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मासिक पत्रिका फरवरी-मार्च,2019 पी.डी.एफ. डाउनलोड

चुनाव पूर्व अंतरिम बजट 2019-20 में किसानों एवं निम्न मध्य वर्ग का खास ख्याल रखा गया है। 2 एकड़ से कम जोत के धारक किसानों के खाते में सीधे प्रति वर्ष 6000 रु. डाले जाएंगे। इसी प्रकार 5 लाख रु. से कम आय अर्जित करने वाले निम्न मध्य वर्ग को आयकर से मुक्त कर दिया गया है। अर्थविदों का मानना है कि अनेक लोक लुभावन घोषणाओं के मोह में सरकार बजट घाटा लक्ष्यों को विस्मृत कर बैठी है। वर्ष 2019-20 के बजट में राजकोषीय घाटा 3.4 प्रतिशत लक्ष्यित किया गया है, जबकि पहले यह लक्ष्य 3.1 प्रतिशत ही निर्धारित किया गया था। यह जरूर है कि बजट वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3 प्रतिशत ही रखा गया है। चुनावों के पश्चात कोई भी सरकार आएगी वह 2019 की बजट घोषणाओं को अनदेखा नहीं कर सकती है क्योंकि इसमें गरीब एवं किसान विरोधी छवि प्रदर्शित होने का खतरा विद्यमान रहेगा। यदि कर-संग्रह ने जोर नहीं पकड़ा तो इन घोषणाओं को पूरा करते हुए सरकार को राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों की पूर्ति हेतु नए कदम उठाने पड़ेंगे। इस अंक के आवरण आलेख में बजट 2019-20 का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

बांग्लादेश के 11वें आम चुनाव 30 दिसंबर, 2018 को संपन्न हुए। आवामी लीग नीत गठबंधन ने लगभग 82 प्रतिशत मतों के साथ 300 में से 288 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल कर लिया। वर्ष 1971 में स्वतंत्रता हासिल करने के बाद बांग्लादेश में 11 चुनाव हुए हैं लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवीनतम 11वां चुनाव ही सबसे कम लोकतांत्रिक रहा है। आवामी लीग एवं उसकी नेत्री शेख हसीना वाजेद ने पुलिस, न्यायालय, चुनाव आयोग सहित सभी सरकारी संस्थानों का जमकर उपयोग अपनी राजनीतिक संभावनाओं को सदृढ़ करने में किया। कहते हैं यहां मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी नहीं बल्कि लोकतंत्र हार गया। इस अंक के सामयिक आलेख में बांग्लादेश आम चुनाव, 2018 का संपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

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सी.बी.आई. हालिया दिनों में जितना समाचार सुर्खियों में रही है इससे पूर्व शायद ही कभी रही हो। पूर्व में सत्तारूढ़ दल पर अपने हित में सी.बी.आई. के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। इस बार सी.बी.आई. की फजीहत तब अधिक हो गई जब संगठन के प्रथम एवं द्वितीय पदानुक्रम के अधिकारी आपस में ही आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगे। अंततः दोनों ही शीर्ष अधिकारियों को सरकार ने हटा दिया। सर्वोच्च न्यायालय को एक बार पुनः तब हस्तक्षेप करना पड़ा, जब कोलकाता पुलिस एवं सी.बी.आई. का विवाद बढ़ा। आज स्थिति यह हो गई है कि सी.बी.आई. विवाद का दूसरा नाम हो गया है। सी.बी.आई. की स्वतंत्रता पर सामयिक आलेख इस अंक में प्रस्तुत किया गया है।

कहते हैं आरक्षण भारत में एक बड़़ा मुद्दा है, तो इस मुद्दे का सटीक समाधान सभी को आरक्षण देकर क्यों न कर दिया जाए। सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण हेतु बनाए गए अधिनियम को कुछ इसी रूप में देखा जा रहा है। 10 प्रतिशत आर्थिक आरक्षण हेतु जो मापदंड बनाए गए हैं उसमें अधिकांश समावेशित हो जाएंगे। फिलहाल इस आरक्षण का समवेत स्वर से स्वागत किया गया है। इस टॉपिक पर सामयिक आलेख भी इस अंक में प्रस्तुत किया गया है।

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इस अंक के साथ खनिज (Minerals) भंडार, उत्पादन एवं व्यापार के भारत और विश्व के आंकड़ों को पुस्तिका के रूप में निःशुल्क प्रदान किया गया है। ये आंकड़े भारत सरकार द्वारा प्रकाशित मिनरल ईयर बुक से लिए गए हैं। परीक्षार्थी इन आंकड़ों का उपयोग वर्षभर आगामी परीक्षाओं हेतु कर सकते हैं।

UPPCS मुख्य परीक्षा हेतु भी अध्ययन सामग्री इस अंक में प्रस्तुत की गई है। मुख्य परीक्षा के परीक्षार्थियों के लिए यह सामग्री खासी उपयोगी सिद्ध होगी।

पाठकों से अनुरोध है कि अंक पर अपनी प्रतिक्रिया प्रेषित करें।