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शंघाई सहयोग सम्मेलन-2019

Shanghai Cooperation Conference-2019
  • अप्रैल, 1996 में चीन, रूस, किर्गिजस्तान, कजाख्स्तान और ताजिकिस्तान ने आपसी सहयोग के माध्यम से नस्लीय एवं धार्मिक तनावों से निपटने के लिए ‘शंघाई फाइव’ नामक संगठन का निर्माण किया।
  • 15 जून, 2001 को इस संगठन में उज्बेकिस्तान को शामिल करते हुए इसका नाम बदलकर ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (Shanghai Cooperation Organisation) कर दिया गया।
  • गौरतलब है कि 9 जून, 2017 को इस संगठन में भारत और पाकिस्तान को सदस्यता देने से कुल सदस्य संख्या वर्तमान में आठ हो गई है।
  • ध्यातव्य है कि इस संगठन का मुख्यालय बीजिंग में स्थित है एवं इसकी आधिकारिक भाषा रशियन और चाइनीज है।
  • इस संगठन के दो स्थायी निकाय-बीजिंग स्थित एससीओ (SCO) सचिवालय और ताशकंद में स्थित क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorrist Structure) की कार्यकारी समिति है।
  • वर्तमान में एससीओ, सचिवालय के महासचिव (SCO Secretary-General) राशिद अलिमोव (Rashid Alimov) ताजिकिस्तान से एवं क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी संचरना (RATS) की कार्यकारी समिति के निदेशक येवगेनी स्योसयेव (Yevgeny Sysoyev) रूस से हैं।
  • 13-14  जून, 2019 के मध्य भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन के 19वें सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक की यात्रा पर रहे।
  • गौरतलब है कि, इस सम्मेलन में अन्य सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों यथा-रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, कजाख्स्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव , किर्गिजस्तान के राष्ट्रपति सूरानबे जीनबेकोव, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने भी प्रतिभाग किया।
  • इस सम्मेलन में वार्ता के प्रमुख मुद्दे-आतंकवाद, व्यापार युद्ध (Trade War), जलवायु परिवर्तन, गैर-कानूनी मादक पदार्थों की तस्करी, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, खेल सहित इस संगठन (एससीओ) और अन्य बहुपक्षीय संगठनों के मध्य सहयोग बढ़ाना था।
  • ध्यातव्य है कि आठ स्थायी सदस्यों के अतिरिक्त चार पर्यवेक्षक देशों-अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान एवं मंगोलिया और छह वार्ता सहयोगी देशों (Dialouge Partner) – आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, नेपाल, तुर्की और श्रीलंका ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया।
  • उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने संगठन के सदस्यों के मध्य सहयोग बढ़ाने हेतु ‘HEALTH’ शब्द के संक्षिप्त रूप का विस्तार करते हुए H से स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare Cooperation), E से आर्थिक सहयोग (Economic Cooperation), A से वैकल्पिक ऊर्जा (Alternate Energy), L से साहित्य एवं संस्कृति (Literature and Culture), T से आतंक मुक्त समाज (Terrorism-Free Society) और H से मानवीय सहयोग (Humanitarian Cooperation) बढ़ाने पर जोर दिया।
  • इस सम्मेलन के दौरान निम्न सहयोग-समझौतों पर हस्ताक्षर हुए-

1. जनसंचार माध्यमों (Mass Media) के क्षेत्र में सहयोग-समझौता।

   2.   शारीरिक सौष्ठव (Physical Fitness) और खेल के क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता।

   3.   सदस्य देशों के मध्य स्वास्थ्य सेवाओं के विकास हेतु कार्ययोजना, 2019-2021 पर सहयोग-समझौता।

   4.   एससीओ सचिवालय और विश्व पर्यटन संगठन (World Tourism Organisation) के मध्य समझौता-ज्ञापन।

   5.   एससीओ सचिवालय और मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (United Nations Office for the Coordination of Humanitarian Affairs) के मध्य समझौता-ज्ञापन।

   6.   एससीओ सचिवालय और अस्ताना अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के मध्य समझौता-ज्ञापन।

   7.   एससीओ-अफगानिस्तान संपर्क समूह की भविष्य की कार्यवाही के रोडमैप पर सहयोग-समझौता।

  • भारत, शंघाई सहयोग संगठन के मंच के माध्यम से पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में फैलाए जा रहे आतंकवाद के मुद्दे को उठाकर उसको आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने हेतु बाध्य कर सकता है।
  • अमेरिका द्वारा प्राथमिकताओं की सामान्यीकृत प्रणाली (Generalized System of Preferences) के तहत भारतीय उत्पादों को अमेरिकी सीमा शुल्क में दी जा रही छूट बंद हो जाने से भारत को नए बाजार के रूप में मध्य एशियाई देशों के साथ बेहतर संबंध महत्वपूर्ण है।
  • इसके अतिरिक्त भारत की यूरेशियाई क्षेत्र में आसान पहुंच हेतु अश्गाबाद समझौता, उत्तर-दक्षिण आर्थिक गलियारा योजना (North-South Economic Corridor) और शंघाई सहयोग संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • गौरतलब है कि शंघाई सहयोग संगठन के छः सदस्य देश यूरेशिया के 60 प्रतिशत क्षेत्रफल और लगभग एक-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • ध्यातव्य है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से भारत को ईरान से खनिज तेल के आयात को बंद करना पड़ रहा है। ऊर्जा की इस कमी को ऊर्जा संपन्न मध्य एशियाई देश व रूस पूरा कर सकते हैं।
  • अफगानिस्तान में शांति की स्थापना इस क्षेत्र सहित भारत के भी हित में है। भारत इस संगठन के माध्यम से अफगानिस्तान में शांति एवं स्थिरता की स्थापना में मदद करने के साथ ही अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका को भी सीमित कर सकता है।

सं. धीरेन्द्र त्रिपाठी