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G-77 की अध्यक्षता फिलिस्तीन को हस्तांतरित

G-77 presided over Palestine
  • G-77
  • G-77 अर्थात ‘ग्रुप ऑफ 77’ (The Group of 77) संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत विकासशील देशों का सर्वाधिक बृहद् अंतर-सरकारी संगठन है।
  • यह संगठन संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत दक्षिण के देशों को अपने सामूहिक आर्थिक हितों को व्यक्त करने एवं बढ़ावा देने तथा सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विषयों पर अपनी संयुक्त वार्ता क्षमता में वृद्धि करने हेतु साधन प्रदान करने के साथ-साथ विकास हेतु दक्षिण-दक्षिण सहयोग को भी प्रोत्साहन देता है।
  • स्थापना
  • G-77 की स्थापना 15 जून, 1964 को जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में आयोजित ‘व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (United Nations Conference on Trade and Development : UNCTAD) के प्रथम सत्र के अंत में जारी  ‘77 विकासशील देशों के संयुक्त घोषणा-पत्र’ द्वारा हुई थी।
  • इस घोषणा-पत्र पर 77 विकासशील देशों ने हस्ताक्षर किए थे।
  • G-77 की प्रथम मंत्रिस्तरीय बैठक 10-25 अक्टूबर, 1967 के मध्य अल्जीयर्स (अल्जीरिया) में आयोजित हुई थी।
  • हालांकि G-77 के सदस्यों की वर्तमान संख्या बढ़कर 134 तक पहुंच गई है, फिर भी इसके मूल नाम को इसके ऐतिहासिक महत्व के कारण कायम रखा गया है।
  • G-77 की संरचना
  • G-77 का अध्यक्ष समूह के प्रवक्ता के रूप में भी कार्य करता है।
  • G-77 की अध्यक्षता समूह की संगठनात्मक संरचना के अंतर्गत सर्वोच्च राजनीतिक निकाय है जो अफ्रीका, एशिया-प्रशांत तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरीबियन देशों में क्षेत्रीय आधार पर हस्तांतरित होती रहती है।
  • दक्षिण शिखर सम्मेलन (The South Summit) G-77 का सर्वोच्च निर्णय निकाय है।
  • प्रथम एवं द्वितीय शिखर सम्मेलन क्रमशः 10-14 अप्रैल, 2000 को हवाना (क्यूबा) तथा 12-16 जून, 2005 को दोहा (कतर) में आयोजित हुए थे।
  • G-77 देशों के विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के नियमित सत्र के प्रारंभ में संचालित की जाती है।
  • साथ ही समय-समय पर अंकटाड (UNCTAD) सत्र और UNIDO एवं यूनेस्को के सामान्य सम्मेलनों की तैयारी हेतु क्षेत्रीय मंत्रिस्तरीय बैठकें आयोजित की जाती हैं।
  • वित्तपोषण
  • G-77 की गतिविधियों को प्रथम दक्षिण शिखर सम्मेलन के प्रासंगिक निर्णयों के अनुसार, सदस्य राष्ट्रों द्वारा योगदान के माध्यम से वित्तपोषित किया जाता है।
  • कार्य-कलाप
  • G-77, संयुक्त राष्ट्र महासभा एवं इसकी समितियों के साथ-साथ विभिन्न संयुक्त राष्ट्र निकायों एवं विशिष्ट एजेंसियों में संकल्प एवं निर्णयों को प्रवर्तित करने के अतिरिक्त विकास के मुद्दों पर संयुक्त घोषणाओं, एक्शन कार्यक्रमों एवं अनुबंधों को प्रस्तुत करता है।
  • G-77, संयुक्त राष्ट्र महासभा की विभिन्न मुख्य समितियों, ECOSOC एवं अन्य सहायक निकायों में वक्तव्य देता है तथा संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित प्रमुख सम्मेलनों एवं अन्य बैठकों में संकल्पों तथा निर्णयों को प्रायोजित करता है। यह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग एवं विकास के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार की दिशा में भी कार्य करता है।
  • वर्तमान संदर्भ
  • 15 जनवरी, 2019 को न्यूयॉर्क में आयोजित वार्षिक समारोह में वर्ष 2018 के अध्यक्ष मिस्र द्वारा वर्ष 2019 हेतु G-77 की अध्यक्षता फिलिस्तीन को हस्तांतरित की गई।
  • फिलिस्तीन को G-77 की अध्यक्षता मिस्र के विदेश मंत्री समेह शुकरी द्वारा सौंपी गई।
  • इस अवसर पर फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास, संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पीनोसा, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस आदि उपस्थित थे।
  • G-77 में फिलिस्तीन
  • G-77 की वर्ष 2019 की अध्यक्षता हेतु फिलिस्तीन का चुनाव करने का निर्णय सितंबर, 2018 में समूह के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा लिया गया था।
  • इसके एक माह पश्चात संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक संकल्प पारित कर फिलिस्तीन, जिसको संयुक्त राष्ट्र में एक गैर-सदस्य पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल है, को G-77 की अध्यक्षता अवधि के दौरान भूमिका निर्वाह हेतु अतिरिक्त विशेषाधिकार प्रदान किए गए।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने फिलिस्तीन को गैर-सदस्य पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किया था।
  • भारत का दृष्टिकोण
  • G-77 की अध्यक्षता फिलिस्तीन को हस्तांतरित होने पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने फिलिस्तीन को बधाई दी एवं कहा कि अधिक समानता एवं न्याय हेतु वैश्विक दक्षिण के अभियान में भारत उसके साथ खड़ा है।
  • ज्ञातव्य है कि भारत वर्ष 1970-71 एवं 1979-80 में G-77 का अध्यक्ष रह चुका है।
  • G-77 का महत्व
  • यह समूह प्रवासन संबंधी एक विस्तृत अनुबंध का निर्माण करने एवं गरीबी उन्मूलन हेतु एक विकास प्रणाली, राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम का कार्यान्वयन तथा विकास की स्थिति जानने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • यह समूह वर्ष 2019 में आयोजित होने वाले जलवायु सम्मेलन, महासभा के उच्चस्तरीय राजनीतिक फोरम, छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के सहायतार्थ ‘समोआ मार्ग’ (SAMOA Pathway) पर प्रगति की समीक्षा विषय पर उच्चस्तरीय बैठक एवं मार्च, 2019 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित होने वाले दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर द्वितीय उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में समूह के हितों की रक्षा हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सं. ललिन्द्र कुमार