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वैश्विक पारिश्रमिक रिपोर्ट, 2018-19

Global Wage Report, 2018-19
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्
  • 26 नवंबर, 2018 को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (Internation Labour Organizaton : ILO) द्वारा ‘लिंग वेतन अंतराल का कारण क्या है’ (What lies behind gender pay gaps) शीर्षक से ‘वैश्विक पारिश्रमिक रिपोर्ट, 2018-19’ (Global Wage Report, 2018-19) जारी की गई।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2008-17 की अवधि में दक्षिण एशियाई देशों में वास्तविक औसत पारिश्रमिक वृद्धि के मामले में भारत का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। दक्षिण एशिया में औसत वास्तविक वेतन वृद्धि जहां 3.7 प्रतिशत रही, वहीं भारत में औसत वास्तविक वेतन वृद्धि 5.5 प्रतिशत रही।
  • साथ ही किसी अन्य क्षेत्र की तुलना में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वर्ष  2008-17 के दौरान ज्यादा तेजी से आर्थिक वृद्धि दर्ज की गई, जिसका लाभ इस क्षेत्र के श्रमिकों को मिला है, जिनके वास्तविक औसत पारिश्रमिक में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
  • पृष्ठभूमि
  • संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने सभी कार्यस्थल पर न्यूनतम असमानता को सतत विकास लक्ष्य, 2030 में स्थान प्रदान किया है। सतत विकास लक्ष्य में यह भी घोषणा की गई है कि कार्य की न्यायसंगत दशा के साथ ही समान महत्व के कार्य हेतु समान पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने विभिन्न देशों की सरकारों, सामाजिक संगठनों एवं अकादमिक संस्थानों के सहयोग से विश्व में पारिश्रमिक वृद्धि एवं उसकी प्रवृत्ति तथा कार्यस्थल पर पारिश्रमिक असमानताओं का एक तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया है।
  • वर्तमान रिपोर्ट वैश्विक पारिश्रमिक रिपोर्ट शृंखला का छठा संस्करण है, जो लिंग वेतन असमानता पर एक विस्तृत विश्लेषण उपलब्ध कराता है।
  • रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में वैश्विक पारिश्रमिक में वृद्धि वर्ष 2016 की तुलना में न केवल कम रही, बल्कि यह वर्ष 2008 के बाद से इसकी सबसे कम वृद्धि भी है।
  • वैश्विक मजदूरी वृद्धि (मुद्रास्फीति समायोजित) वर्ष 2016 के 2.4 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2017 में केवल 1.8 प्रतिशत रह गई।
  • चीन जिसकी बड़ी आबादी और तेजी से वेतन वृद्धि वैश्विक औसत को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है, को यदि छोड़ दिया जाए तो वास्तविक अर्थों में वैश्विक मजदूरी वृद्धि वर्ष 2016 में 1.8 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2017 में मात्र 1.1 प्रतिशत ही रह गई है।
  • विकसित (G-20) देशों में वास्तविक वेतन वृद्धि वर्ष 2015 में 1.7 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2016 में  घटकर 0.9 प्रतिशत तथा वर्ष 2017 में 0.4 प्रतिशत हो गई।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में वास्तविक मजदूरी वृद्धि वर्ष 2015 के 2.2 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2016 एवं 2017 (दोनों वर्षों में) 0.7 प्रतिशत रह गई।
  • एशिया और प्रशांत क्षेत्रों जैसे चीन, भारत, थाईलैंड और वियतनाम आदि के श्रमिकों को वर्ष 2006-17 के दौरान अन्य सभी क्षेत्रों की तुलना में सर्वाधिक लाभ प्राप्त हुआ है।
  • हालांकि इस क्षेत्र में भी पारिश्रमिक वृद्धि वर्ष 2016 के 4.8 प्रतिशत की तुलना में कम होकर वर्ष 2017 में 3.5 प्रतिशत हो गई।
  • दक्षिण एशियाई देशों में औसत पारिश्रमिक वृद्धि के मामले में भारत का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां वर्ष 2008-17 के दौरान वृद्धि दर 5.5.प्रतिशत रही, जबकि पूरे क्षेत्र की औसत वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत रही।
  • भारत के बाद नेपाल में वेतन वृद्धि दर 4.7 प्रतिशत, श्रीलंका में 4 प्रतिशत, बांग्लादेश में 3.4 प्रतिशत और पाकिस्तान में 1.8 प्रतिशत रही।
  • मध्य और पश्चिमी एशिया में पारिश्रमिक वृद्धि वर्ष 2016 के 3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2017 में 0.5 प्रतिशत हो गई।
  • उच्च आय वाले देशों में स्वीडन में मजदूरी असमानता सबसे कम और चिली में सर्वाधिक है।
  • निम्न एवं मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में दक्षिण अफ्रीका एवं नामीबिया में मजदूरी असमानता सर्वाधिक है, जबकि आर्मेनिया और मंगोलिया में न्यूनतम मजदूरी असमानता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, जी-20 समूह के उभरते देशों में केवल मेक्सिको को छोड़कर शेष सभी देशों में वर्ष 2008-2017 के मध्य औसत पारिश्रमिक में वास्तविक वृद्धि सकारात्मक रही है।
  • सऊदी अरब, भारत और इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि लगातार जारी रही, जबकि तुर्की में यह वर्ष 2017 में करीब 1 प्रतिशत कम हुई है।
  • दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में वर्ष 2012-2016 के मध्य शून्य वृद्धि के बाद वर्ष 2016 से सकारात्मक वृद्धि का दौर शुरू हुआ, हालांकि ब्राजील में वर्ष 2015-16 के मध्य वृद्धि ऋणात्मक रही।
  • तेल मूल्यों में गिरावट की वजह से रूस में वर्ष 2015 में वेतन वृद्धि में उल्लेखनीय गिरावट रही, लेकिन इसके बाद इसमें वृद्धि का रुख बन गया।
  • EPIC
  • एपिक (EPIC) का पूर्णरूप है- ‘समान वेतन अंतरराष्ट्रीय गठबंधन’ (Equal Pay International Coalition)।
  • ILO, यूएन वीमेन तथा OECD के नेतृत्व में इस गठबंधन का लक्ष्य सभी स्थानों पर महिलाओं एवं पुरुषों हेतु समान वेतन के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
  • इस गठबंधन को सितंबर, 2017 में लांच किया गया था।

लेखक-शिवशंकर कुमार तिवारी

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