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वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट-2019

World Tuberculosis Report-2019
  • पृष्ठभूमि
  • तपेदिक/यक्ष्मा अथवा टी.बी. जीवाणु जनित एक संक्रामक रोग है। तपेदिक रोग का व्यापक और अद्यतन मूल्यांकन उपलब्ध कराने तथा वैश्विक, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर इस रोग के उपचार, रोकथाम एवं निदान में हुई प्रगति के मूल्यांकन हेतु विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1997 से प्रतिवर्ष ‘वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट’ जारी की जाती है।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 17 अक्टूबर, 2019 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने ‘वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट-2019’ (World Tuberculosis Report-2019) जारी किया।
  • वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट-2019 : महत्वपूर्ण बिंदु
  • वैश्विक तपेदिक  रिपोर्ट-2019 वैश्विक स्तर पर 202 देशों और क्षेत्रों से लिए गए आंकड़ों पर आधारित है।
  • वर्ष 2018 में तपेदिक विश्व स्तर पर मृत्यु के शीर्ष 10 कारणों में से एक था।
  • वैश्विक टी.बी. रिपोर्ट, टी.बी. की घटनाओं और मृत्यु दर में रुझान, टी.बी. के मामले का पता लगाने और उपचार के परिणामों पर डेटा, मल्टीड्रग-प्रतिरोधी टी.बी. (MDR-TB), टी.बी./एच.आई.वी., टी.बी. की रोकथाम, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज तथा वित्तपोषण को शामिल करता है।
  • यह रिपोर्ट वर्ष 2018 में टी.बी. पर पहली संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक में निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को प्रस्तुत करता है।
  • इसके साथ ही यह रिपोर्ट राज्य के प्रमुखों के साथ-साथ डब्ल्यू.एच.ओ. की एंड टी.बी. रणनीति (WHO End T.B. Strategy) और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति को भी प्रकाश में लाता है।
  • वैश्विक स्थिति
  • वर्ष 2018 में विश्वभर में अनुमानतः 10 मिलियन टी.बी. के नए मामले सामने आए।
  • इनमें 5.7 मिलियन पुरुष, 3.2 मिलियन स्त्री और 1.1 मिलियन बच्चे शामिल थे।
  • टी.बी. के नए मामलों में निम्नलिखित 8 देश दो-तिहाई की हिस्सेदारी रखते हैं ; भारत (27%), चीन (9%), इंडोनेशिया (8%), फिलीपींस (6%), पाकिस्तान (6%), नाइजीरिया (4%), बांग्लादेश (4%) और दक्षिण अफ्रीका (3%)।
  • वर्ष 2018 में टी.बी. से मरने वाले लोगों की संख्या 1.5 मिलियन थी, जिसमें 2,51,000 लोग एच.आई.वी. से पीड़ित थे।
  • वर्ष 2000-2018 के मध्य टी.बी. से होने वाली मृत्यु दर में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
  • वर्ष 2018 में अधिकांश उच्च आय वाले देशों में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर टी.बी. के 10 से कम नए मामले प्रकाश में आए।
  • मोजाम्बिक, फिलीपींस और दक्षिण अफ्रीका जैसे कुछ देशों में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर टी.बी. के 500 नए मामले प्रकाश में आए जो कि सर्वाधिक हैं।
  • टी.बी. की देखभाल और रोकथाम (T.B. Care and Prevention)
  • वर्ष 2000-2018 के मध्य टी.बी. के उपचार ने वैश्विक स्तर पर 58 मिलियन लोगों की जान बचाई।
  • वर्ष 2017 में टी.बी. से ग्रसित लोगों के लिए वैश्विक उपचार की सफलता दर 85 प्रतिशत थी।
  • ड्रग रेजिस्टेंट टी.बी. (Drug-Resistant T.B.)
