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मासिक पत्रिका जून-जुलाई,2019 पी.डी.एफ. डाउनलोड

Magazine June-July,2019

लोक सभा निर्वाचन, 2019 की मैराथन दौड़ में पूर्ण विजय हासिल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश में पुनः एक बार स्थापित हो चुकी है। वर्ष 1975 में आपातकाल लागू होने के बाद प्रायः वर्ष 2004 तक भारतीय राजनीति में अस्थिरता का एक लंबा दौर चला। वर्ष 2004 के बाद भारतीय मतदाताओं ने भले ही किसी एक दल की सरकार को पूर्ण बहुमत न दिया हो, किंतु इस प्रकार का जनादेश अवश्य दिया जिसमें लगातार दो बार न केवल एक ही दल के नेतृत्व में सरकार बनी, बल्कि एक ही व्यक्ति दो बार प्रधानमंत्री भी बने। वर्ष 2004 के बाद एक दल और एक प्रधानमंत्री के पीछे खड़ा होने को भारतीय जनमत ने लगातार मजबूती प्रदान करते हुए वर्ष 2019 में पुख्ता अंजाम तक पहुंचा दिया। अमेरिका की तरह भारतीय राजनीति कमोबेश उसी पैटर्न पर अग्रसर होती प्रतीत हो रही है, जिसमें यह स्वीकार्यता है कि एक दल और एक व्यक्ति को कम-से-कम 2 बार मौका दिया जाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि एक कार्यकाल देश और उसकी समस्याओं को समझने में चला जाता है, वास्तविक कार्य तो दूसरे कार्यकाल में ही होता है। यही कारण है कि किसी प्रधानमंत्री के दूसरे कार्यकाल से अपेक्षाएं भी गहरी होती हैं।

यह भारतीय जनादेश भले ही राजनीतिक दृष्टि से सूझ-बूझ भरा करार दिया जाए, किंतु अर्थविदों के लिए यह समझ से परे है। वर्ष 2004 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार सभी आर्थिक मानदंडों पर ऊंचाई की ओर थी और फील गुड फैक्टर के आधार पर पुनः सरकार बनने की तीव्र संभावना व्यक्त की जा रही थी, तब जनता ने उसे नकार दिया था और अब वर्ष 2019 में जब राष्ट्रीय आय गिरावट की ओर है और बेरोजगारी दर 45 वर्षों में सर्वाधिक उच्च स्तर पर है, तब जनता ने सरकार को सिर माथे पर बैठाया। वस्तुतः जनता बेजान आंकड़ों की तह में न जाकर सरकारी नीतियों की जीवंतता में विश्वास करती है। भारतीय जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दूसरा कार्यकाल प्रदान करके उन्हें यह मौका दिया है कि वे भारत की विकास की गति को तीव्र करें और उसे वास्तविक वैश्विक महाशक्ति में परिवर्तित करें। इसके लिए निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था पर फोकस करना होगा। इसी संदर्भ में मोदी सरकार : प्रचंड जनादेश इस अंक का आवरण आलेख है।

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आतंकवाद नासूर है, भारत के लिए इसका जनक पाकिस्तान है, जिसके दो सबसे बड़े स्रोत हाफिज सईद और मसूद अजहर हैं। इनमें से हाफिज सईद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1267 के अंतर्गत सूचीबद्ध है। मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा था, लेकिन चीन का समर्थन न प्राप्त कर पाने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। अंततः चीन द्वारा अपने विरोध को वापस ले लेने के परिणामस्वरूप 1 मई, 2019 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया। यह भारत के लिए बहुत बड़ी सफलता है।

आम चुनावों के दौरान फिल्मों के माध्यम से भी जनता तक पहुंचने का चलन रहा है। जरूरी नहीं है कि इनके पीछे राजनीतिक दल हों। चुनाव के दिनों में जनता की दिलचस्पी को भुनाने के लिए भी राजनीतिक फिल्मों का निर्माण किया जाता है। ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’, ‘इंदू सरकार’, ‘ताशकंद’, ‘उरी : द सर्जिकल स्ट्राइक’ एवं ‘पी.एम. नरेंद्र मोदी’ हाल-फिलहाल प्रदर्शित राजनीतिक फिल्में रही हैं। इन फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर विवाद भी रहा है। इन फिल्मों के ऐतिहासिक सफर पर इस अंक के आलेख, ‘सिनेमा, चुनाव और सेंसरशिप की राजनीति’ में प्रकाश डाला गया है।

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इस अंक के साथ आई.ए.एस., 2019 (प्रारंभिक) परीक्षा के सामान्य अध्ययन का हल प्रश्न-पत्र निःशुल्क प्रदान किया गया है। इसमें मात्र प्रश्नों का व्याख्यात्मक हल ही नहीं है बल्कि हल के साथ यह भी बताया गया है कि प्रश्न करेण्ट अफेयर्स की किस हालिया घटना से संबद्ध रहा है। इससे पाठकों को आगामी परीक्षा की तैयारी में सहायता प्राप्त होगी। उल्लेखनीय है कि सामयिक घटनाओं से संबद्धता के आधार पर हम सामान्य अध्ययन के प्रश्नों की शृंखला GS प्रत्यंत प्रत्येक दो माह पर प्रकाशित करते हैं। इस शृंखला का तीसरा अंक जुलाई माह में प्रकाश्य है। सिविल सेवा के अभ्यर्थियों को अवश्य ही इन अंकों का अवलोकन करना चाहिए।

पाठकों से अनुरोध है कि अंक के संबंध में सुझाव/शिकायतें बेहिचक लिख भेजें।