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यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019

The Protection of Children from Sexual Offenses (Amendment) Bill, 2019
  • पृष्ठभूमि
  • देश में मासूम बच्चों के साथ अमानवीय कृत्यों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर मौजूदा कानूनों को और अधिक कठोर बनाने के उद्देश्य से संसद द्वारा पॉक्सो कानून में संशोधन किया गया है। ध्यातव्य है कि बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए संसद द्वारा पॉक्सो अधिनियम, 2012 पारित किया गया था। यह अधिनियम बच्चों को यौन हमले, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से बचाने का प्रयास करता है।
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 24 जुलाई, 2019 को राज्य सभा द्वारा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित कर दिया गया। इसे 18 जुलाई, 2019 को राज्य सभा में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने पेश किया था। यह विधेयक ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012’ (POCSO : Protection of Children From Sexual offences Act, 2012) में संशोधन प्रस्तावित करता है
  • भेदक यौन हमला (Penetrative Sexual Assault)
  • अधिनियम, 2012 के तहत यदि कोई व्यक्ति ‘भेदक यौन हमला’ करता है, यदि वह : (i) बच्चे के योनि, मुंह, मूत्रमार्ग या गुदा में अपना लिंग पेनीट्रेट करता है, या (ii) बच्चे से ऐसा करवाता है, या (iii) बच्चे के शरीर में किसी अन्य वस्तु को डालता है, या (iv) बच्चे के शरीर के अंगों पर अपना मुंह लगाता है।
  • इस तरह के अपराध के लिए सजा 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना है। विधेयक द्वारा न्यूनतम सजा को 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव है। अगर कोई व्यक्ति 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे पर भेदक यौन हमला करता है, तो उसे जुर्माने के साथ 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास का दंड प्रस्तावित है।
  • गंभीर भेदक यौन हमला (Aggravated Penetrative Sexual Assault)
  • अधिनियम, 2012 के तहत कुछ कृत्यों को इस रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें ऐसे मामले शामिल हैं, जब एक पुलिस अधिकारी, सशस्त्र बलों का सदस्य या एक लोक सेवक एक बच्चे पर भेदक यौन हमला करता है। इसमें उन मामलों को भी शामिल किया गया है, जहां अपराधी बच्चे का रिश्तेदार है या अगर हमले से बच्चे के यौनांगों को चोट पहुंचती है या बच्ची गर्भवती हो जाती है।
  • विधेयक द्वारा इसमें दो और आधारों को जोड़ा गया है-(i) हमले के कारण बच्चे की मौत और (ii) प्राकृतिक आपदा के दौरान किया गया हमला या हिंसा की किसी भी अन्य समान स्थितियों में।
  • अधिनियम के तहत इस प्रकार के अपराधों के लिए 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
  • विधेयक, 2019 के तहत न्यूनतम सजा 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष और अधिकतम सजा मृत्युदंड किए जाने का प्रस्ताव है।
  • गंभीर यौन हमले (Aggravated Sexual Assault)
  • अधिनियम, 2012 के तहत ‘यौन हमले’ में ऐसी क्रियाएं शामिल हैं, जहां एक व्यक्ति यौन भावना से बच्चे की योनि, लिंग, गुदा या स्तन को छूने का प्रयास करता है।
  • ‘गंभीर यौन हमले’ में ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें अपराधी, बच्चे       का रिश्तेदार है या यदि वह यौनांगों को क्षति पहुंचाता है।
  • विधेयक, 2019 द्वारा इसमें दो और अपराधों को शामिल किया गया है- (i) प्राकृतिक आपदा के दौरान किए गए हमले (ii) शीघ्र यौन परिपक्वता प्राप्त करने के उद्देश्य से बच्चों में हॉर्मोन या रासायनिक तत्वों को प्रदान करना।
  • पोर्नोग्राफिक उद्देश्य (Pornographic purposes)
  • विधेयक, 2019 बाल पोर्नोग्राफी को एक स्पष्ट चित्रण के रूप में परिभाषित करता है, जिसमें वास्तविक रूप से एक बच्चे के फोटोग्राफ, वीडियो, डिजिटल या कंप्यूटर जनित छवि शामिल है।

पोर्नोग्राफिक उद्देश्य के लिए बच्चों का प्रयोग से संबंधित अपराध एवं दंड

अपराध

दंड

पॉक्सो अधिनियम, 2012

विधेयक, 2019

1.

पोर्नोग्राफिक उद्देश्य के लिए बच्चों का प्रयोग

अधिकतम – 5 वर्ष

न्यूनतम – 5 वर्ष

2.

परिणाम, भेदक यौन हमला

न्यूनतम – 10 वर्ष

अधिकतम – आजीवन कारावास

न्यूनतम – 10 वर्ष (बच्चे की उम्र 16 वर्ष से कम होने पर : 20 वर्ष) अधिकतम-आजीवन कारावास

3.

परिणाम, गंभीर भेदक यौन हमला

आजीवन कारावास

न्यूनतम – 20 वर्ष, अधिकतम – आजीवन कारावास या मृत्युदंड

4.

परिणाम, यौन हमला

न्यूनतम – 6 वर्ष, अधिकतम – 8 वर्ष   न्यूनतम

न्यूनतम 3 वर्ष, अधिकतम – 5 वर्ष

5.

परिणाम, गंभीर यौन हमला

न्यूनतम – 8 वर्ष, अधिकतम – 10 वर्ष

   न्यूनतम – 5 वर्ष, अधिकतम – 7 वर्ष

नोट : किसी भी रूप में यौन हमले के लिए बच्चे का प्रयोग करने के लिए दंड, यौन उद्देश्यों के लिए बच्चे के प्रयोग के लिए न्यूनतम 5 वर्ष की सजा के अतिरिक्त है।

  • पोर्नोग्राफिक सामग्री का भंडारण
  • विधेयक, 2019 में वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए पोर्नोग्राफिक सामग्री के भंडारण के अपराध के लिए 3 से 5 वर्ष की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान प्रस्तावित है।
  • विधेयक में बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री के भंडारण के लिए दो अन्य अपराध भी शामिल किए गए हैं-(i) बच्चे को शामिल करने वाली अश्लील सामग्री को नष्ट करने या मिटाने या रिपोर्ट करने में विफल, तथा (ii) रिपोर्टिंग के उद्देश्य को छोड़कर ऐसी सामग्री को प्रसारित करना, प्रदर्शित करना, वितरित करना।
  • बच्चों से संबंधित अन्य अधिनियम
  • बच्चों से संबंधित अन्य अधिनियम इस प्रकार हैं-

(1) बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006

 (2) बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986

 (3) किशोर न्याय (बच्चों की देख-भाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000

(4) किशोर न्याय (बच्चों की देख-भाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015

(5) बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009

 (6) बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005

  • निष्कर्ष
  • निःसंदेह किसी भी अपराध के लिए कानून कठोर होने चाहिए, साथ ही उनका क्रियान्वयन भी उतनी ही तत्परता से होना चाहिए। संसद में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और दुष्कर्म के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए केंद्र सरकार ने 1023 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने को मंजूरी दी है। अभी तक 18 राज्यों ने ऐसी अदालतों की स्थापना के लिए सहमति जताई है। इस संदर्भ में प्रयास किया जा रहा है कि बच्चे अपने खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के बारे में निडर होकर शिकायत कर सकें और अपने अभिभावकों को बता सकें।

सं. कालीशंकरशारदेय