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विश्व यातायात सूचकांक, 2018

World Traffic Index, 2018
  • पृष्ठभूमि
  • स्मार्ट सिटी बनाने की संकल्पना से प्रेरित होकर विश्व के 56 देशों में व्यवसायों को सशक्त बनाने के लिए लोकेशन अवेयर टेक्नोलॉजी कंपनी टॉमटॉम (Location-Aware Technologies Company- TomTom) द्वारा विश्व यातायात सूचकांक, 2018 प्रदर्शित किया गया है। इसके द्वारा विश्व के 403 भीड़-भाड़ वाले शहरों में अनियंत्रित होती यातायात व्यवस्था का आकलन एवं उसके दुष्परिणाम की व्याख्या करने तथा सटीक समाधान प्रस्तुत कर प्रदूषणमुक्त पर्यावरण की ओर बढ़ने का आह्वान किया गया है।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • जून, 2019 में एम्स्टर्डम (Amsterdam) स्थित लोकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी टॉमटॉम (Location Technology Company-TomTom) द्वारा विश्व यातायात सूचकांक, 2018 जारी किया गया।
  • इस सूचकांक में विश्व के सर्वाधिक यातायात (Traffic) वाले शहरों में मुंबई को प्रथम तथा दिल्ली को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है।
  • सूची के महत्वपूर्ण तथ्य
  • विश्व यातायात सूचकांक, 2018 में विश्व के 56 देशों के 403 शहरों को शामिल किया गया है, जिसमें 13 नए शहर भी शामिल हैं।
  • इस सूचकांक में कोलंबिया के बोगोटा शहर को दूसरा, पेरू के लीमा शहर को तीसरा तथा रूस की राजधानी मास्को को पांचवां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • सूचकांक के अनुसार, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सड़कों पर अधिक जाम लगने के कारण लोगों को अपनी यात्रा पूर्ण करने में 65 प्रतिशत अधिक समय लगता है, जबकि राजधानी दिल्ली में 58 प्रतिशत अधिक समय लगता है।
  • ट्रैफिक जाम का दुष्प्रभाव
  • विश्व का दूसरा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश भारत में बढ़ते यातायात से ध्वनि तथा वायु प्रदूषण में तीव्र वृद्धि हो रही है, जिससे तन, मन एवं धन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation : WHO) द्वारा वर्ष 2016 में किए गए अध्ययन में विश्व के सर्वाधिक 20 प्रदूषित शहरों में भारत के 14 शहरों को शामिल किया गया था।
  • ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म (Global Consultancy Firm) द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक समस्या के कारण अर्थव्यवस्था का बड़ा भाग खर्च हो जाता है।
  • एक अनुमान के अनुसार, भारत का 20 प्रतिशत से अधिक ईंधन (पेट्रोल, डीजल, CNG इत्यादि) जाम के कारण बेवजह खर्च हो जाते हैं।
  • सघन ट्रैफिक के कारण सर्वाधिक दुर्घटना में दिल्ली का प्रथम (विश्व में तृतीय) स्थान है, जबकि यातायात दुर्घटना के कारण अन्य देश की अपेक्षा भारत में सर्वाधिक 120,000 लोगों की मृत्यु प्रतिवर्ष हो जाती है।
  • बेहतर यातायात प्रबंधन का अभाव, रेड लाइट का उल्लंघन, सही लेन में वाहन न चलाने जैसी समस्याओं के कारण आपातकालीन वाहनों जैसे- एम्बुलेंस, सैन्य वाहन इत्यादि को असुविधा होती ही है, साथ में आम जन को भी परेशानी होती है।
  • सटीक समाधान
  • ट्रैफिक समस्या के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार को विविध क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है।
  • सर्वप्रथम सड़कों का उचित प्रबंधन करना चाहिए, जिसमें सड़कों का चौड़ीकरण, नई सड़कों का निर्माण, अंडरपास तथा फ्लाइओवर जैसी परियोजनाओं को बढ़ावा देना प्रमुख है।
  • इसके साथ ही यातायात के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कर इसका उल्लंघन करने वालों को सजा एवं जुर्माने का कठोर प्रावधान करना बेहद आवश्यक है।
  • इसके अलावा सरकार के साथ व्यक्ति को भी सार्वजनिक वाहनों का अधिकाधिक प्रयोग तथा निजी वाहनों का न्यूनतम प्रयोग करने को प्रोत्साहन देना चाहिए।
  • चीन की तरह भारत में भी ‘वन फेमिली, वन कार’ नीति लागू करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
  • बढ़ते यातायात से व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र को होने वाले गंभीर खतरों का सम्यक प्रचार-प्रसार करना तथा सुगम यातायात को बढ़ावा देने के लिए नए-नए निर्देशों का समयानुसार पालन सुनिश्चित करना अति आवश्यक है।
  • निष्कर्ष
  • भारत सहित विश्व में बढ़ती जनसंख्या के साथ यातायात की समस्या भी बढ़ रही है। यदि समय रहते जनसंख्या के निश्चित अनुपात में वाहनों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ट्रैफिक जाम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बालक से लेकर वृद्ध तक, जंगल से लेकर पहाड़ तक तथा नदियों से लेकर महासागर तक सभी प्रभावित हो रहें हैं, इसलिए इस समस्या का निदान समस्या के विकराल होने से पूर्व किया जाना अति आवश्यक है।