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राष्ट्रपति की त्रिदेशीय राजकीय यात्रा

President of the tri-nation state visit
  • 25 मार्च से 2 अप्रैल, 2019 के मध्य भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद क्रोएशिया, बोलीविया एवं चिली की राजकीय यात्रा पर रहे। यूरोपीय राष्ट्र क्रोएशिया 25 जून, 1991 को पूर्व यूगोस्लाविया से पृथक होकर स्वतंत्र राष्ट्र बना था। भारत ने क्रोएशिया को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मई, 1992 में मान्यता प्रदान करते हुए 9 जुलाई, 1992 को इसके साथ अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की थी। परंतु भारत एवं क्रोएशिया के मध्य पूर्व यूगोस्लाविया के समय से ही मित्रवत संबंध रहे हैं। भारत और पूर्व यूगोस्लाविया के मध्य होने वाले द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में क्रोएशिया की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस व्यापार का दो-तिहाई से अधिक भाग क्रोएशिया क्षेत्र से होता था। इस व्यापार में भारत द्वारा 1970 एवं 1980 के दशकों में क्रोएशियाई पोतों की खरीद भी शामिल है। वर्तमान समय में क्रोएशिया से राजनीतिक स्तर पर मधुर द्विपक्षीय संबंध स्थापित हैं परंतु मार्शल टीटो युग की तुलना में आर्थिक संबंध पिछड़ गए हैं। दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया से जहां भारत के मधुर एवं मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, वहीं चिली के साथ भारत के संबंधों की विशेषता गर्मजोशी, मैत्री तथा व्यापक श्रेणी के मुद्दों पर आपसी विचारों की समानता होना है। चिली ने न केवल अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खतरे के संबंध में भारत की चिंताओं को साझा किया है अपितु भारत पर हुए सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों की निंदा भी की है। दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार एवं सुधारों पर समान विचार रखते हैं। चिली ने वर्ष 2017 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) फ्रेमवर्क समझौता पर भी हस्ताक्षर किया है।
  • भारत-क्रोएशिया
  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25-28 मार्च, 2019 के मध्य क्रोएशिया की राजकीय यात्रा पर रहे।
  • इस दौरान उन्होंने क्रोएशिया के राष्ट्रपति कोलिंदा ग्रैबर-किटरोविक और प्रधानमंत्री आंद्रे प्लेंकोविक के साथ बैठकें की।
  • राष्ट्रपति कोविंद क्रोएशिया की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय राष्ट्राध्यक्ष हैं।
  • राष्ट्रपति कोविंद ने 27 मार्च को ‘भारत-क्रोएशिया संबंध-अग्रिम पथ की ओर’ विषय पर जगरेब विश्वविद्यालय में संबोधन किया।
  • ध्यातव्य है कि जगरेब विश्वविद्यालय इस वर्ष अपनी स्थापना की 350वीं वर्षगांठ मना रहा है तथा जगरेब विश्वविद्यालय में इंडोलॉजी (भारत विद्या) विभाग का छः दशकों का एक लंबा इतिहास है। साथ ही एक दशक पूर्व ‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR : Indian Council for Cultural Relations) द्वारा हिंदी चेयर की स्थापना की गई थी।
  • राष्ट्रपति कोविंद से पूर्व वर्ष 1965 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इस विश्वविद्यालय का दौरा किया था।
  • 27 मार्च, 2019 को ही राष्ट्रपति कोविंद ने भारत-क्रोएशिया बिजनेस फोरम को संबोधित किया। इस फोरम की बैठक में 30 भारतीय कंपनियों ने भाग लिया।
  • इस समारोह का आयोजन क्रोएशियन चैंबर ऑफ इकोनॉमी, एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया, कनफेडेरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री तथा फिक्की ने किया था।
  • 28 मार्च, 2019 को राष्ट्रपति कोविंद को क्रोएशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड ऑर्डर ऑफ द किंग ऑफ तोमीस्लाव (Tomislav)’ प्रदान किया गया।
  • 28 मार्च, 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोलीविया के शांताक्रूज स्थित वीरू वीरू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे जहां उनका स्वागत बोलीविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेस ने किया।
  • दोनों देशों के मध्य राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से भारत और बोलीविया के मध्य यह अब तक का पहला उच्चस्तरीय दौरा है।
  • इस अवसर पर राष्ट्रपति मोरालेस ने राष्ट्रपति कोविंद को बोलीविया के सबसे बड़े राज्य सरकारी सम्मान-‘कोंडोर डी लॉस एंडीज एन एल गादो डी ग्रान कॉलर’ से सम्मानित किया।
  • महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर, भारत ने बोलीविया के लिए गांधीजी की दो अर्द्धप्रतिमा की पेशकश की, जिसे बोलीविया ने स्वीकार कर लिया।
  • इस यात्रा के दौरान भारत एवं बोलीविया के मध्य आठ समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किया गया, जिनमें सांस्कृतिक क्षेत्र, राजनयिकों के लिए वीजा में छूट, राजनयिक अकादमियों के मध्य आदान-प्रदान, खनन, अंतरिक्ष, पारंपरिक चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना और सामुद्रिक रेलवे परियोजना शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त बोलीविया ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क समझौता पर हस्ताक्षर करके अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हो गया।
  • 29 मार्च, 2019 को राष्ट्रपति ने यूनिवर्सिडाड ऑटोनमा गेब्रियल रेने मोरेनो का दौरा कर महात्मा गांधी के नाम पर विश्वविद्यालय के सभागार का नामकरण करते हुए एक शिलापट्ट का अनावरण किया।
  • साथ ही उन्होंने भारत-बोलीविया बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया।

