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विश्व सैन्य खर्च प्रवृत्तियां रिपोर्ट, 2018

Stockholm International Peace Research Institute-(SIPRI)
  • स्वीडन की संसद द्वारा वर्ष 1966 में स्थापित ‘स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान’ (SIPRI : Stockholm International Peace Research Institute) संघर्षों, शस्त्रीकरण, शस्त्र नियंत्रण और निशस्त्रीकरण के संदर्भ में अनुसंधान हेतु समर्पित एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थान है।
  • उद्देश्य
  • SIPRI द्वारा विश्व सैन्य खर्च प्रवृत्तियां रिपोर्ट, 2018 पेश करने का उद्देश्य एक ऐसे शांतिपूर्ण विश्व का निर्माण करना हे, जहां असुरक्षा के स्रोतों को पहचाना और समझा जाए, संघर्षों को रोका या हल किया जाए और शांति बनाई रखी जा सके।
  • 29 अप्रैल, 2019 को SIPRI द्वारा विश्व में सैन्य खर्च से संबंधित ‘विश्व सैन्य खर्च प्रवृत्तियां रिपोर्ट, 2018’ (Trends in World Military Expenditure, 2018) प्रकाशित की गर्ई। इस रिपोर्ट में SIPRI ने वैश्विक स्तर पर होने वाले सैन्य खर्च के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।
  • SIPRI द्वारा जारी नए डेटा के अनुसार, वर्ष 2018 में विश्व सैन्य खर्च 1822 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2017 के विश्व सैन्य खर्च से 2.6 प्रतिशत अधिक है।
  • वर्ष 2018 में सेना पर सर्वाधिक खर्च करने वाला देश अमेरिका (649 बिलियन डॉलर) रहा, जबकि चीन (250 बिलियन अमेरिकी डॉलर), सऊदी अरब (67.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर), भारत (66.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तथा फ्रांस (63.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे तथा पांचवें स्थान पर रहे।
  • इन पांचों देशों का कुल सैन्य खर्च वैश्विक सैन्य खर्च का कुल 60 प्रतिशत है।
  • वर्ष 2018 में मात्र अमेरिका और चीन का ही सैन्य खर्च वैश्विक सैन्य खर्च का 50 प्रतिशत रहा।
  • वर्ष 2017 में चौथे स्थान पर रहा रूस वर्ष 2018 में 61.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर सैन्य खर्च के साथ छठवें स्थान पर रहा।
  • पाकिस्तान 11.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सैन्य खर्च के साथ वर्ष 2018 में 20वें स्थान पर रहा।
  • वर्ष 2018 में विश्व सैन्य खर्च वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 2.1 प्रतिशत रहा, जो प्रति व्यक्ति के संदर्भ में 239 अमेरिकी डॉलर है।
  • अमेरिका का सैन्य खर्च सात वर्षों में पहली बार वर्ष 2018 में बढ़कर 649 बिलियन अमेरिकी डॉलर (वृद्धि 4.5%) हो गया। चीन ने अपने सैन्य खर्च में 5.0 प्रतिशत और भारत ने 3.1 प्रतिशत की वृद्धि की है।
  • सऊदी अरब ने अपने सैन्य खर्च में 6.5 प्रतिशत, फ्रांस ने 1.4 प्रतिशत और रूस ने 3.5 प्रतिशत की कमी की है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, मध्य अमेरिका और कैरेबियन, मध्य यूरोप, मध्य और दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में सैन्य खर्च में वृद्धि हुई है।
  • पूर्वी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, ओशिनिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में सैन्य खर्च में कमी आई है।
  • मध्य-पूर्व के देशों का कुल सैन्य व्यय, जिसके लिए डेटा उपलब्ध है, में भी कमी आई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में भारत का सैन्य खर्च 66.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो इसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 2.4 प्रतिशत है।
  • भारत द्वारा रक्षा पर खर्च होने वाले 66.5 बिलियन यानी 4.6 लाख करोड़ रुपये में रक्षा पेंशन भी शामिल है।
  • शेष एक-तिहाई राशि में रोजाना का खर्चा, वेतन और 15 लाख सुरक्षा बलों का रख-रखाव किया जाता है।
  • सेना को आधुनिक बनाने और उन्हें नए हथियार देने में 4.6 लाख करोड़ रुपये का मात्र एक-चौथाई हिस्सा (25%) ही खर्च किया जाता है।
  • भले ही भारत, रूस को हटाकर रक्षा पर खर्च करने वाला चौथा बड़ा देश बन गया हो, लेकिन भारतीय सेना कई क्षेत्रों में आधुनिकीकरण और नए हथियारों की कमी से अभी भी जूझ रही है।
  • इसमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियों से लेकर बुनियादी इंफ्रेंट्री हथियार और रात में लड़ने की काबिलियत शामिल है।
  • सैन्य खर्च का इस तरह से बढ़ाया जाना स्वयं को सुरक्षित करने से अधिक विश्व के असुरक्षित होने को दर्शाता है।
  • अमेरिका का वर्ष 2018 में सैन्य खर्च 649 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो कि विश्व के अन्य देशों को भी अपने सैन्य खर्च को बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है, जो कि विश्व शांति के लिए विध्वंसक है।

सर्वाधिक सैन्य खर्च वाले 5 देश

रैंक

देश

खर्च बि. अमेरिकी डॉलर में (2018)

2018

2017

1

1

अमेरिका

649

2

2

चीन

[250 ]

3

3

सऊदी अरब

[67.6 ]

4

5

भारत

66.5

5

6

फ्रांस

63.8

 

 

विश्व

1822

नोट : [  ]SIPRI अनुमान

15 सार्वधिक सैन्य खर्च वाले देशों का वैश्विक सैन्य खर्च में हिस्सा

सं. बृजेश रावत