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सऊदी अरब, एफएटीएफ (FATF) की सदस्यता पाने वाला पहला अरब देश वर्तमान परिदृश्य

Saudi Arabia, the first Arab country to subscribe to FATF
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 21 जून, 2019 को सऊदी अरब ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (FATF) की सदस्यता प्राप्त करने वाला पहला अरब देश बन गया है।
  • गौरतलब है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स विकसित देशों  (G-7 देशों की पहल पर गठित) की अगुवाई में गठित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और आतंकी फंडिंग (Terror Funding) पर लगाम लगाना है।
  • सऊदी अरब और एफएटीएफ
  • ध्यातव्य है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के ओरलैंडो, फ्लोरिडा में इस संस्था की 30वीं वार्षिक बैठक में सऊदी अरब को इसका 39वां सदस्य बनाया गया।
  • इसके पहले नवंबर, 2004 से सऊदी अरब, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की सहयोगी संस्था ‘मिडिल ईस्ट एंड नॉर्थ अफ्रीका’ (MENA) का संस्थापक सदस्य है।
  • वर्ष 2015 के आरंभ में सऊदी अरब को एफएटीएफ की ओर से बतौर पर्यवेक्षक सदस्य (Observer Member) आमंत्रित किया गया था।
  • गौरतलब है कि एफएटीएफ का पूर्णकालिक सदस्य बनने के लिए उसके द्वारा जारी दिशा-निर्देशों (FATF’s Guidelines) को लागू करना होता है।
  • एफएटीएफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने संस्था के दिशा-निर्देशों के पालन में ठोस प्रगति की है।
  • फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स
  • वर्ष 1989 में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की स्थापना की गई थी। इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित है।
  • वर्तमान में इस संस्था के 37 सदस्य देश और दो क्षेत्रीय संगठन खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council) एवं यूरोपीय आयोग (European Commission) सहित कुल 39 पूर्णकालिक स्थायी सदस्य हैं।
  • उल्लेखनीय है कि भारत सहित विश्व के सभी प्रभावशाली देश यथा-सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और अधिकांश जी-20 के देश इस संस्था के सदस्य हैं।
  • एफएटीएफ की पूर्ण बैठक वर्ष में तीन बार होती है। इसकी कार्य पद्धति, एक निर्णय लेने वाली संस्था के रूप में संपादित होती है।
  • यह संस्था मनी लॉन्ड्रिंग और आंतकी फंडिंग पर लगाम लगाने में नाकाम देशों की दो लिस्ट – पहली ग्रे एवं दूसरी ब्लैक तैयार करती है।
  • गौरतलब है कि ग्रे लिस्ट (Gray List) में शामिल देशों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलने में मुश्किल होती है, जबकि ब्लैक लिस्ट में आने वाले देशों की आर्थिक सहायता पूरी तरह बंद हो जाती है।

संधीरेंद्र त्रिपाठी