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वेनेजुएला में राजनीतिक और आर्थिक संकट

Political and economic crisis in Venezuela

दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का खनिज तेल संपन्न देश वेनेजुएला इन दिनों गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश के राष्ट्रपति पद पर काबिज निकोलस मादुरो पर विपक्षी दल गैर-कानूनी तरीके से बिना निष्पक्ष चुनाव के पद पर बने रहने और देश के संविधान में बदलाव करने का आरोप लगा रहे हैं।

   इसके साथ ही वेनेजुएला अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश भीषण महंगाई, भूख, बीमारी, अपराध  और प्रवासन की समस्या से जूझ रहा है।

  • संकट की पृष्ठभूमि
  • वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संकट की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी, जब ह्यूगो चावेज देश के राष्ट्रपति थे।
  • गौरतलब है कि चावेज प्रशासन ने बोलिवेरियन क्रांति (Bolivarian Revolution) के तहत देश में लोक-लुभावन नीतियों को लागू किया।
  • इन लोक-लुभावन नीतियों के कारण देश में भ्रष्टाचार, आर्थिक कुप्रबंधन (Economic Mismanagement) और अलोकतांत्रिक शासन को बढ़ावा मिला।
  • इसी संदर्भ में बढ़ते आर्थिक संकट के चलते तत्कालीन राष्ट्रपति चावेज को 2 जून, 2010 को देश में ‘आर्थिक युद्ध (Economic War)’ की घोषणा करनी पड़ी।
  • इसी कड़ी में वर्ष 2013 में चावेज की मृत्यु के बाद उनके निकटतम सहयोगी निकोलस मादुरो देश के राष्ट्रपति बने।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2013 के राष्ट्रपति चुनाव में मात्र 1.5 प्रतिशत के अंतर से चुनाव जीते मादुरो ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए अपने पूर्ववर्ती (ह्यूगो चावेज) की लोक-लुभावन नीतियों को जारी रखा।
  • राष्ट्रपति मादुरो की गलत आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप देश में उपभोक्ता वस्तुओं के लिए वार्षिक मुद्रास्फीति की दर हजारों प्रतिशत बढ़ गई, वहीं देश की अर्थव्यवस्था 20 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से कम होने लगी।
  • राजनीतिक संकट
  • मई, 2018 में दुबारा देश के राष्ट्रपति बने मादुरो पर विपक्षी दल चुनाव में धांधली करने और मजबूत विपक्षी उम्मीदवारों के दमन का आरोप लगाकर उनके पद पर बने रहने को गैर-कानूनी बता रहे हैं।
  • इसी कड़ी में 23 जनवरी, 2019 को राष्ट्रीय संसद (National Assembly) के अध्यक्ष 35 वर्षीय जान गुइडो (Juan Guaido) ने स्वयं को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है।
  • गौरतलब है कि नेशनल असेंबली ने देश के संविधान के अनुच्छेद 233 और 333 का हवाला देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य भार संभालते हैं।
  • ध्यातव्य है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी सहित लगभग दर्जन भर यूरोपीय देशों और वेनेजुएला के पड़ोसी देशों ने भी जान गुइडो को देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दे दी है।
  • राष्ट्रपति मादुरो ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर उनको पद से हटाने का आरोप लगाते हुए अमेरिका और पश्चिम विरोधी देशों-चीन, रूस, ईरान, सीरिया, क्यूबा और वामपंथी विचारों वाले लैटिन अमेरिकी देशों का एक गुट खड़ा कर दिया है।
  • आर्थिक संकट
  • वेनेजुएला में आर्थिक संकट के चलते देश की 90 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने के लिए मजबूर है। इसके साथ ही आधे से अधिक लोगों के पास अपनी मूल खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आय नहीं है।
  • गौरतलब है कि दुनिया के सबसे बड़े खनिज तेल का भंडार उपलब्ध होने के बावजूद राष्ट्रपति मादुरो की गलत आर्थिक नीतियों के कारण वेनेजुएला ‘आर्थिक आपातकाल’ का सामना कर रहा है।
  • राष्ट्रपति मादुरो ने देश की मुद्रा ‘बोलिवार’ का अवमूल्यन कर दिया और तेल की कीमतों में वृद्धि कर दी, जबकि वर्ष 2014 के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में काफी गिरावट आ गई है।
  • परिणामस्वरूप पूरी तरह से (लगभग 98 प्रतिशत) तेल निर्यात पर टिकी वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था ढह गई। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2018 के अंत तक देश की मुद्रास्फीति दर 1,000,000 प्रतिशत थी।
  • वर्ष 2017 में वेनेजुएला को क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा ऋण भुगतान के संदर्भ में दिवालिया घोषित कर दिया गया था।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने राष्ट्रपति मादुरो को हटाने के लिए कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाने के साथ ही सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी यूरोपीय देश जहां राष्ट्रपति मादुरो को पदच्युत करने के लिए प्रयासरत हैं, वहीं वामपंथी विचारधारा वाले रूस, चीन, क्यूबा और निकारागुआ आदि देश मादुरो के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं।

सं. धीरेन्द्र त्रिपाठी