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स्टेटस ऑफ टाइगर्स इन इंडिया-2018

Status of tigers in india-2018
  • बाघ (Tiger) एक ऐसा अद्वितीय पशु है, जो किसी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य एवं विविधता को बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका अदा करता है। ‘सबसे बड़ा परभक्षी’ (Top predator) होने के कारण यह पारिस्थितिकी संतुलन एवं खाद्य शृंखला को बनाए रखने में मदद करता है। पारंपरिक रूप से बाघों की आठ उप-प्रजातियों (Sub-species) की पहचान हुई है, जिनमें से तीन विलुप्त हो चुकीं हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में बाघों की जो उप-प्रजाति पाई जाती है, उसे ‘बंगाल टाइगर’ (वैज्ञानिक नाम : पैंथेरा टाइग्रिस टाइग्रिस) कहते हैं। IUCN की रेड डाटा सूची में इसे ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) की श्रेणी में शामिल किया गया है। चूंकि बाघों के संरक्षण के परिणामस्वरूप ही किसी पारिस्थितिकी तंत्र में ‘सभी पोषण स्तरों’ (All tropic levels) का संरक्षण संभव होता है, अतः इन्हें संरक्षित किया जाना आवश्यक है।
  • भारत में बाघों की स्थिति
  • विश्व में बाघों की कुल आबादी का 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही निवास करता है।
  • जंगली बाघ (Wild Tigers) भारत के जिन 20 राज्यों में पाए जाते हैं। वे हैं :-आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा तथा नगालैंड।
  • राष्ट्रीय पशु ‘बाघ’ को संरक्षित करने की एक अग्रणी पहल के रूप में भारत सरकार ने वर्ष 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (Project Tiger) को लांच किया था।
  • प्रोजेक्ट टाइगर के लांच होने के बाद प्रारंभ में देश में 9 बाघ अभयारण्य (Tiger Reserves) स्थापित किए गए थे, जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 50 तक पहुंच चुकी है।
  • ये 50 बाघ अभयारण्य देश के 18 राज्यों में विस्तृत हैं और कुल 72,749.02 वर्ग किमी. क्षेत्र को आच्छादित करते हैं, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 2.21 प्रतिशत है।
  • बाघ संरक्षण के प्रयासों की सफलता का आकलन करने के साथ बाघों की संख्या तथा उनके पारितंत्र पर नजर रखने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (NTCA : National Tiger Conservation Authority), राज्य वन विभागों, गैर-सरकारी संगठनों तथा भारतीय वन्य जीव संस्थान के सहयोग से प्रत्येक चार वर्ष के अंतराल पर बाघों की स्थिति एवं उनके प्राकृतिक आवास के राष्ट्रीय आकलन का कार्य संचालित करता है।
  • बाघों का प्रथम राष्ट्रीय आकलन वर्ष 2006 में किया गया था।
  • वर्ष 2006 में देश भर में हुई बाघ गणना के आंकड़े चौकाने वाले थे, जिसके अनुसार भारत में मात्र 1411 बाघ ही शेष थे।
  • इसके   बाद वर्ष 2010 में हुई अखिल भारतीय बाघ गणना में बाघों की संख्या के 1411 से बढ़कर 1706 तक पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया गया था।
  • जबकि वर्ष 2014 में जारी अखिल भारतीय बाघ आकलन के तीसरे चक्र के परिणामों के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 2226 दर्ज की गई।
  • 29 जुलाई, 2019 को ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस’ (International Tiger Day) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अखिल भारतीय बाघ आकलन’ के चौथे चरण के परिणाम जारी किए।
  • इन परिणामों को ‘स्टेटस ऑफ टाइगर्स इन इंडिया-2018’ (Status of Tigers in India-2018) नामक रिपोर्ट में संकलित कर प्रस्तुत किया गया है।
  • भारत का राष्ट्रीय बाघ आकलन, ‘आच्छादन’ (Coverage), नमूना एकत्रण की प्रक्रिया की गहनता (Intensity of Sampling) तथा कैमरा ट्रैपिंग के परिमाण की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वेक्षण है।
  • अखिल भारतीय बाघ आकलन के चौथे चरण के दौरान आंकड़ों का एकत्रीकरण डिजिटल रूप से एंड्रॉयड आधारित एप्लीकेशन ‘एम-स्ट्राइप्स’ (M-STrIPES : Monitoring System for Tigers-Intensive Protection & Ecological Status) के प्रयोग द्वारा किया गया।
  • नवीनतम बाघ गणना के परिणाम दर्शाते हैं कि वर्ष 2018 में भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 2967 तक पहुंच चुकी है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 से वर्ष 2018 के मध्य बाघों की संख्या में 33 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
  • बाघ गणना के दो क्रमागत (Consecutive) चरणों के मध्य दर्ज यह अब तक की सर्वाधिक वृद्धि है।
  • ज्ञातव्य है कि वर्ष 2006 से 2010 के मध्य बाघों की संख्या में 21 प्रतिशत, जबकि वर्ष 2010 से 2014 के मध्य 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
  • भारत में बाघों की सर्वाधिक संख्या मध्य प्रदेश में (526 बाघ) दर्ज की गई।
  • इसके बाद क्रमशः कर्नाटक (524 बाघ) एवं उत्तराखंड (442 बाघ) का स्थान रहा।
  • पिछले वर्ष की तुलना में छत्तीसगढ़ एवं मिजोरम में बाघों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई, जबकि ओडिशा में बाघों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
  • अन्य सभी राज्यों में बाघों की संख्या के संदर्भ में सकारात्मक प्रवृत्ति (Positive Trend) देखी गई।
  • बक्सा, डम्पा एवं पलामू बाघ अभयारण्यों में बाघों की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई।

