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USTR ‘विशेष 301’ रिपोर्ट, 2019

United States Trade Representative
  • 25 अप्रैल, 2019 को ‘संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि’ (United States Trade Representative) के कार्यालय द्वारा अपनी वार्षिक ‘विशेष 301’ (Special 301) रिपोर्ट जारी की गई।
  • ‘विशेष 301’ रिपोर्ट
  • ‘विशेष 301’ रिपोर्ट संयुक्त राज्य अमेरिका के ऐसे व्यापारिक भागीदारों को चिह्नित करती है, जो अपने देश में उचित एवं प्रभावी ढंग से बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण एवं उचित कार्यान्वयन करने में असक्षम रहे हैं।
  • इसके अतिरिक्त यह रिपोर्ट बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा पर निर्भर अमेरिकी (USA) अन्वेषकों एवं निर्माताओं को संबंधित देश के बाजारों तक पहुंच बनाने से इंकार करने वालों को भी चिह्नित करती है।
  • USTR ने इस रिपोर्ट में 2 निगरानी श्रेणियों के अंतर्गत कुल 36 देशों को चिह्नित किया है।
  • प्राथमिकता वाले निगरानी सूची (Priority Watch List) में कुल 11 देश-अल्जीरिया, अर्जेंटीना, चिली, चीन, भारत, इंडोनेशिया, कुवैत, रूस, सऊदी अरब, यूक्रेन एवं वेनेजुएला हैं।
  • द्वितीय श्रेणी, निगरानी सूची (Watch List) में 25 देश-बाराबडोस, बोलीविया, ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, कोस्टारिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, मिस्र, यूनान, ग्वाटेमाला, जमैका, लेबनान, मेक्सिको, पाकिस्तान, पराग्वे, पेरू, रोमानिया, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान एवं वियतनाम शामिल हैं।
  • इस रिपोर्ट में वैश्विक कुख्यात बाजारों की सूची (Notorious Market List) भी दी गई है।
  • इस सूची में 33 ऑनलाइन बाजारों और 25 भौतिक बाजारों पर प्रकाश डाला गया है, जो कि कॉपीराइट पाइरेसी एवं ट्रेडमार्क जालसाजी में संलग्न बाजारों की सूचना प्रदान करते हैं।
  • USTR द्वारा वर्ष 2019 की रिपोर्ट में भी भारत प्राथमिकता वाले निगरानी सूची में शामिल था।
  • वर्ष 2019 की रिपोर्ट में भारत में औषधि एवं कृषि रसायन क्षेत्रों में अनुचित वाणिज्यिक प्रयोग के रोकथाम हेतु प्रभावी तंत्र की कमी पाई गई।
  • साथ ही भारत में समग्र रूप से बौद्धिक संपदा का कार्यान्वयन अपर्याप्त पाया गया।
  • वहीं रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली स्थित टैंक रोड क्षेत्र तथा गफ्फार मार्केट क्षेत्र वैश्विक कुख्यात बाजारों की सूची (2018) में शामिल हैं।
  • बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Right) किसी अन्य संपदा अधिकार के समान होते हैं, परंतु इनका संबंध मस्तिष्क की रचनाओं जैसे आविष्कार, शैक्षणिक एवं कला संबंधी कार्य तथा वाणिज्य में प्रयुक्त होने वाले संकेतों, नामों एवं चित्रों के प्रयोग से है।
  • बौद्धिक संपदा दो श्रेणियों में विभक्त है-
  • औद्योगिक संपदा-इसके अंतर्गत आविष्कारों का पेटेंट, औद्योगिक डिजाइन एवं भौगोलिक संकेतक शामिल हैं।
  • कॉपीराइट-इसमें उपन्यास, कविताएं एवं नाटक आदि का लेखन कार्य, फिल्म संगीत एवं कला संबंधी कार्य (चित्रांकन, फोटोग्राफी, मूर्ति निर्माण) तथा वास्तुकला डिजाइन आदि शामिल हैं।
  • इन अधिकारों का मूल उद्देश्य किसी कार्य के पेटेंट, ट्रेडमार्क या कॉपीराइट करवाने वाले व्यक्ति को अपने कार्य से या किसी कार्य में किए गए धन निवेश के बदले में लाभान्वित करना है।
  • इन अधिकारों को मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 27 में सीमांकित किया गया है।
  • बौद्धिक संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन के अनेक कारण हैं-
  • प्रौद्योगिकी एवं संस्कृति के क्षेत्रों में नवीन कार्यों के निर्माण एवं आविष्कार की क्षमता, मानवता के विकास एवं कल्याण पर निर्भर करती है।
  • नवीन रचनाओं को प्रदान की जाने वाली कानूनी सुरक्षा, आगे के नवोन्मेष हेतु अतिरिक्त संसाधनों की प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करती है।
  • बौद्धिक संपदा के संवर्धन एवं संरक्षण से आर्थिक संवृद्धि को बल प्राप्त होता है एवं नवीन उद्योगों के साथ-साथ नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होते हैं।
  • एक सक्षम एवं न्यायसंगत बौद्धिक संपदा प्रणाली, सभी देशों को आर्थिक विकास एवं सामाजिक तथा सांस्कृतिक कल्याण हेतु, एक उत्प्रेरक के रूप में बौद्धिक संपदा के सामर्थ्य की पहचान करने में सहायता कर सकता है।
  • बौद्धिक संपदा प्रणाली आविष्कारकों के हितों एवं सार्वजनिक हित के मध्य एक संतुलन निर्मित करती है, जिससे रचनात्मकता एवं आविष्कारों हेतु एक उचित वातावरण का विकास किया जा सके।
  • बौद्धिक संपदा उपभोक्ताओं तक उचित एवं असली उत्पादों या सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करते हैं।
  • विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (World Intellectual Property Organization-WIPO) बौद्धिक संपदा सेवाओं, नीति, सूचना एवं सहयोग का वैश्विक मंच है। 192 सदस्यीय यह संगठन संयुक्त राष्ट्र की स्व-पोषित एजेंसी है।
  • इसका उद्देश्य एक संतुलित एवं प्रभावी अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रणाली के विकास का नेतृत्व करना है।
  • WIPO की स्थापना वर्ष 1967 में ‘WIPO Convention’ के अंतर्गत हुई थी, जिस पर स्टॉकहोम में 14 जुलाई, 1967 को हस्ताक्षर हुआ था।
  • WIPO का मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में है तथा वर्तमान में फ्रांसिस गुरी (Francis Gurry) इसके महानिदेशक हैं।

सं. ललिन्द्र कुमार