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मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना

Chief Minister Krishi Ashirwad Yojana
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 10 अगस्त, 2019 को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने झारखंड में ‘मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना’ का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत एक एकड़ तक जमीन वाले किसानों को 5 हजार और पांच एकड़ तक जमीन वाले किसानों को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। जबकि, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के तहत किसानों को प्रति वर्ष 6 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। इस प्रकार दोनों योजनाओं से झारखंड के किसानों को प्रत्येक वर्ष कम-से-कम 11 हजार और अधिकतम 31 हजार रुपये का लाभ मिल सकेगा।
  • पात्रता शर्त
  • योजना का लाभ राज्य के उन किसानों को ही मिलेगा, जो सरकारी नौकरी न करते हों, आयकर रिटर्न दाखिल न करते हों और 10 हजार रुपये से ऊपर पेंशन न पाते हों। योजना की राशि को सरकार किसानों को दो किश्तों में देगी। एक एकड़ भूमि वाले किसानों को पहली किश्त 2500 रुपये की दी जाएगी। शेष राशि छः माह बाद दी जाएगी।
  • पृष्ठभूमि
  • झारखंड में किसानों की आर्थिक समृद्धि और खेती को लाभदायक बनाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना’ का शुभारंभ किया गया है। राज्य के 76 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं। कुल भूमि का 68 प्रतिशत कृषि एवं संबंधित कार्यों पर आधारित है, लगभग 83 प्रतिशत खेत 5 एकड़ से कम आकार के हैं, जो कुल भूमि का 37 प्रतिशत है। राज्य के कृषक आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। इन्हीं तथ्यों के दृष्टव्य केंद्र व राज्य सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प को मूर्तरूप देने हेतु राज्य सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना’ लागू की गई है।
  • झारखंड : अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • झारखंड राज्य की सीमा पांच राज्यों (पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार एवं ओडिशा) से स्पर्श करती है। आर्थिक वृद्धि के संदर्भ में झारखंड शीर्षस्थ राज्यों में शामिल है। वर्ष 2017-18 में इसकी  सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वृद्धि दर 10.22 प्रतिशत रही। यह विश्व के सबसे संपन्न खनिज क्षेत्रों में से एक है और भारत के खनिज व कोयला भंडार का क्रमशः 40 प्रतिशत एवं 29 प्रतिशत हिस्सा धारण करता है। राज्य में वर्ष 2017-18 के दौरान 2,070.39 करोड़ रुपये मूल्य (286.96 मिलियन डॉलर) का खनिज उत्पादन दर्ज हुआ। जबकि अप्रैल-जुलाई, 2018 के दौरान यह आंकड़ा 844.38 करोड़ रुपये (120.82 मिलियन डॉलर) का रहा।
  • अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2018 तक की अवधि के दौरान राज्य ने 113 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) इक्विटी प्रवाह को आकर्षित किया है। वर्ष 2017-18 के दौरान राज्य से कुल निर्यात 1,116.53 मिलियन डॉलर का रहा। जबकि वर्ष 2018-19 (फरवरी, 2019 तक) के दौरान, राज्य से कुल निर्यात 1,136.84 मिलियन डॉलर का रहा।
  • प्रमुख खनिज उत्पादक होने के साथ-साथ यह टसर रेशम (गैर-शहतूत या नॉन मुलबेरी सिल्क) का एक बड़ा उत्पादक भी है। वर्ष 2017-18 में राज्य में 2,220.0 मिलियन टन कच्चे रेशम का उत्पादन हुआ और वित्त वर्ष 2018-19 (दिसंबर, 2018 तक) में यह आंकड़ा 949.3 मिलियन टन का रहा। चावल राज्य की प्रमुख खाद्य फसल है, जो 80 प्रतिशत फसली क्षेत्र (Cropped area) को आच्छादित करता है।