भारत में बाघों की संख्या

राज्य

वर्ष

 

2014

2018

शिवालिक की पहाड़िया एवं गंगा का मैदान क्षेत्र

बिहार

28(25-31)

31(26-37)

उत्तराखंड

340(299-381)

442(393-491)

उत्तर प्रदेश

117(103-131)

173(148-198)

शिवालिक की पहाड़िया एवं गंगा का मैदान

485(427-543)

646(567-726)

मध्य भारतीय क्षेत्र एवं पूर्वी घाट

 

आंध्र प्रदेश

68(58-78)

48(40-56)#

तेलंगाना

26(23-30)#

छत्तीसगढ़

46(39-53)*

19(18-21)

झारखंड

3*

5

मध्य प्रदेश

308(264-352)*

526(441-621)

महाराष्ट्र

190(163-217)*

312(270-354)

ओडिशा

28(24-32)*

28(26-30)

राजस्थान

45(39-51)

69-(62-76)

मध्य भारत एवं पूर्वी घाट पश्चिमी घाट क्षेत्र

688(596-780)

1,033(885-1,193)

गोवा

5*

3

कर्नाटक

406(360-452)

524(475-573)

केरल

136(119-150)

190(166-215)

तमिलनाडु

229(201-253)

264(227-302)

पश्चिमी घाट

776(685-861)

981(871-1,093)

उत्तरपूर्वी पहाड़िया एवं ब्रह्मपुत्र का मैदान क्षेत्र

अरुणाचल प्रदेश

28*

29*

असम

167(150-184)

190(165-215)

मिजोरम

3*

0

नगालैंड

0

पूर्वी पश्चिमी बंगाल

3*

0

उत्तरपूर्वी पहाड़िया एवं ब्रह्मपुत्र क्षेत्र

201(174-212)

219(194-244)

सुंदरबन

76(62-96)

88(86-90)

कुल

2,226

2,967

 

(1,945-2,491)

(2,603-3,346)

नोट : कोष्ठक की संख्याएं मानक त्रुटि सीमा (Standard Error Limits) को प्रदर्शित करती हैं।

  • विश्व में बाघों की लगभग तीन-चौथाई आबादी भारत में निवास करती है।बाघ संरक्षण से संबंधित भारत की सर्वोतम प्रथाओं का लाभ टाइगर रेंज के अन्य मित्र देशों को भी प्राप्त हो रहा है।
  • इस संबंध में रूस एवं चीन सहित पांच देशों ने ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • ग्वाटेमाला भी अपने यहां ‘जगुआर’ (Jaguar) संरक्षण हेतु भारत से तकनीकी सहायता प्राप्त करने का इच्छुक है।
  • भारत के अतिरिक्त मलेशिया एवं बांग्लादेश का राष्ट्रीय पशु बाघ ही है।
  • चीनी संस्कृति में, ‘बाघ वर्ष’ (Tiger Year) मनाया जाता है।
  • निष्कर्ष
  • देश में बाघों एवं संरक्षित क्षेत्रों की संख्या में वृद्धि मात्र एक आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि इसका बहुत बड़ा प्रभाव पर्यटन एवं रोजगार के साधानों पर पड़ना तय है। स्पष्ट है कि, बाघों के संरक्षण के माध्यम से केंद्र सरकार पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ पारिस्थितिकी पर्यटन अवसंरचना के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
  • 21-24 नवंबर, 2010 के मध्य सेंट पीटर्सबर्ग, रूस में ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ संरक्षण फोरम’ (International Tiger Conservation Forum) का आयोजन किया गया था।
  • इस फोरम में 13 टाइगर रेंज देशों यथा बांग्लादेश, भूटान, कम्बोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड तथा वियतनाम के शासनाध्यक्षों ने भाग लिया था।
  • इस फोरम में इन देशों ने ‘ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम’ (Global Tiger Recovery Program) के कार्यान्वन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
  • साथ ही, ये देश अपनी रेंज में वर्ष 2022 तक जंगली बाघों   की संख्या दोगुनी करने पर भी सहमत हुए थे।
  • सेंट पीटर्सबर्ग में इस फोरम के आयोजन के समय भारत में बाघों की संख्या 1411 अनुमानित थी और अखिल भारतीय बाघ गणना-2010 के आंकड़े जारी नहीं किए गए थे।
  • वर्तमान में भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 2967 तक पहुंच चुकी है।
  • स्पष्ट है कि भारत ने वर्ष 2022 की अंतिम  समय-सीमा से काफी पहले ही बाघों की संख्या दोगुनी करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर लिया है।

सं. सौरभ मेहरोत्रा