रायद्वीप के पश्चिमी तट के मध्य और दक्षिणी हिस्से में लगभग 2.4 °C की वृद्धि हुई है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार‚ धु्रवों पर तापमान बढ़ने के कारण ध्रुवों के ग्लेशियरों के पिघलने की दर में वृद्धि हुई है।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • अंटार्कटिका में तापमान पहली बार 20°C को पार कर गया‚ शोधकर्ताओं द्वारा प्रायद्वीप के तटीय भाग पर स्थित सीमोर द्वीप (Seymore Island) पर अधिकतम तापमान 20.75°C दर्ज किया गया।
  • इससे पहले अंटार्कटिका प्रायद्वीप पर अधिकतम तापमान 6 फरवरी‚ 2020 को 18.4°C दर्ज किया गया था।
  • प्रमुख तथ्य
  • अर्जेंटीना के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सेवा के शोधकर्ताओं ने 9 फरवरी‚ 2020 को इस रिकॉर्ड को दर्ज किया। हालांकि यह केवल एक रीडिंग थी‚ दीर्घकालिक सेट का हिस्सा नहीं था।
  • संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के द्वारा WMO आर्काइव ऑफ वेदर एंड क्लाइमेट एक्सट्रीम समिति का गठन किया गया है‚ जो इन आंकड़ों को सत्यापित करेगी।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार‚ पिछले 50 वर्षों में अंटार्कटिक प्रायद्वीप का औसत तापमान लगभग 3°C तक बढ़ गया है तथा पश्चिमी तट के 87 प्रतिशत ग्लेशियर पिघलने शुरू हो गए हैं।
  • अंटार्कटिक क्षेत्र में जनवरी महीने का अभी तक का उच्चतम तापमान दर्ज किया गया है।
  • इसके अलावा जुलाई‚ 2019 में आर्कटिक क्षेत्र का उच्चतम तापमान 21°C रिकॉर्ड किया गया था।
  • तापमान बढ़ने का कारण
  • ध्रुवीय क्षेत्रों पर तापमान का बढ़ना वैश्विक तापन का ही परिणाम है। वैश्विक तापन का प्रमुख कारण मानवीय गतिविधियों द्वारा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन है।
  • ग्रीनहाउस गैसों में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड‚ मीथेन‚ नाइट्रस ऑक्साइड‚ ओजोन‚ क्लोफ्लोरोकार्बन गैसें शामिल हैं‚ जिनका उत्सर्जन मानवीय गतिविधियों‚ औद्योगिक क्रिया-कलापों‚ ऑटोमोबाइल आदि से होता है।
  • तापमान बढ़ने का प्रभाव
  • ध्रुवीय क्षेत्रों में तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की दर में वृद्धि दर्ज की गई है।
  • ग्लेशियरों के पिघलने के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि की संभावना है। एक अनुमान के मुताबिक अंटार्कटिक क्षेत्र की बर्फ पिघलने से समुद्र का जलस्तर लगभग 60 मीटर तक बढ़ने की संभावना है।
  • ग्लेशियरों के पिघलने के कारण सागरीय जलस्तर में वृद्धि होगी‚ जिससे तटीय क्षेत्र व द्वीप जलमग्न हो जाएंगे। इससे तटीय क्षेत्रों के निवासियों को प्रवसन का सामना करना पड़ सकता है।
  • समुद्री जलस्तर बढ़ने के कारण प्लैंकटन का विनाश होता है एवं प्रवाल भित्तियों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  • निष्कर्ष
  • धु्रवीय क्षेत्रों पर लगातार उच्च तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है‚ जो कि वैश्विक तापन का संकेतक है। विभिन्न प्रयासों के बावजूद ग्रीनहाउस उत्सर्जन में वृद्धि के साथ ही वैश्विक तापमान में भी वृद्धि दर्ज की गई है। अत: वैश्विक स्तर पर एक रणनीतिक कार्ययोजना के अंतर्गत प्रयास करने की आवश्यकता है।

सं.  ऋषभ मिश्रा