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सतत् नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन, 2018

Sustainable Blue Economy Conference -SBEC
  • भूमिका
  • सतत् विकास के लिए एजेंडा, 2030 में सर्वप्रथम नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy), सतत् विकास एवं आर्थिक वृद्धि के मध्य संभावित सहलग्नता की पहचान की गई थी। सतत् विकास लक्ष्य 14.7, समुद्री संसाधनों के सतत् उपयोग द्वारा छोटे द्वीपीय विकासशील राष्ट्रों एवं अल्प विकसित देशों के आर्थिक हितों की अभिवृद्धि पर केंद्रित है। छोटे द्वीपीय विकासशील राष्ट्र नीली अर्थव्यवस्था के संभावित उपयोग हेतु सर्वाधिक वकालत करते हैं। वे न केवल महासागरों को मानव जाति के भविष्य निर्माण में एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखते हैं, अपितु उनका ऐसा मत है कि नीली अर्थव्यवस्था उनके वातावरण, परिस्थितियों एवं चुनौतियों को देखते हुए उनके सतत् विकास हेतु उपयुक्त उपागम हैं। इसी परिदृश्य में वैश्विक सतत् नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन, 2018 (Sustainable Blue Economy Conference -SBEC) का आयोजन किया गया।
  • वर्तमान संदर्भ
  • सतत् नीली अर्थव्यवस्था पर प्रथम वैश्विक सम्मेलन ‘सतत् नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन, 2018’ का आयोजन 26 – 28 नवंबर, 2018 के मध्य केन्या के नैरोबी स्थित केन्याता इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया।
  • इस सम्मेलन का मुख्य आयोजक केन्या था, जबकि कनाडा और जापान सह-आयोजक थे।
  • सम्मेलन की आवश्यकता क्यों?
  • महासागरों एवं जलीय तंत्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों ने संपूर्ण विश्व का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है। ऐसे समय में यह सबका दायित्व है कि वे समावेशी एवं सतत् प्रक्रिया के आधार पर जलीय तंत्र को प्रदूषण मुक्त कर सभी को लाभान्वित करें।
  • सतत् नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन का आयोजन सतत् विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे 2030, वर्ष 2015 में पेरिस में आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन, 2017 के ‘कार्यवाही हेतु आह्वान’ (Call to Action) को गति प्रदान करने हेतु किया गया।
  • इस सम्मेलन में निम्नलिखित मुद्दों पर विचार किया गया-
  • नीली अर्थव्यवस्था के संसाधनों का उपयोग कर किस प्रकार रोजगार जनन तथा गरीबी एवं भुखमरी में कमी की जा सकती है।
  • आर्थिक विकास एवं स्वस्थ महासागर एक साथ कैसे चल सकते हैं।
  • सुधार हेतु नई कार्यवाहियों एवं वायदों को चिह्नित करना, आदि।
  • सम्मेलन का विषय
  • इस सम्मेलन में 184 देशों के 16,320 लोगों ने भाग लिया।
  • इसमें 7 राष्ट्रों या सरकारों के प्रमुख, 84 मंत्री, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख, महिला एवं युवा संगठन, सामुदायिक नेता एवं निजी तथा व्यापारिक क्षेत्र के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
  • इस सम्मेलन का मुख्य विषय- ‘‘नीली अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के लिए एजेंडा, 2030’’ (The Blue Economy and the 2030 Agenda for Sustainable Development) था।
  • यह विषय 9 उप-विषयों में विभाजित था, जो इस प्रकार हैं-
  • स्मार्ट शिपिंग, बंदरगाह, परिवहन एवं वैश्विक संपर्क
  • रोजगार जनन एवं गरीबी उन्मूलन
  • शहर, पर्यटन एवं आधारभूत संरचन
  • सतत् ऊर्जा, खनिज संसाधन एवं नवप्रवर्तनीय उद्योग
  • समुद्री जीवन का संरक्षण एवं सतत् आर्थिक गतिविधियां
  • भुखमरी का अंत, खाद्य सुरक्षा एवं सतत् मात्स्यिकी
  • जलवायु कार्यवाही, कृषि एवं मात्स्यिकी, अपशिष्ट प्रबंधन एवं प्रदूषण मुक्त महासागर
  • समुद्री सुरक्षा एवं विनियामक प्रवर्तन
  • लोग, संस्कृति, समुदाय एवं समाज-समावेशी नीली अर्थव्यवस्था
  • सम्मेलन में की गईं प्रतिबद्धताएं
  • सम्मेलन में कुल 191 प्रतिबद्धताएं की गईं। ये प्रतिबद्धताएं सम्मेलन के दौरान विभिन्न खंडों में की गईं। इन प्रतिबद्धताओं को 10 क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं-प्लास्टिक एवं अपशिष्ट प्रबंधन, समुद्री एवं जल संसाधन संरक्षण, साझेदारी, आधारभूत संरचना, नीति एवं विनियामक उपाय, निजी क्षेत्र सहयोग, जैव-विविधता एवं जलवायु परिवर्तन, तकनीकी सहायता एवं क्षमता निर्माण, मात्स्यिकी विकास तथा समावेशन।
  • इन 191 प्रतिबद्धताओं में 8 देशों एवं 3 संगठनों ने लगभग 1.72 खरब अमेरिकी डॉलर की मौद्रिक सहायता देने की घोषणा की।
  • ये उपाय वैश्विक, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर लागू किए जाएंगे।
  • नीली अर्थव्यवस्था एवं भारत
  • इस सम्मेलन में भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भाग लिया।
  • भारत ने इस सम्मेलन में निम्नलिखित वायदे किए-
  • भारत तटीय नियमन क्षेत्र नियंत्रण व्यवस्था का राष्ट्रीय स्तर पर प्रवर्तन करेगा।
  • अंतःस्थलीय जलमार्गों को बढ़ावा देगा।
  • सागरमाला कार्यक्रम के तहत 600 से अधिक परियोजनाओं पर लगभग 120 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा।
  • गौरतलब है कि नीली अर्थव्यवस्था भारत के आर्थिक विकास कार्यक्रम का महत्वपूर्ण अंग है तथा भारत का 95 प्रतिशत से अधिक का व्यापार समुद्र के जरिए होता है।
  • भारत ‘इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ की रूपरेखा के जरिए नीली अर्थव्यवस्था को सतत्, समावेशी एवं जन आधारित तरीके से प्रोत्साहित करने के पक्ष में है।

लेखक-ललिन्द्र कुमार