  • वर्ष 2018 में 4,84,000 ऐसे नए मामले प्रकाश में आए, जो टी.बी. के उपचार हेतु सर्वाधिक प्रभावी प्रथम पंक्ति की दवा रिफैम्पिसिन (Rifampicin) के प्रति प्रतिरोधी थे।
  • इनमें से 78 प्रतिशत मामले बहु औषध-प्रतिरोधी टी.बी. के थे।
  • वर्ष 2018 में विश्व स्तर पर बहु औषध-प्रतिरोधी टी.बी. (MDR-T.B.) के 1,87,000 मामलों का पता चला और उन्हें अधिसूचित किया गया।
  • इनमें वैश्विक उपचार की सफलता दर 56 प्रतिशत थी, जो वैश्विक स्तर पर कम थी।
  • वर्ष 2018 में प्रकाश में आए बहु औषध-प्रतिरोधी टी.बी. के मामलों में 6.2 प्रतिशत मामले बड़े पैमाने पर ड्रग-प्रतिरोधी टी.बी. (XDR-TB) के मामले थे।
  • टी.बी. और एच.आई.वी. की सह-महामारी (Co-Epidemics of T.B. and HIV)
  • वर्ष 2018 में एच.आई.वी. के साथ रहने वाले लोगों में टी.बी. के 4,77,000 मामले प्रकाश में आए।
  • इनमें से 86 प्रतिशत लोग एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ले रहे थे।
  • एच.आई.वी. से जुड़े टी.बी. के मामलों का पता लगाने और उपचार करने के मामले में सर्वाधिक अंतराल डब्ल्यू.एच.ओ.     के अफ्रीकी क्षेत्र में दर्ज किया गया, जहां पर एच.आई.वी. से जुड़े टी.बी. का बोझ सबसे ज्यादा था।
  • वर्ष 2018 में टी.बी. निवारक उपचार (T.B. Preventive Treatment) शुरू करने वाले 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 3,49,000 थी।
  • इसमें वर्ष 2015 की अपेक्षा चार गुना की वृद्धि दर्ज करने के बावजूद लक्ष्यित चार मिलियन बच्चे से कम थी।
  • टी.बी. का वित्तपोषण
  • वर्ष 2017 में टी.बी. अनुसंधान और विकास के लिए प्राप्त अनुदान 772 अमेरिकी डॉलर था।
  • यह अनुदान 2 बिलियन यू.एस. डॉलर की अनुमानित आवश्यकता का केवल 39 प्रतिशत है।
  • विश्व में टी.बी. के सर्वाधिक भागीदार देश
  • वर्ष 2018 में टी.बी. के अनुमानित मामलों की वैश्विक स्थिति निम्न प्रकार से है –
  • दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र – 44 प्रतिशत
  • अफ्रीकी क्षेत्र – 24 प्रतिशत
  • पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र – 18 प्रतिशत
  • वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट-2019 में भारत
  • रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले एक वर्ष में तपेदिक के रोगियों की संख्या में लगभग 50,000 की कमी आई है।
  • वर्ष 2017 में भारत में टी.बी. रोगियों की संख्या 27.4 लाख थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 26.9 लाख हो गई।
  • वर्ष 2017 में भारत में प्रति एक लाख लोगों पर टी.बी. के रोगियों की संख्या 204 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 199 हो गई।
  • वर्ष 2017 में भारत में रिफाम्पिसिन (Rifampicin) प्रतिरोधक रोगियों की संख्या 32 प्रतिशत थी, जो कि वर्ष 2018 में बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई।
  • वर्ष 2016 में टी.बी. के नए और पुनः टी.बी. (ड्रग सेंसिटिव) ग्रस्त रोगियों के इलाज की सफलता दर 69 प्रतिशत थी, जो कि वर्ष 2017 में बढ़कर 81 प्रतिशत हो गई।
  • वर्ष 2018 में भारत में टी.बी. के  लगभग 2.69 मिलियन मामले प्रकाश में आए।
  • इनमें से केवल 2.15 मिलियन मामलों की सूचना भारत सरकार के पास मौजूद थी।
  • ऐसे मामलों में लगभग 5,40,000 रोगियों की पहचान नहीं हो पाई।
  • एंड टी.बी. स्ट्रैटेजी (End T.B. Strategy)
  • वर्ष 2014 में विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा वर्ष 2015 के बाद टी.बी. के उन्मूलन की दिशा में डब्ल्यू.एच.ओ. की एंड टी.बी. स्ट्रैटेजी (End T.B. Strategy) को अपनाया गया।
  • इस रणनीति के अंतर्गत वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2030 तक टी.बी. से होने वाली मौतों में 90 प्रतिशत की कमी, टी.बी. के मामलों में 80 प्रतिशत की कमी तथा टी.बी. के इलाज पर खर्च होने वाली भयावह लागत को कम करना शामिल है।
  • सतत विकास लक्ष्य
  • सितंबर, 2015 में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एजेंडा-2030 /सतत विकास लक्ष्य अंगीकृत किया गया।
  • सतत विकास लक्ष्य के अंतर्गत 17 मुख्य विकास लक्ष्य एवं 169 सहायक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
  • एस.डी.जी. लक्ष्य-3 (SDG-3) सभी आयु के लोगों में स्वस्थ जीवन को सुनिश्चित करने और उनके कल्याण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है एवं इसमें 13 सहायक लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं।
  • एस.डी.जी.-3 के सहायक लक्ष्यों में वर्ष 2030 तक एड्स, टी.बी., मलेरिया आदि का उन्मूलन तथा हेपेटाइटिस, जलजन्य तथा अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम करना शामिल है।

सं. वृषकेतु राय