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विश्व खाद्य सुरक्षा एवं पोषण स्थिति, 2019

The State of Food Security and Nutrition in the World
  • ‘विश्व खाद्य सुरक्षा एवं पोषण स्थिति’ (The State of Food Security and Nutrition in the World) एक वार्षिक रिपोर्ट है, जो संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), कृषि विकास अंतरराष्ट्रीय कोष (IFAD), यूनिसेफ (UNICEF), डब्ल्यूएफपी (World Food Programme) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है।
  • वर्तमान संदर्भ   
  • 15 जुलाई, 2019 को संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) द्वारा ‘विश्व खाद्य सुरक्षा एवं पोषण स्थिति, 2019’ नामक रिपोर्ट जारी किया गया।
  • यह रिपोर्ट भूख को समाप्त करने, खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने और पोषण में सुधार लाने तथा पोषण के क्षेत्र में विश्लेषणात्मक प्रगति की सूचना उपलब्ध कराने के साथ ही सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 को प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों से अवगत कराती है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • गौरतलब है कि वर्ष 2018 में 820 मिलियन (82 करोड़) से अधिक लोगों के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं था।
  • लगभग एक दशक की प्रगति के बाद विगत तीन वर्षों में भुखमरी से ग्रस्त लोगों की संख्या में सतत रूप से वृद्धि देखी गई।
  • विश्व भर में अल्प पोषित/न्यून पोषित लोगों की संख्या
वर्ष संख्या (मिलियन में)
2015 785.4
2016 796.5
2017 811.7
2018 821.6

  • वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर में प्रत्येक नौवां व्यक्ति भुखमरी से ग्रस्त है, जबकि अफ्रीका में तो हर पांचवां व्यक्ति भूख से पीड़ित है।
  • लगभग 2 बिलियन लोग (वैश्विक जनसंख्या का 26.4%) खाद्य सुरक्षा के मध्यम स्तर (Moderate Level) और खाद्य सुरक्षा के गंभीर स्तर (Severe Level) से प्रभावित हैं।
  • 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में मातृत्व और बाल कुपोषण का योगदान 45 प्रतिशत है।
  • वर्ष 2015 में विश्व स्तर पर लगभग 20.5 मिलियन या हर सातवां जीवित बच्चा, जन्म के समय कम वजन से प्रभावित था।
  • बच्चों में बौनापन (Stunting) अर्थात उम्र के सापेक्ष छोटा कद की समस्या में कमी पाई गई। वर्ष 2012 में ऐसे बच्चों की संख्या 165.8 मिलियन थी, जो वर्ष 2018 में कम होकर 148.9 मिलियन हो गई।
  • वर्ष 2018 में वैश्विक स्तर पर 5 वर्ष तक के 40.1 मिलियन बच्चे अधिक वजन (Overweight) से ग्रस्त हैं।
  • वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी और बेरोजगारी में वृद्धि तथा आय में गिरावट होने के कारण लोगों का भोजन और आवश्यक सामाजिक सेवाओं तक पहुंच, चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

विश्व में अल्पपोषण की व्यापकता/फैलाव (प्रतिशत में)

  2005 2010 2015 2018
विश्व 14.5 11.8 10.6 10.8
अफ्रीका 21.2 19.1 18.3 19.9
एशिया 17.4 13.6 11.7 11.3
दक्षिण एशिया 21.5 17.2 15.7 14.7
लैटिन व कैरेबियन अमेरिका क्षेत्र 9.1 6.8 6.2 6.5
ओसनिया 5.5 5.2 5.9 6.2
उत्तरी अमेरिका और यूरोप < 2.5 < 2.5 < 2.5 < 2.5
  • सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 का 2nd Goal ‘शून्य भूख’ को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति की निगरानी करना, भूख की समस्या को दूर करना, खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देना और वर्ष 2030 तक कुपोषण के सभी रूपों को समाप्त करना इस रिपोर्ट का प्रमुख लक्ष्य है।
  • खाद्य सुरक्षा एवं पोषण रिपोर्ट : भारत
  • पिछले कुछ वर्षों में भारत के अंदर अल्पपोषण और कुपोषण की दरों में सुधार पाया गया। वर्ष 2006 से 2016 के बीच पांच वर्ष से छोटे बच्चों में स्टंटिंग की दर 48 प्रतिशत से कम होकर 38 प्रतिशत हो गई है।
  • भारत में कुपोषित लोगों की संख्या वर्ष 2004-2006 के सापेक्ष 25 करोड़ 39 लाख से कम होकर 2016-18 में 19 करोड़ 44 लाख हो गई है, साथ ही 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग में मोटापे के शिकार लोगों की संख्या में वृद्धि देखा गया।
  • भारत में पिछले कुछ वर्षों से भुखमरी से ग्रस्त लोगों की संख्या में कमी पाई गई। यह कमी लोक कल्याणकारी योजनाओं यथा पीडीएस के द्वारा मुफ्त या नाममात्र के मूल्य पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना, मनरेगा या दूसरी योजनाओं के द्वारा निम्न मध्यम वर्ग को नियमित काम प्राप्त होने से आम-आदमी के खान-पान एवं जीवन शैली में सुधार पाया गया है। जिससे कुपोषण की समस्या से ग्रस्त व्यक्तियों की संख्या में कमी देखी गई।
  • दूसरी तरफ विकास प्रक्रिया के द्वारा मध्यम आय वर्ग के आय में वृद्धि होने से उनके जीवन शैली (खान-पान) में बदलाव आया, जिससे मोटापे को बढ़ावा मिला।
  • विकासशील देशों में अल्पपोषण की समस्या अधिगम (Learning) परिणाम तथा उत्पादकता, दोनों ही दृष्टि से उच्च आर्थिक लागत का कारण बनती है। अतः बच्चों के आधारभूत विकास के लिए शिक्षा एवं पोषण के मध्य एक मजबूत सह-संबंध पाया जाता है।
  • निष्कर्ष
  • यह उचित ही है कि बिना खाद्य सुरक्षा की समस्या हल किए बगैर सतत विकास लक्ष्य 2030 को प्राप्त नहीं किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा इच्छा शक्ति की कमी विशेष रूप से मानव निर्मित कारण अर्थात आपसी संघर्ष, आर्थिक संकट, जलवायु परिवर्तन, लोगों का प्रवास आदि के चलते भूख की समस्या पिछले कुछ वर्षों से बढ़ती जा रही है।