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विश्व आर्थिक परिदृश्य, 2019

World Economic Outlook, 2019
  • पृष्ठभूमि
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा प्रकाशित विश्व आर्थिक परिदृश्य का पूर्वानुमान है कि एक तरफ जहां विश्व की तमाम विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर काले बादल मंडरा रहे हैं, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था में आगामी वर्षों में भी तेज संवृद्धि दर बरकरार रहेगी।
  • वैश्विक परिप्रेक्ष्य
  • अप्रैल, 2019 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा ‘विश्व आर्थिक परिदृश्य’ (वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक) रिपोर्ट प्रकाशित की गई, जिसका शीर्षक था ‘संवृद्धि सुस्त, पुनः प्राप्ति अनिश्चित (Growth Slowdwon, Precarious Recovery)।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने विश्व आर्थिक परिदृश्य, 2019 में निम्नलिखित पूर्वानुमान प्रकाशित किए हैं-
  • रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था की संवृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था की संवृद्धि दर वर्ष 2019 में 3.3 प्रतिशत रहेगी, जबकि वर्ष 2017 व 2018 में क्रमशः 4.0 व 3.6 प्रतिशत थी।
  • वैश्विक विकास दर की संवृद्धि में कमी का प्रमुख कारण अमेरिका-चीन के मध्य व्यापार तनाव (ट्रेड वार), तुर्की-अर्जेंटीना में आर्थिक दबाव, चीन की सख्त साख नीतियां तथा विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय तंगी है।
  • रिपोर्ट में वर्ष 2020 के पश्चात वैश्विक विकास दर 3.5 प्रतिशत के आस-पास होने की बात कही गई है।
  • रिपोर्ट ने वर्ष 2020 में चीन की संवृद्धि दर 6.1 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 तक संवृद्धि दर कम होकर 5.5 प्रतिशत तक होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।
  • रिपोर्ट ने ऐसा अनुमान लगाया है कि वर्ष 2022 तक विकसित अर्थव्यवस्थाओं की संवृद्धि दर कम होकर 1.6 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।
  • विकासशील देश व उनके तेजी से उभरते हुए बाजार विकसित देशों के सापेक्ष तीव्र गति से विकास कर रहे हैं, जिस कारण इनकी संवृद्धि दर 4.8 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
  • विश्व आर्थिक परिदृश्य में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 2019-20 में संवृद्धि की ओर अग्रसर है, जिसका प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में कमी व मुद्रास्फीति का दबाव कम होना है।

संस्थानों द्वारा (वैश्विक एवं राष्ट्रीय) भारत की संवृद्धि दर का प्रक्षेपण : (प्रतिशत में)

संस्थान वर्ष 2019-20 वर्ष 2020-21
1. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष 7.3
2. विश्व बैंक 7.5
3. एशियाई विकास बैंक 7. 2
4. फ़िच (क्रेडिट रेटिंग एजेंसी) 6.8
5. भारतीय रिजर्व बैंक 7.2
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की यह संवृद्धि दर निजी उपभोग एवं औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि से प्रेरित है।
  • विश्व आर्थिक परिदृश्य
  • विश्व आर्थिक परिदृश्य एक सर्वेक्षण है, जिसका प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • ध्यातव्य है कि विश्व आर्थिक परिदृश्य वर्ष में दो बार प्रकाशित की जाती है, जिसमें विश्व अर्थव्यवस्था की मध्यावधिक समीक्षा/अनुमान प्रस्तुत किया जाता है।

सं. अश्वनी सिंह