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13वीं एन्युअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर), 2018

13th Annual Status of Education Report (effect), 2018

वर्तमान संदर्भ

  • 15 जनवरी, 2019 को 13वीं ‘एन्युअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट’ (असर), 2018 जारी हुआ। असर रिपोर्ट, 2018 भारत में प्राथमिक शिक्षा प्रणाली की दशा-दिशा पर आधारित है।

असर, 2018 : प्रमुख बिंदु

  • असर, 2018 में मुख्यतः ग्रामीण भारत में 3-16 वर्ष के बच्चों का स्कूल में नामांकन और 5-16 वर्ष के बच्चों की पढ़ने व गणित हल करने की बुनियादी क्षमताओं को शामिल किया गया।
  • असर, 2018 में भारत के 596 जिलों के 354944 परिवारों का और 3-16 वर्ष के 546527 बच्चों का सर्वेक्षण किया गया।
  • इस सर्वे में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE एक्ट) 2010 के अंतर्गत विद्यालय के लिए बाध्यकारी मानकों को भी शामिल किया गया।

स्कूली स्तर : नामांकन और उपस्थिति

  • समग्र नामांकन (आयु वर्ग 6-14 वर्ष) : 6-14 वर्ष के बच्चों का स्कूलों में नामांकन 95 प्रतिशत से अधिक पाया गया तथा पहली बार अनामांकित बच्चों (6-14 वर्ष) का औसत 2018 में 2.81 प्रतिशत हुआ है।
  • स्कूल से बाहर लड़कियां : वर्ष 2006 की तुलना में वर्ष 2018 का प्रतिशत 10.3 से कम होकर 4.1 प्रतिशत हो गया है।
  • प्राइवेट स्कूलों में नामांकन : 2006 से 2014 के मध्य प्राइवेट स्कूलों में जाने वाले बच्चों (6-14 वर्ष) की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई लेकिन वर्ष 2014 (30.8%) के बाद से 2018 (30.9%) तक स्थिरता की प्रवृत्ति दिखाई दी। पढ़ने की स्थिति : इसमें 5 से 16 वर्ष के बच्चों में अक्षर, शब्द, पहली कक्षा के सरल अनुच्छेद या कक्षा 2 के स्तर के पाठ को पढ़ने की क्षमता को परखा जाता है।
  • कक्षा 2 के स्तर के पाठ को पढ़ने में सक्षम कक्षा 3 के बच्चों का प्रतिशत 2013 (21.6%) के मुकाबले 2018 में बढ़कर 27.2 प्रतिशत हो गया है।
  • वर्ष 2016 (47.9%) के मुकाबले वर्ष 2018  में कक्षा 5 में नामांकित 50.3 प्रतिशत बच्चे कक्षा 2 के स्तर के पाठ को पढ़ सकते हैं।
  • कक्षा 8 में नामांकित देश के लगभग 73 प्रतिशत बच्चे कम-से-कम कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम हैं।

गणित हल करने का कौशल

  • घटाव के प्रश्नों को हल करने में सक्षम तीसरी कक्षा के बच्चों की संख्या पिछले दो वर्षों में अपरिवर्तनीय है।
  • भाग के सवाल हल कर पाने में सक्षम कक्षा 5 के बच्चों का प्रतिशत 2016 (26%) की तुलना में 2018 में बढ़कर 27.8 प्रतिशत हो गया है।
  • कक्षा 8 के बच्चों का बुनियादी गणित में सकल प्रदर्शन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव नहीं पाया गया।
  • पढ़ने व गणित हल करने की क्षमता के मामले में 14-16 वर्ष के बच्चों में लैंगिग असमानता देखी गई अर्थात राष्ट्रीय स्तर पर 14-16 वर्ष के लड़कों में से 50 प्रतिशत लड़के गणितीय भाग के प्रश्नों को ठीक-ठीक हल कर लेते हैं, वहीं सिर्फ 44 प्रतिशत लड़कियां ही ऐसा कर पाती है।

स्कूलों का अवलोकन

  • असर, 2018 के सर्वेक्षण में अखिल भारतीय स्तर पर 10 चयनित सरकारी स्कूलों में से 4 स्कूलों में बच्चों की नामांकन संख्या 60 से कम पाई गई।
  • छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति प्राथमिक व अन्य प्राथमिक दोनों तरह के विद्यालयों में क्रमशः 72 प्रतिशत व 85 प्रतिशत के आस-पास थी।
  • छात्र उपस्थिति के मामले में वर्ष 2016 की तुलना में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में सुधार पाया गया।
  • असर, 2018 के सर्वेक्षण में 10 में से 8 स्कूलों में बच्चों को स्कूल परिसर के भीतर या निकट खेल का मैदान उपलब्ध था।

असर (ASER)

  • असर (शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट – Annual Status of Education Report) एक वार्षिक सर्वेक्षण है, जो शिक्षा क्षेत्र की गैर-व्यवसायिक संस्था ‘प्रथम’ द्वारा कराया जाता है। यह भारत में बच्चों की स्कूली शिक्षा की स्थिति और बुनियादी शिक्षा के स्तर का वार्षिक सर्वेक्षण वर्ष 2005 से करती है।

शिक्षा का अधिकार

  • 86वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा अनुच्छेद 21(A) के अंतर्गत शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा प्रदान किया गया। जिसके क्रियान्वयन हेतु निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 लाया गया।
लेखकअनुज कुमार तिवारी