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सीरिया पर रासायनिक हमला

Chemical attack on Syria

‘‘बदले की भावना विश्व को अंधा बना सकती है।’’ -महात्मा गांधी

उपर्युक्त कथन वर्तमान विश्व परिदृश्य में काफी प्रासंगिक है, जो भविष्य में उत्पन्न होने वाले प्रभावों के प्रति सचेत करता है। चाहे उत्तर कोरिया-अमेरिका का संवाद संघर्ष हो या फिर सीरिया जैसे क्षेत्र में की जा रही सैन्य कार्रवाई, सभी बदले की भावना से प्रेरित हैं और यह विडम्बना ही है कि इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं है। इतिहास गवाह है कि निजी स्वार्थ व अहम हेतु किए गए कार्य हमेशा नकारात्मक प्रभाव ही परिलक्षित करते हैं।

एक ओर हम सतत विकास की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विकास की अंधी दौड़ में, एक कदम आगे रहने के लिए सामूहिक विनाश वाले हथियारों (रासायनिक व जैविक हथियार, हाइड्रोजन व परमाणु बम) का विकास हो रहा है, जो अंततः मानवता को शर्मसार करते हैं। वर्तमान संदर्भ में, तुर्की द्वारा अपनी छद्म वीरता दिखाते हुए सीरिया में रासायनिक हथियारों का उपयोग सुर्खियों में है।

  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • कुर्दिश नेतृत्व का आरोप है कि सीरिया के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में तुर्की के फाइटर जेटों द्वारा नेपल्म और श्वेत फॉस्फोरस (Napalm and White phosphorus) जैसे रासायनिक हथियारों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के कई नागरिक व बच्चे प्रभावित हुए हैं।
  • वर्तमान समस्या क्या है?
  • अमेरिका द्वारा उत्तर-पूर्वी सीरिया से अपने सैनिकों की वापसी का निर्णय लेने के पश्चात तुर्की ने कुर्द लड़ाकों के प्रभाव वाले क्षेत्र में हमले शुरू कर दिए हैं। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का कहना है कि हमले का उद्देश्य सीमा पर ‘‘टेरर कॉरिडोर’’ को बनने से रोकना है। अतः तुर्की के सुरक्षा बल एक ऐसा ‘सुरक्षित क्षेत्र’ (Safe Zone) बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां सीरियाई शरणार्थियों को बसाया जा सके। इसका मतलब है कि इस उत्तर-पूर्वी सीरियाई क्षेत्र से कुर्दों का सफाया करना।
  • कौन हैं कुर्द?
  • कुर्द मध्य-पूर्व में निवास करने वाली चौथी बड़ी कौम है, जो मुख्य रूप से तुर्की के पहाड़ी इलाकों के अतिरिक्त सीरिया, ईरान, इराक और अर्मेनिया में निवास करती है। इनकी आबादी लगभग 2.5 से 3.5 करोड़ के मध्य है। यह कुर्द भाषा बोलते हैं और अधिकांश सुन्नी इस्लाम के अनुयायी हैं। 
  • कुर्दों की यह वर्तमान समस्या उस्मानी साम्राज्य के पतन के साथ शुरू होती है। ब्रिटिश और फ्रांसीसी शासकों द्वारा अपने हितों को ध्यान में रखते हुए मध्य-पूर्व का नक्शा तैयार किया गया और यहीं से विभिन्न जातियों के मध्य संघर्ष प्रारंभ होता है।
  • ब्रिटिश और फ्रांसीसी शासकों द्वारा तैयार इस नक्शे ने कुर्दों को कई क्षेत्रों में विभाजित कर दिया, जिससे इनका प्रभाव क्षेत्र में कम होने लगा। अतः राजनीतिक स्वायत्तता में वृद्धि करने हेतु कुर्दों का संघर्ष प्रारंभ होता है। इसी क्रम में वर्ष 1978 में तुर्की में अब्दुल्लाह ओजलान के नेतृत्व में छात्रों के एक समूह द्वारा ‘कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी’ (PKK) नामक एक कुर्द संगठन का गठन किया जाता है, जिसका उद्देश्य सभी कुर्दिश क्षेत्रों को मिलाकर एक ‘कुर्दिस्तान’ देश का निर्माण करना है। 15 अगस्त, 1984 को पीकेके (PKK) द्वारा तुर्क सरकार के खिलाफ पूर्ण सशस्त्र संघर्ष की घोषणा की गई। अब तक इस संघर्ष में करीब 40 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। चूंकि कुर्दों की लगभग 50 प्रतिशत आबादी तुर्की क्षेत्र में निवास करती है, इसीलिए कुर्दों का मुख्य संघर्ष तुर्की के खिलाफ चल रहा है।
  • अमेरिका और रूस का प्रभाव
  • सीरिया में इस्लामिक स्टेट (आईएस) को समाप्त करने में कुर्द लोग अमेरिका के साथ थे, लेकिन अमेरिका द्वारा सैनिक वापसी का निर्णय लिए जाने के पश्चात तुर्की उत्तरी सीरिया के कुर्द बल कुर्दिश पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट ‘मिलीशिया’ को अपने लिए एक खतरे के रूप में देख रहा है, जिसे वह एक आतंकवादी गुट मानता है। अमेरिका द्वारा इस क्षेत्र में शांति हेतु तुर्की की सेना व कुर्द लड़ाकों के मध्य शांति समझौता कराया गया था, लेकिन अमेरिका की सैनिक वापसी के निर्णय के कारण कुर्दों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए रूस और तुर्की के मध्य समझौता किया गया है, ताकि क्षेत्र में सैन्य नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सके।
  • क्या है रासायनिक हथियार?
  • सामान्य शब्दों में इन्हें रासायनिक शस्त्र (Chemical Weapon) भी कहा जाता है। यह डिलीवरी सिस्टम जैसे-बम, रॉकेट आदि में प्रयुक्त जहरीले रसायन होते हैं, जो विस्फोट पश्चात व्यापक स्तर पर जल, थल व वायु को दुष्प्रभावित करते हैं।
  • रासायनिक शस्त्रों के इस्तेमाल हेतु मानव, पशु-पक्षी, पानी व जानवरों का भी उपयोग किया जा सकता है।
  • कुछ महत्वपूर्ण रासायनिक हथियार

