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‘लोया जिरगा’ शांति सम्मेलन

  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • सप्ताह भर चलने वाले ‘लोया जिरगा’ (Loya Jirga) नाम के विशाल शांति सम्मेलन का आयोजन अफगानिस्तान के काबुल शहर में किया गया, जिसका आधिकारिक समापन 3 मई, 2019 को हुआ।
  • सम्मेलन का उद्देश्य
  • लोया जिरगा’ अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी, जिसके समापन सत्र के पश्चात प्रेस वार्ता में, प्रतिनिधियों द्वारा सभी पक्षों से ‘तत्काल एवं स्थायी’ संघर्ष विराम को लागू करने की मांग की गई।
  • लोया जिरगा के बारे में
  • ‘लोया जिरगा’ अफगानिस्तान की एक अनूठी संस्था है, जिसमें पष्तून, ताजिक, हजारा और उज्बेक कबायली नेता शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें शिया एवं सुन्नी भी शामिल होते हैं। यहां पर, यह सभी लोग एकत्रित होकर देशहित (अफगानिस्तान) में निर्णय लेते हैं।
  • ‘लोया जिरगा’ एक पश्तो भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘महापरिषद’ होता है। सैकड़ों वर्ष पुरानी यह संस्था सलाहकारी सिद्धांत (इस्लामिक शूरा) पर कार्य करती है।
  • अभी तक ‘लोया जिरगा’ नामक परिषद का उपयोग आपसी झगड़े सुलझाने, सामाजिक सुधारों पर विचार करने व नए संविधान को स्वीकृति प्रदान करने के संबंध में किया जाता रहा है।
  • ‘लोया जिरगा’ का महत्व
  • संपूर्ण अफगान रिवायत में ‘लोया जिरगा’ एक आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है। अतः किसी भी मुद्दे पर ‘लोया जिरगा’ की सहमति संपूर्ण अफगान पर अपना प्रभाव डालती है। इसी प्रभाव के कारण इतिहास में भी कुछ शासकों ने इसका लाभ उठाया है।
  • 1747 ई. में आयोजित ‘लोया जिरगा’ में अहमद खान दुर्रानी को अफगानिस्तान का पहला शासक नियुक्त किया गया था।
  • वर्ष 1924 में आयोजित ‘लोया जिरगा’ में अफगानिस्तान के संविधान को स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार अफगानिस्तान में, संविधान के बदलते स्वरूपों को समय-समय पर ‘लोया जिरगा’ की सहमति प्रदान की जाती रही है।
  • भारतीय संदर्भ
  • भारत, अफगानिस्तान के विकास में मुख्य सहभागी है, जो वहां पर दशकों से विकासात्मक व अवसंरचनात्मक गतिविधियों में संलग्न है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता व अशांति से भारत को भी अधिक नुकसान (मानवीय व भौतिक) उठाना पड़ता है। अतः ‘लोया जिरगा’ जैसी महापरिषद के सम्मेलन से यदि इस क्षेत्र में शांति स्थापित होती है, तो भारत पर भी इसके बहुआयामी प्रभाव परिलक्षित होंगे।
  • क्षेत्र में शांति स्थापित होने से आतंकवादी गतिविधियों को कम करने में मदद मिलेगी।
  • क्षेत्रीय शांति व स्थिरता से मध्य एशिया व अन्य पड़ोसी देशों से व्यापार में वृद्धि हो सकती है।
  • ‘लोया जिरगा’ मुख्यतया तालिबान समर्थित अशांति व अस्थिरता को समाप्त करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी, लेकिन तालिबान नेतृत्व इसमें सम्मिलित ही नहीं हुआ, जबकि वह अमेरिकी नेतृत्व से बात-चीत करने में संलग्न है।

सं. सचिन कुमार वर्मा