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राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण परियोजना

National Rural Economic Conversion Project
  • वर्तमान संदर्भ
  • 19 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण परियोजना’ को मंजूरी प्रदान किया। ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण परियोजना’ (एनआरईटीपी) को दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत शुरू किया गया है। इस परियोजना को विश्व बैंक द्वारा ऋण सहायता प्रदान किया गया है।
  • उद्देश्य एवं लाभ
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण परियोजना का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं के स्वामित्व वाली और महिलाओं के नेतृत्व वाले कृषि एवं गैर-कृषि उद्यमों को बढ़ावा देना।
  • महिलाओं को ऐसे व्यवसाय के लिए सक्षम बनाना, जिससे उनकी पहुंच वित्त बाजार तक हो सके एवं वे रोजगार का सृजन कर सकें।
  • एनआरईटीपी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सहायता एवं उच्चस्तरीय उपायों से आजीविका संवर्धन एवं वित्तीय सुविधा में वृद्धि होगी।
  • मुख्य विशेषताएं
  • एनआरईटीपी के अंतर्गत वित्तीय समावेशन के वैकल्पिक माध्यमों का सृजन करना, ग्रामीण उत्पादों के आस-पास मूल्य शृंखला का निर्माण करना, आजीविका संवर्धन में नवोन्मेषी मॉडलों को प्रस्तुत करने एवं डिजिटल वित्त की सुविधा एवं रोजगार से संबंधित विभिन्न पहलों को बढ़ावा देने के लिए नवोन्मेषी परियोजनाएं आरंभ की जाएंगी।
  • एनआरईटीपी एवं विश्व बैंक
  • विश्व बैंक एवं भारत सरकार ने मार्च, 2019 में राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण परियोजना के लिए 250 मिलियन डॉलर का समझौता किया।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण परियोजना जुलाई, 2011 में विश्व बैंक द्वारा अनुमोदित 500 मिलियन डॉलर की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका परियोजना का अतिरिक्त वित्तपोषण है।
  • दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
  • दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण योजना है। एनआरएलएम का प्रारंभ वर्ष 2011 में किया गया था। एनआरएलएम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में गरीबी को कम करना तथा सतत एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण समुदाय में स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना है। वर्तमान में एनआरएलएम परियोजना देश के 13 राज्यों, 162 जिलों और 575 ब्लॉकों में पंचायती राज संस्थानों एवं समुदाय आधारित संगठनों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है।

लेखक-अनुज तिवारी