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विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि

Increase in foreign exchange reserves
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 21 जून, 2019 को समाप्त समीक्षाधीन सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.215 अरब डॉलर बढ़कर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर 426.42 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में वृद्धि के चलते मुद्रा भंडार में तेजी दर्ज की गई है। यह विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक है। ध्यातव्य है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार इससे पहले 13 अप्रैल, 2018 को समाप्त सप्ताह में 426.028 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। लेकिन, तब से इसमें काफी उतार-चढ़ाव हुआ है। पिछले समीक्षाधीन सप्ताह में भंडार 1.358 अरब डॉलर गिरकर 422.2 अरब डॉलर पर था।
  • विदेशी मुद्रा भंडार के घटक
  • रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 21 जून, 2019 को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 4.202 अरब डॉलर बढ़कर 398.649 अरब डॉलर हो गई। इस दौरान देश का स्वर्ण भंडार 22.958 अरब डॉलर के पूर्व-स्तर पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से विशेष आहरण अधिकार 42 लाख डॉलर बढ़कर 1.453 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास देश का भंडार 96 लाख डॉलर बढ़कर 3.354 अरब डॉलर हो गया।
  • पृष्ठभूमि
  • हाल ही में रिजर्व बैंक ने डॉलर-रुपये विनिमय कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इसने मुद्रा भंडार की वृद्धि में मदद की। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से इसका पता चलता है। 29 मार्च, 2019 को समाप्त समीक्षाधीन सप्ताह में लगातार चौथे हफ्ते विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई और ये बढ़कर 412 अरब डॉलर के लगभग पहुंचा। वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ाने की कोशिशों के तहत रिजर्व बैंक ने 26 मार्च, 2019 को डॉलर-रुपये की अदला-बदली नीलामी आयोजित की थी। यह पांच अरब डॉलर की थी। इस नीलामी में उसे लगभग 16 अरब डॉलर की बोलियां प्राप्त हुईं। इस नीलामी की सफलता से उत्साहित होकर केंद्रीय बैंक (RBI) ने 23 अप्रैल, 2019 को एक बार फिर 3 वर्ष की अवधि के लिए 5 अरब डॉलर की ‘स्वैप’ (अदला-बदली) नीलामी आयोजित करने की घोषणा की। फलतः 26 अप्रैल, 2019 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार पुनः बढ़कर 418 अरब डॉलर तक पहुंच गया। उसके बाद से समीक्षाधीन सप्ताहों में होने वाले क्रमिक परिवर्तन इस प्रकार हैं-
3 मई, 2019 418.7 अरब डॉलर (लगभग यथावत)
10 मई, 2019 420 अरब डॉलर (लगभग 2 अरब डॉलर की वृद्धि)
17 मई, 2019 418 अरब डॉलर (लगभग 2 अरब डॉलर की वृद्धि)
24 मई, 2019 420 अरब डॉलर (लगभग 2 अरब डॉलर की वृद्धि)
31 मई, 2019 421.9 अरब डॉलर (लगभग 2 अरब डॉलर की वृद्धि)
7 जून, 2019 423.5 अरब डॉलर (लगभग डेढ़ अरब
14 जून, 2019 422.2 अरब डॉलर (लगभग 1.3 अरब
21 जून, 2019 426.42 अरब डॉलर (अब तक का सबसे उच्चतम स्तर)
  • विदेशी मुद्रा भंडार
  • विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर वह अपनी देनदारियों का भुगतान कर सकें। यह भंडार एक या एक से अधिक मुद्राओं में रखे जाते हैं, जिनमें ज्यादातर ‘डॉलर’ और कुछ हद तक ‘यूरो’ मुद्रा शामिल होते हैं। विदेशी मुद्रा भंडार को फॉरेक्स या एफएक्स रिजर्व भी कहा जाता है। इसके घटकों में विदेशी बैंक नोट, विदेशी बैंक जमा, विदेशी ट्रेजरी बिल और अल्पकालिक व दीर्घकालिक विदेशी सरकारी प्रतिभूतियां शामिल होती हैं। इसके अलावा, स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जमा राशि भी विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा होती हैं।
  • ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
  • देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम योगदान होता है। नवंबर, 1990 से जून, 1991 तक सात महीनों के लिए देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। राजनीतिक हालात अस्थिर थे और भारत की अर्थव्यवस्था भुगतान संकट में फंसी हुई थी। इसी समय रिजर्व बैंक ने 47 टन सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने का निर्णय लिया। उस समय की गंभीर स्थिति का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था। यह राशि तीन सप्ताह के आयात के लिए भी पर्याप्त नहीं थी।