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वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता रिपोर्ट, 2019

Global Competitiveness Report, 2019
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 9 अक्टूबर, 2019 को जेनेवा स्थित ‘विश्व आर्थिक मंच’ (World Economic Forum) द्वारा ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता रिपोर्ट, 2019’ (Global Competitiveness Report, 2019) जारी की गई।
  • जहां इस वर्ष के सूचकांक में सिंगापुर ने सं. रा. अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान (सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था) प्राप्त किया, वहीं सं. रा. अमेरिका दूसरे स्थान पर आ गया है।
  • इस सूचकांक में भारत को 68वां (-61.4) स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि विगत वर्ष (2018) की सूची में 58वां स्थान प्राप्त हुआ था।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता रिपोर्ट
  • विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा जारी इस रिपोर्ट में प्रतिस्पर्धात्मकता को उन संस्थाओं, नीतियों और कारकों के समूह के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो किसी देश की उत्पादकता का निर्धारण करते हैं।
  • इस रिपोर्ट के अंतर्गत प्रस्तुत ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक 4.0’ में प्रतिस्पर्धात्मकता के कुल 12 स्तंभों/ पैमानों के भारित औसत आधार पर 141 देशों/अर्थव्यवस्थाओं को रैंकिंग प्रदान की गई है।
  • ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक’ (GCI) उन कारकों (Factors) की माप करता है, जो विगत कई दशकों से लंबी अवधि के विकास और समृद्धि को आगे बढ़ा रहे हैं।
  • यह सूचकांक नीति-निर्माताओं को चुनौतियों का सामना करने तथा आर्थिक विकास की रणनीति तैयार करने में सहायता प्रदान करता है, क्योंकि यह उन्हें वास्तविक स्थिति को समझने में सहायता प्रदान करता है।
  • वर्तमान सूचकांक विगत 4 दशकों के अनुभव के आधार पर 12 विषयों (Themes) के तहत 103 संकेतकों (Indicators) तथा 141 अर्थव्यवस्थाओं की प्रतिस्पर्धात्मक परिदृश्य को दर्शाता है। ये 12 विषय (Themes or Pillars) निम्न हैं-
  • इस सूचकांक में 0 -100 अंकों के मध्य अंक प्रदान किया गया है, जिसमें 100 सर्वोत्तम प्रतिस्पर्धात्मकता को, जबकि शून्य न्यूनतम प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रदर्शित करता है।
  • प्रत्येक संकेतकों के प्राप्तांक, जो 0 से 100 तक के मध्य में हैं, यह प्रदर्शित करता है कि एक अर्थव्यवस्था आदर्श स्थिति या प्रतिस्पर्धा की सीमा (Frontier) के कितने करीब है।
  • रैंकिंग (Ranking)
  • जहां रिपोर्ट में प्रस्तुत ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक 4.0’, 2019 की सूची में 84.8 अंकों के साथ सिंगापुर को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है, वहीं 83.7 अंकों के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर है।
  • विगत वर्ष (2018) की सूची में संयुक्त राज्य अमेरिका शीर्ष पर था।
  • 83.1 अंकों के साथ हांगकांग तीसरे, 82.4 अंकों के साथ नीदरलैंड्स चौथे तथा 82.3 अंकों के साथ स्विट्जरलैंड पांचवें स्थान पर है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक 4.0, 2019 में शीर्ष एवं निम्न 5 देशों की स्थिति इस प्रकार है-

शीर्ष 5 देश

रैंक 2019

देश

अंक (Score)

रैंक 2018

1

सिंगापुर

84.8

2

2

संयुक्त राज्य अमेरिका

83.7

1

3

हांगकांग

83.1

7

4

नीदरलैंड्स

82.4

6

5

स्विट्जरलैंड

82.3

4

निम्न 5 देश

रैंक 2019

देश

अंक (Score)

रैंक 2018

141

चाड

35.1

140

140

यमन

35.5

139

139

कांगो

36.1

135

 138

हैती

36.3

137

मोजाम्बिक

38.1

133

  • इस प्रकार भारत की रैंकिंग में विगत वर्ष की तुलना में 10 स्थान  की गिरावट दर्ज की गई है।
  • भारत के पड़ोसी देशों में श्रीलंका को 84वां, बांग्लादेश को 105वां, नेपाल को 108वां तथा पाकिस्तान को 110वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • ब्रिक्स (BRICS) देशों में भारत की रैंकिंग सिर्फ ब्राजील को छोड़कर अन्य सदस्य देशों से नीचे है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक 4.0, 2019 में ब्रिक्स देशों की रैंकिंग निम्न है-
रैंक 2019 देश अंक (Score) रैंक 2018
28वां चीन 73.9 28वां
43वां रूस 66.7 43वां
60वां दक्षिण अफ्रीका 62.4 67वां
68वां भारत 61.4 58वां
71वां ब्राजील 60.9 72वां
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  • सूचकांक के अनुसार, भारत की समष्टि आर्थिक स्थिरता और बाजार के आकार की स्थिति काफी बेहतर है, लेकिन वित्तीय प्रणाली कमजोर हो रही है।
  • जहां कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) के संदर्भ में भारत को 15वां स्थान दिया गया है, वहीं शेयर होल्डर्स गवर्नेंस (Share Holders Governance) में दूसरा तथा बाजार के आकार (Market Size) में तीसरा स्थान दिया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लोगों में कौशल निर्माण की दिशा में अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है। व्यापार में खुलापन लाने, श्रम बाजार में मजदूरों के अधिकारों का संरक्षण और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।
  • भारत में लैंगिक असमानता के कारण, पुरुष श्रमिकों की तुलना में महिलाओं का अनुपात मात्र 0.26 प्रतिशत है, जिसके संदर्भ में भारत 128वें स्थान पर है।

सं.  शिवशंकर तिवारी