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स्वाधार गृह योजना

Swadhar Greh Scheme
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • जुलाई, 2019 में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने संबंधित मंत्रालय द्वारा लागू की गई ‘स्वाधार गृह योजना’ के विषय में राज्य सभा में एक लिखित जवाब में जानकारी दी।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश में स्वाधार गृह योजना के तहत ‘413’ आश्रय स्थल संचालित कर रहा है।
  • पृष्ठभूमि
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2001-02 में महिलाओं को शोषण से बचाने के लिए और उनके जीवन-यापन तथा पुनर्वास में मदद करने के लिए ‘स्वाधार योजना’ आरंभ की।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पूर्व के ‘स्वाधार’ और ‘अल्प ठहराव गृह योजना’ को समायोजित करके 1 जनवरी, 2016 से ‘स्वाधार गृह योजना’ लागू कर रहा है।
  • लक्ष्य
  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में 30 महिलाओं के लिए स्वाधार-गृह बनाए जाएंगे। आवश्यकता तथा अन्य महत्वपूर्ण मानदंडों के आधार पर स्वाधार गृह की क्षमता को बढ़ाकर 50 अथवा 100 भी किया जा सकता है।
  • बड़े शहरों तथा 40 लाख से अधिक आबादी वाले अन्य जिलों में अथवा महिलाओं के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता वाले जिलों में एक से अधिक स्वाधार गृह बनाए जा सकते हैं।
  • उद्देश्य
  • मुस्किल में फंसी तथा सामाजिक एवं आर्थिक सहारे से वंचित महिलाओं को आश्रय, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा तथा देखभाल संबंधी जरूरतें पूरी करना।
  • उन्हें कानूनी सहायता एवं सलाह देना तथा आर्थिक एवं भावनात्मक पुनर्वास करना।
  • उन्हें गरिमा एवं विश्वास के साथ नया जीवन आरंभ करने के योग्य बनाना।
  • लाभार्थी
  • 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकती हैं, जिनमें शामिल हैं-
  • परित्यक्ता तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से बेसहारा महिलाएं
  • प्राकृतिक आपदाओं से बची तथा जेल से रिहा हुई पारिवारिक, सामाजिक एवं आर्थिक सहारे से वंचित महिलाएं।
  • घरेलू हिंसा, पारिवारिक तनाव अथवा विवाद की शिकार महिलाएं
  • देह व्यापार के ठिकानों से अथवा शोषण वाले स्थानों से भागी अथवा बचाई गईं महिलाएं/लड़कियां अथवा एचआईवी/एड्स से प्रभावित महिलाएं, जिनके पास कोई सामाजिक एवं आर्थिक सहारा नहीं होता।
  • 18 वर्ष तक की लड़कियां और 8 वर्ष तक के लड़कों को अपनी माताओं के साथ स्वाधार गृह में रुकने दिया जाता है।
  • वितरण
  • ‘413’ स्वाधार गृहों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्रवार वितरण इस प्रकार है- आंध्र प्रदेश (29), अरुणाचल प्रदेश (1), असम (16), पंजाब (2), छत्तीसगढ़ (3), गुजरात (4), जम्मू-कश्मीर (3), झारखंड (3), कर्नाटक (51), केरल (7), मध्य प्रदेश (16), महाराष्ट्र (50), मणिपुर (23), मिजोरम (11), मेघालय (2), नगालैंड (2), ओडिशा (55), राजस्थान (6), सिक्किम (1), तमिलनाडु (35), तेलंगाना (19), त्रिपुरा (4), उत्तर प्रदेश (13), उत्तराखंड (4), पश्चिम बंगाल (48), अंडमान-निकोबार (1), चंडीगढ़ (1), दिल्ली (2), पुडुचेरी (1)।
  • विशेष
  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की मदद से देशभर में हिंसा प्रभावित महिलाओं के लिए निर्भया फ्रेमवर्क के एक भाग के रूप में वन स्टॉप सेंटर (OAC) की स्थापना की गई है।
  • हिंसा से प्रभावित महिलाओं को 24 घंटे आपातकालीन और गैर-आपातकालीन अनुक्रिया प्रदान करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने महिला हेल्पलाइन योजना के सार्वभौमीकरण को लागू किया है।

संअमर सिंह