(1) नर्व एजेंट वी एक्स

  • इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा सामूहिक हत्या करने वाला अत्यधिक जहरीला हथियार कहा गया है।
  • यह त्वचा में प्रवेश कर तंत्रिका तंत्र के कार्य को प्रभावित करता है।

(2) सारिन

  • वर्ष 1938 में जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया रासायनिक हथियार है। यह तरल रूप में रंगहीन व गंधहीन होता है और आसानी से गैस में भी परिवर्तित हो जाता है।

(3) मस्टर्ड गैस

  • सर्वप्रथम प्रथम विश्व युद्ध में मस्टर्ड गैस का उपयोग किया गया था। यह संक्रमित व्यक्ति में 24 घंटे पश्चात अपने प्रभाव परिलक्षित करती है। इसमें पहले त्वचा लाल होती है, फिर छाले पड़ने के पश्चात त्वचा छिलके के रूप में बाहर निकलने लगती है।

(4) फॉसजेन

  • यह एक घातक रासायनिक हथियार है, जो प्रभावित व्यक्ति में सांस फूलने, कफ बनने जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है।

(5) श्वेत फॉस्फोरस (White Phosphorus)

  • इस रासायनिक हथियार का उपयोग प्रथम विश्व युद्ध से किया जा रहा है। वर्तमान समय में इसका उपयोग गाजा युद्ध (2008-09), इस्राइल-लेबनान संघर्ष (2006), अफगानिस्तान, यमन, इराक व सीरिया  में किया गया है।
  • श्वेत फॉस्फोरस तीन तरीकों से चोट व मृत्यु का कारण बनता है। प्रथम-त्वचा (ऊतक) का जलना, द्वितीय-धुएं के रूप में सांस लेना, तृतीय-निगल जाना।

(6) नेपल्म (Napalm)

  • नेपल्म, जेलिंग एजेंट (Gelling Agents) और वाष्पशील कार्बनिक पदार्थ (Valatile petrochemical) का मिश्रण होता है।
  • नेपल्म-B (Napalm-B), नेपल्म का आधुनिक संस्करण है। इसका विकास अमेरिका द्वारा किया गया था।
  • रासायनिक हथियार निषेध संगठन (Organisation for the Prohibition of Chemical Weapons-OPCW)
  • हेग, नीदरलैंड्स स्थित यह एक स्वतंत्र संगठन है, जो रासायनिक हथियार सम्मेलन/समझौता (Chemical Weapons Convention-CWC) के प्रभावी होने के साथ 29 अप्रैल, 1997 को अस्तित्व में आया।
  • इसका उद्देश्य रासायनिक हथियारों से मुक्त दुनिया (A world free of Chemical Weapons) बनाना है। अतः संगठन रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल, उत्पादन व भंडारण को निषेध करता है।
  • वर्तमान समय में इसके 193 सदस्य देश हैं।
  • भारत ने 14 जनवरी, 1993 को सीडब्ल्यूसी (CWC) पर हस्ताक्षर किए।
  • भारत में यह कन्वेंशन 29 अप्रैल, 1997 से प्रभावी है।

सं. सचिन वर्मा