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राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019

National Mineral Policy, 2019
  • 28 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा तीसरी ‘राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019’ को मंजूरी प्रदान की गई।
  • ‘राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019’ वर्ष 2008 में घोषित ‘राष्ट्रीय खनिज नीति, 2008’ का स्थान लेगी। वर्ष 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका (सिविल) संख्या 114/2014, सामान्य कारण बनाम भारत संघ एवं अन्य के वाद में 2 अगस्त, 2017 को निर्णय देते हुए भारत सरकार को राष्ट्रीय खनिज नीति, 2008 की पुनर्समीक्षा कर एक नवीन एवं अधिक प्रभावशाली राष्ट्रीय खनिज नीति के निर्माण का निर्देश दिया था। शीर्ष न्यायालय के इस निर्देश के अनुपालन हेतु केंद्रीय खनन मंत्रालय द्वारा 14 अगस्त, 2017 को केंद्रीय खनन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. के. राजेश्वर राव की अध्यक्षता में 29 सदस्यीय समिति गठित की गई थी।
  • इस समिति में केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों, राज्य सरकारों, उद्योग संघों एवं खान मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालयों के सदस्य शामिल थे। इस समिति ने संबंधित गैर-सरकारी संगठनों तथा संस्थागत निकायों को समिति के बैठकों में विचार-विमर्श हेतु भी आमंत्रित किया था।
  • इसके बाद खनन मंत्रालय ने समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर पीएलसीपी (PLCP Process) प्रक्रिया के अंतर्गत प्राप्त हितधारकों की टिप्पणियों एवं सुझावों के आधार पर राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019 को अंतिम रूप प्रदान किया था।
  • राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019 का मुख्य उद्देश्य एक अधिक प्रभावशाली, अर्थपूर्ण एवं कार्यान्वयन योग्य नीति का निर्माण करना है, जिसके द्वारा भविष्य में अधिक पारदर्शिता, श्रेष्ठ विनियमन एवं प्रवर्तन, संतुलित सामाजिक एवं आर्थिक संवृद्धि के साथ-साथ सतत खनन प्रथाओं को उत्पन्न किया जा सके।
  • राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019 में खनन क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले विभिन्न उपबंध शामिल हैं। जैसे-
  • आवीक्षण परमिट (Reconnaissance Permit : RP) या पूर्वेक्षण लाइसेंस (Prospecting licence : PL) धारकों के लिए पहले अस्वीकार के अधिकार (Right of First Refusal) की शुरुआत।
  • अन्वेषण कार्य हेतु निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देना।
  • राजस्व साझा के आधार पर आरपी-सह-पीएल-सह-एमएल (ML : Mining Lease) हेतु नए क्षेत्रों में नीलामी करना।
  • खनन संस्थाओं के विलय और अधिग्रहण को प्रोत्साहन देना।
  • निजी क्षेत्र के खनन क्षेत्रों को बढ़ावा देने हेतु खनन पट्टों के हस्तांतरण एवं समर्पित खनिज गलियारों का निर्माण करना।
  • वर्ष 2019 की राष्ट्रीय खनिज नीति में निजी क्षेत्र के खनन कार्यों हेतु वित्त पोषण को प्रोत्साहित करने एवं अन्य देशों में निजी क्षेत्र द्वारा खनिज परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने हेतु ‘खनन गतिविधि’ को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाना प्रस्तावित है।
  • इस नीति में यह भी उल्लेखित है कि खनिज हेतु दीर्घावधि आयात-निर्यात नीति के द्वारा निजी क्षेत्र को व्यवसाय में श्रेष्ठतर योजना का निर्माण करने तथा उसमें स्थिरता लाने में सहायता प्राप्त होगी।
  • इस नीति के अंतर्गत निजी क्षेत्र को भागीदारी हेतु अधिक अवसर प्रदान करने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों को दिए गए आरक्षित क्षेत्रों को युक्तिसंगत बनाने का उल्लेख किया गया है। इसके अंतर्गत जिन आरक्षित क्षेत्रों का उपयोग नहीं किया गया है या जहां खनन गतिविधियों की शुरुआत नहीं हुई है, की नीलामी होनी चाहिए।
  • इस नीति में निजी क्षेत्र को सहायता प्रदान करने हेतु वैश्विक मानदंडों के आधार पर टैक्स, लेवी एवं रॉयल्टी को युक्तिसंगत बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।
  • राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019 में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन निम्नलिखित हैं-
  • नीति के विजन (Vision) के रूप में ‘मेक इन इंडिया’ और लैंगिक समानता पर विशेष ध्यान देना।
  • खनिजों के विनियमन हेतु ई-प्रशासन, सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) सक्षम प्रणाली, जागरूकता तथा सूचना अभियान आदि को शामिल किया गया है।
  • स्वीकृति मिलने में विलंब होने की स्थिति में ऑनलाइन पोर्टल में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे उच्च स्तर पर मामलों को शीघ्रता से निपटाया जा सके।
  • खनन पट्टा भूमि प्रणाली के अंतर्गत खनिज संसाधनों तथा पट्टे पर दी गई भूमि का डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
  • नई नीति के अंतर्गत खनिजों के परिवहन हेतु तटीय तथा अंतर्देशीय जलमार्ग पर विशेष ध्यान दिया गया है। नीति में खनिजों के परिवहन को सुविधाजनक बनाने हेतु समर्पित खनिज गलियारे के निर्माण का उल्लेख के साथ-साथ परियोजना से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों एवं निवासियों के न्यायसंगत विकास हेतु जिला खनिज निधि के उपयोग किए जाने का उल्लेख है।
  • इस नीति में अंतर-पीढ़ी समानता (Inter-Generational Equity) के विचार का उल्लेख किया गया है। इसके अंतर्गत वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के कल्याण की बात कही गई है। साथ ही नीति में अंतर मंत्रालय निकाय के गठन का भी उल्लेख है, जो सतत विकास सुनिश्चित करने हेतु तंत्र को संस्थागत रूप प्रदान करेगा।
  • ऐसी संभावना है कि नई राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019 अधिक प्रभावी नियमन सुनिश्चित करेगी।
  • यह नीति भविष्य में सतत खनन क्षेत्र विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ खनन परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों के निवासियों के समस्याओं का भी समाधान करेगी।
  • इस नीति में खनिज क्षेत्र हेतु दीर्घावधि के आयात-निर्यात नीति का प्रस्ताव है। इससे खनिज गतिविधियों में स्थिरता आएगी तथा बड़े पैमाने पर होने वाली वाणिज्यिक खनिज गतिविधि में निवेश आकर्षित होगा।
  • हालांकि खनिज संपदा दीर्घावधि में एक गैर-नवीकरणीय संसाधन है, फिर भी यह राष्ट्र के विकास हेतु एक अनिवार्य घटक है। खनिजों के सर्वेक्षण एवं अन्वेषण तथा संसाधनों का अनुकूलतम प्रबंधन और समय पर उपयोग राष्ट्रीय महत्व के मामले हैं। इस तीसरी राष्ट्रीय खनिज नीति की सफलता काफी हद तक अपने अंतनिर्हित सिद्धांतों और उद्देश्यों को पूरा करने हेतु एक राष्ट्रीय सहमति पर निर्भर करेगी।
राष्ट्रीय खनित नीति की सूची 1. राष्ट्रीय खनिज नीति, 1993 2. राष्ट्रीय खनिज नीति, 2008 3. राष्ट्रीय खनिज, नीति, 2019

सं. ललिन्द्र कुमार