Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2019

Global Multidimensional Poverty Index, 2019
  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2019
  • विश्व के अधिकांश देशों में गरीबी (Poverty) को प्रायः धन की कमी के रूप में ही परिभाषित किया जाता है। हालांकि गरीब व्यक्ति अपेक्षाकृत अधिक व्यापक रूप में गरीबी का अनुभव करते हैं। उदाहरणस्वरूप, किसी गरीब व्यक्ति को एक ही समय पर खराब स्वास्थ्य या कुपोषण, स्वच्छ जल एवं विद्युत के अभाव, खराब गुणवत्ता के कार्य में संलग्नता जैसी विविध प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। स्पष्ट है कि केवल एक ही घटक जैसे-आय के आधार पर गरीबी की वास्तविक स्थिति को समझना पर्याप्त नहीं है। गरीबी की बहुआयामी स्थिति को समझने के लिए गरीबों द्वारा अनुभव की जाने वाली विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित करना भी आवश्यक है।
  • बहुआयामी गरीबी सूचकांक
  • वर्ष 2030 तक सभी जगहों से सभी रूपों में गरीबी की समाप्ति ही ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) के अंतर्गत प्रथम लक्ष्य (Goal-1) है।
  • सतत विकास लक्ष्य-1 (SDG-1) को प्राप्त करने की दिशा में हो रही प्रगति को मापने का एक साधन ‘वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक’ (Global Multidimensional Poverty Index) है।
  • इस सूचकांक के अंतर्गत वैश्विक जनसंख्या के 76 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले 100 से अधिक देशों में चरम बहुआयामी गरीबी (Acute Multidimensional Poverty) की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।
  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक का विकास वर्ष 2010 में ‘ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल’ (OPHI : Oxford Poverty & Human Development Initiative) तथा ‘संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम’ (UNDP) के ‘मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय’ (HDRO) द्वारा किया गया था।
  • OPHI तथा UNDP ने बहुआयामी गरीबी को मापने के लिए एक प्रविधि विकसित की है जिसे ‘अल्कीरे-फॉस्टर विधि’ (Alkire-Foster Method) के नाम से जाना जाता है।
  • 11 जुलाई, 2019 को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) तथा ‘ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल’ (OPHI) द्वारा ‘वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2019’ (Global Multidimensional Poverty Index, 2019) जारी किया गया।
  • यह सूचकांक वैश्विक जनसंख्या के 76 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाले 101 देशों में बहुआयामी गरीबी की स्थिति का व्यापक विवरण उपलब्ध कराता है।
  • नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में विश्व के 101 देशों में 1.3 बिलियन लोग (23.1%) बहुआयामी गरीबी की स्थिति में हैं।
  • इन 1.3 बिलियन लोगों में आधी संख्या 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की है।
  • बहुआयामी गरीबी की स्थिति वाले लगभग दो-तिहाई लोग (886 मिलियन) मध्यम-आय वाले देशों में निवास करते हैं।
  • विश्व के 84.5 प्रतिशत बहुआयामी गरीबी की स्थिति वाले लोग उप-सहारा अफ्रीका एवं दक्षिण एशिया में निवास करते हैं
  • इस रिपोर्ट में ऐसे 10 देशों की पहचान की गई है, जिनकी संयुक्त जनसंख्या लगभग 2 बिलियन है और इन देशों ने ‘सतत विकास लक्ष्य-1’ (SDG-1 : सभी जगह से सभी रूपों में गरीबी की समाप्ति) को प्राप्त करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
  • ये 10 देश हैं :- बांग्लादेश, पेरू, कंबोडिया, भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, वियतनाम, कांगो, इथियोपिया तथा हैती।
  • बहुआयामी गरीबी सूचकांक मूल्य (MPI Value) में सबसे तेज निरपेक्ष कमी भारत, कंबोडिया एवं बांग्लादेश में दर्ज की गई।
  • भारत का MPI मूल्य वर्ष 2005-06 के 0.283 से घटकर वर्ष 2015-16 में 0.123 हो गया।
  • वर्ष 2005-06 में भारत में बहुआयामी गरीबी की स्थिति में निवास कर रहे लोगों की संख्या 640 मिलियन (55.1%) थी, जो वर्ष 2015-16 में घटकर 369 मिलियन (27.9%) हो गई।
  • स्पष्ट है कि वर्ष 2005-06 एवं 2015-16 के मध्य भारत ने 271 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है।
  • भारत की 8.8 प्रतिशत जनसंख्या बहुआयामी गरीबी की गंभीर स्थिति में निवास कर रही है, जबकि 19.3 प्रतिशत जनसंख्या बहुआयामी गरीबी के प्रति सुभेद्य (Vulnerable) है।
  • भारत के झारखंड प्रांत में बहुआयामी गरीबी के मामले वर्ष 2005-06 के 74.9 प्रतिशत से कम होकर वर्ष 2015-16 में 46.5 प्रतिशत दर्ज किए गए।

सं. सौरभ मेहरोत्रा