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# मी टू अभियान

#Me Too campaign
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • विश्व भर की महिलाओं द्वारा कार्यस्थल पर अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के अनुभवों को सार्वजनिक रूप से साझा करने के कारण यह अभियान इन दिनों बहुत चर्चा में है।
  • आंदोलन का उद्देश्य
  • इस आंदोलन का उद्देश्य यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के नेतृत्व में एक ऐसे माहौल का निर्माण करना है, जिससे यौन उत्पीड़न को रोकने के साथ ही उसके विरुद्ध खुलकर आवाज उठाई जा सके।
  • पृष्ठभूमि
  • ‘मी टू अभियान’ का प्रारंभ अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्त्री तराना बर्के (Tarana Burke) ने वर्ष 2006 में किया था।
  • प्रारंभ में इस आंदोलन का उद्देश्य यौन हिंसा का शिकार विशेषकर अश्वेत वर्ण वाली लड़कियों और महिलाओं के साथ ही गरीब समुदाय की महिलाओं को इस सदमे से उबरने में मदद करना था।
  • इस आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानो को जाता है, जिन्होंने अक्टूबर, 2017 में यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को इसके बारे में ट्वीट (Tweet) करने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • यह आंदोलन सामान्य वर्ग के साथ ही उच्च वर्ग के सामने आने से और मजबूत हुआ।
  • अमेरिका की विख्यात फिल्म अभिनेत्रियों जैसे- ग्वेनेथ पैल्ट्रो, जेनिफर लॉरेंस और उमा थर्मन ने अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार पर खुलकर बात की। हॉलीवुड फिल्म निर्माता हार्वे वीन्स्टीन (Harvey Weinstein) के विरुद्ध 70 से अधिक महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।
  • अमेरिका के बाद यह आंदोलन ब्रिटेन, भारत और पाकिस्तान सहित विश्व के अनेक देशों तक फैल गया। यूरोपीय संसद ने तो ‘मी टू अभियान’ के समर्थन में एक विशेष सत्र का आयोजन भी किया।
  • प्रतिष्ठित पत्रिका ‘टाइम’ द्वारा # मी टू अभियान (The Silence Breakers) को वर्ष 2017 का पर्सन ऑफ द ईयर घोषित किया गया था।
  • भारत में ‘मी टू अभियान’
  • अक्टूबर, 2018 में बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया, जो भारत में ‘मी टू अभियान’ का उत्प्रेरक बना।
  • तनुश्री के आरोपों से प्रेरित होकर फिल्म, मीडिया और राजनीति जगत की कई महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से बयान दिए।
  • अक्टूबर, 2018 में भारतीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर को यौन उत्पीड़न को आरोपों के चलते अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
  • गौरतलब है कि भारत में यह अभियान ‘हैशटैग मी टू इंडिया’ (# MeToo India) नाम से चर्चित है।
  • भारत सरकार की प्रतिक्रिया
  • कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों को देखने के लिए भारत सरकार द्वारा 24 अक्टूबर, 2018 को मंत्रियों के एक समूह (GoM) का गठन किया गया है।
  • इस समूह की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं।
  • समिति के अन्य सदस्यों में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और वंफ्रेद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी शामिल हैं।
  • समूह को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मुद्दों और महिला सुरक्षा से जुड़े वर्तमान प्रावधानों की समीक्षा करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2017 में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए एक ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली बॉक्स – शी बॉक्स (SHe-Box) का शुभारंभ किया है।
  • उल्लेखनीय है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 को अधिनियमित किया गया है।
  • जस्टिस वर्मा समिति की रिपोर्ट
  • न्यायमूर्ति जे.एस.वर्मा समिति का गठन वर्ष 2012 में निर्भया गैंगरेप मामले (16 दिसंबर) के बाद किया गया था।
  • इस समिति ने अपनी रिपोर्ट 23 जनवरी, 2013 को सौंपी थी।
  • समिति ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न विधेयक में बदलाव की मांग करते हुए आंतरिक शिकायत समिति के स्थान पर एक रोजगार अधिकरण (Employment Tribunal) की स्थापना की सिफारिश की थी।
  • ज्ञातव्य है कि उस समय कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) विधेयक संसद में विचाराधीन था।
  • समिति द्वारा प्रस्तावित रोजगार अधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले कोलेजियम द्वारा की जानी चाहिए।
  • इस अधिकरण में दो सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जिसमें कम से कम एक महिला हो, दो प्रसिद्ध समाजशास्त्री और लिंग आधारित भेदभाव के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता को शामिल होना चाहिए