बोलीविया यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित समझौतों/समझौता-ज्ञापनों की सूची

क्र.सं.

समझौता

1.

राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा से छूट पर समझौता।

2.

विदेश सेवा संस्थान, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली और राजनयिक अकादमी, विदेश मंत्रालय, बोलीविया के बीच समझौता-ज्ञापन।

3.

द्वि-महासागरीय रेलवे एकीकरण कॉरिडोर परियोजना के बारे में सहयोग पर समझौता-ज्ञापन।

4.

भू-विज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता-ज्ञापन।

5.

भारत एवं बोलीविया सरकार के मध्य वर्ष 2019-21 की अवधि हेतु सांस्कृतिक आदान-प्रदान का कार्यक्रम।

6.

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी हेतु भारत-बोलीविया उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए समझौता।

7.

पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग पर दोनों सरकारों के मध्य समझौता-ज्ञापन।

8.

बाह्य अंतरिक्ष के अन्वेषण एवं शांतिपूर्ण उद्देश्यों के प्रयोग हेतु इसरो एवं एजेंसिया-बोलीवियना इस्पेसियल के मध्य सहयोग हेतु समझौता-ज्ञापन।

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 30 मार्च, 2019 को तीन देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में चिली की राजधानी सैंटियागो पहुंचे।
  • 31 मार्च, 2019 को राष्ट्रपति कोविंद ने सैंटियागो में पाब्लो नेरूदा संग्रहालय का दौरा किया तथा 1 अप्रैल, 2019 को चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टियन पिनेरा ने राष्ट्रपति महल में राष्ट्रपति कोविंद का औपचारिक स्वागत किया।
  • आपसी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने हेतु चिली ने वैध अमेरिकी वीजा धारक भारतीयों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा की घोषणा की।
  • साथ ही भारत और चिली ने खनन, संस्कृति और विकलांगता के क्षेत्र में तीन समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
  • राष्ट्रपति कोविंद ने भारतीय बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश के लिए चिली के ‘सॉवरिन वेल्थ फंड’ को आमंत्रित किया।
  • राष्ट्रपति की तीन देशों की राजकीय यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने एवं द्विपक्षीय संबंधों के बहुआयामी विकास को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रेरित थी। परंतु इन यात्राओं के गहरे आर्थिक मायने भी थे। राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय व्यापार मंचों में शामिल होने वाले बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल इन देशों के साथ व्यापार संबंधों के विस्तार में भारतीय कंपनियों की बढ़ती रुचि का संकेत देते हैं। भारत का लातिनी अमेरिकी क्षेत्र हेतु एक केंद्रित व्यापार दृष्टिकोण है तथा भारत इस क्षेत्र में व्यापारिक सहयोग बढ़ाने हेतु भारत-लातिनी अमेरिका और कैरेबियाई कॉन्क्लेव का आयोजन करता रहा है। ऐसी स्थिति में दो लातिनी अमेरिकी राष्ट्रों एवं 1 यूरोपीय संघ के सदस्य राष्ट्र की यात्रा भारत के आर्थिक हितों को सुदृढ़ता प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

सं. ललिन्द्र कुमार